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स्कूली बस में मंडरा रहा बच्चों के सिर पर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Wed, 30 Aug 2017 11:50 PM IST
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तिंदवारी रोड पर स्कूली वाहनों की चेकिंग करती ट्रैफिक पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। मंडल मुख्यालय के महंगे स्कूलों में रोजाना खटारा और जर्जर बसोें पर आ जा रहे बच्चों के सिर पर जानलेवा खतरा मंडरा रहा है। बुधवार को पुलिस की अचानक चेकिंग में इसका खुलासा हुआ। सेंट मेरीज सीनियर सेकेंड्री स्कूल में चलाई जा रही बस की लगेज रैक और सीलिंग टूटी हुई लटकी मिली। इसी के नीचे बच्चे बैठाए गए थे। पुलिस ने बस का चालान कर दिया है। पुलिस ने इस स्कूल की छह बसों समेत कुल 14 स्कूली वाहनों का चालान किया है।
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सेंट मेरीज स्कूल के लिए सिटी बस सर्विस द्वारा बस सेवा चलाई जा रही है। बसें ज्यादातर पुरानी और खटारा हो चुकी हैं। प्रत्येक बच्चे से 1100 रुपये बस का शुल्क वसूला जाता है, लेकिन इन बसों में मासूमों के साथ किए जा रहे खिलवाड़ की मंगलवार को यातायात पुलिस द्वारा की गई चेकिंग में पोल खुल गई। छुट्टी के समय दोपहर को ट्राफिक पुलिस और कालूकुआं चौकी पुलिस ने सेंट मेरीज स्कूल के पास चेकिंग अभियान चलाया।
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यातायात प्रभारी मुन्नाबाबू निरंजन और प्रशिक्षक आफाक खां ने एसपी शालिनी के निर्देश पर चेकिंग की। सेंट मेरीज की बसों के अंदर बच्चों की सीट पर शिक्षक भी बैठी मिलीं। इससे गंभीर और बच्चों के जीवन से खिलवाड़ की बानगी यह सामने आई कि सीट के ऊपर लगा लगेज टूटकर लटका हुआ था। यह कभी भी बच्चों के सिर पर गिर सकता है। यातायात प्रभारी और प्रशिक्षक ने कड़ी आपत्ति जताते हुए ड्राइवर को सख्त चेतावनी दी और बस का चालान कर दिया।
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पुलिस ने चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, बसों के कागजात, बस के अंदर लगे अग्निशमन यंत्र और फर्स्टएड बाक्स आदि भी देखे। ज्यादातर में गड़बड़ी या कमी पाई गई। सीट और मानक से ज्यादा संख्या में बच्चों को बैठाने और तेज रफ्तार से चलाने को दंडनीय अपराध बताते हुए चेतावनी दी। उधर, इस बारे में सिटी बस सर्विस के मैनेजर आसिफ का कहना है कि सीटों से डेढ़ गुना संख्या में बच्चों को बैठाने की अनुमति है। बच्चों के बस में खड़े होकर यात्रा करने पर मैनेजर ने सफाई दी कि वह अपनी मर्जी से खड़े रहते हैं। कोई बस ओवरलोड नहीं होती।
उधर, एआरटीओ हरीशंकर सिंह ने कहा कि स्कूली बसों पर भी नियम कानून लागू हैं। चेकिंग की जाएगी ओवरलोड मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। मानक और वाहन के अभिलेखों में कोई कमी मिली तो कड़ी कार्रवाई होगी। एआरटीओ ने कहा कि बच्चों की बसों में कोई समझौता नहीं होगा।