{"_id":"61dc80cfc8f9131bc7163415","slug":"the-third-wave-came-brought-the-migrants-home-again-banda-news-knp6746525173","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीसरी लहर आई, प्रवासियों को फिर घर लाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीसरी लहर आई, प्रवासियों को फिर घर लाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। कोरोना की तीसरी लहर में एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की घर वापसी शुरू हो गई है। पिछले एक पखवारे में करीब 2000 प्रवासी मजदूर महानगरों से वापस आ गए हैं। इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायतों पर दबाव बढ़ गया है।
जिले के एक लाख से अधिक मजदूर प्रदेश और प्रदेश के बाहर महानगरों में काम कर रहे हैं। ये त्योहार व चुनाव के समय ही गांव आते हैं। पिछले साल कोरोना में हुए लॉकडाउन में करीब 60 हजार मजदूर अपने घर लौटे थे। 42 हजार मजदूरों को उनके गांवों में ही मनरेगा में काम दिया गया था। बाद में हालात सुधरने पर ये मजदूर काम की तलाश में लौट चुके थे।
पिछली बार से सबक लेकर प्रवासी मजदूर तीसरी लहर के प्रचंड होने से पहले ही घर वापसी करने लगे हैं। जिला पंचायत राज विभाग के मुताबिक करीब दो हजार प्रवासी मजदूर परिवार सहित आ चुके हैं। इनके लौटने का सिलसिला जारी है। ऐसे में ग्राम पंचायतों के समक्ष उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती आ खड़ी हुई है।
विज्ञापन
अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रमेशचंद्र गुप्ता ने प्रधानों व सचिवों को निर्देश दिए हैं कि लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराएं। इसके लिए नए कार्य शुरू किए जाएं। उपायुक्त मनरेगा राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि प्रवासी मजदूरों को काम देने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। नए कार्यों का सृजन कर इन्हें काम पर लगाया जाएगा। दावा किया कि कोई भी प्रवासी मजदूर बिना काम के नहीं बैठेगा।
अतर्रा के फौजदार पुरवा निवासी अंगद ने बताया कि वह दिल्ली में लोहा कंपनी में 16 हजार वेतन पर काम करता था। इसी से खर्च चल रहा था। अब तीसरी लहर में कंपनी ने आधे कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। परिवार के साथ वह गांव लौट आया है। पिपरगवां गांव का रज्जू वर्मा दिल्ली में पेटिंग का काम करता था। 15 से 20 हजार रुपये कमा लेता था। अब महामारी का संक्रमण बढ़ने से वहां परिस्थितियां बदल गईं हैं। काम नहीं मिल रहा। मजबूरन गांव लौटना पड़ा। यहां मनरेगा में मजदूरी की तलाश में है।
विज्ञापन
जिले के एक लाख से अधिक मजदूर प्रदेश और प्रदेश के बाहर महानगरों में काम कर रहे हैं। ये त्योहार व चुनाव के समय ही गांव आते हैं। पिछले साल कोरोना में हुए लॉकडाउन में करीब 60 हजार मजदूर अपने घर लौटे थे। 42 हजार मजदूरों को उनके गांवों में ही मनरेगा में काम दिया गया था। बाद में हालात सुधरने पर ये मजदूर काम की तलाश में लौट चुके थे।
विज्ञापन
पिछली बार से सबक लेकर प्रवासी मजदूर तीसरी लहर के प्रचंड होने से पहले ही घर वापसी करने लगे हैं। जिला पंचायत राज विभाग के मुताबिक करीब दो हजार प्रवासी मजदूर परिवार सहित आ चुके हैं। इनके लौटने का सिलसिला जारी है। ऐसे में ग्राम पंचायतों के समक्ष उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती आ खड़ी हुई है।
विज्ञापन
अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रमेशचंद्र गुप्ता ने प्रधानों व सचिवों को निर्देश दिए हैं कि लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराएं। इसके लिए नए कार्य शुरू किए जाएं। उपायुक्त मनरेगा राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि प्रवासी मजदूरों को काम देने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। नए कार्यों का सृजन कर इन्हें काम पर लगाया जाएगा। दावा किया कि कोई भी प्रवासी मजदूर बिना काम के नहीं बैठेगा।
अतर्रा के फौजदार पुरवा निवासी अंगद ने बताया कि वह दिल्ली में लोहा कंपनी में 16 हजार वेतन पर काम करता था। इसी से खर्च चल रहा था। अब तीसरी लहर में कंपनी ने आधे कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। परिवार के साथ वह गांव लौट आया है। पिपरगवां गांव का रज्जू वर्मा दिल्ली में पेटिंग का काम करता था। 15 से 20 हजार रुपये कमा लेता था। अब महामारी का संक्रमण बढ़ने से वहां परिस्थितियां बदल गईं हैं। काम नहीं मिल रहा। मजबूरन गांव लौटना पड़ा। यहां मनरेगा में मजदूरी की तलाश में है।