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केंद्रीय दल का बुंदेलखंड में जल संकट पर सर्वे
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 18 Dec 2015 11:08 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में गहराते जल संकट पर केंद्र सरकार
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फिर अफसरों का दल भेजकर सर्वे करा रही है। केंद्रीय अफसरों ने शुक्रवार को
यहां सिंचाई और पानी से संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।
स्थानीय अफसरों ने बजट का रोना रोकर केंद्रीय दल को साफ जता दिया कि पैसा मिले बगैर कोई काम नामुमकिन है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम इन दिनों बुंदेलखंड के भ्रमण पर है।
शुक्रवार को टीम बांदा में थी। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय परिसर में टीम ने यहां के सिंचाई, नहर, नलकूप, जल निगम आदि विभागों के अफसरों के साथ बैठक की।
उनसे पानी के संकट से निपटने के उपाय पूछे। बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल संकट से राहत दिलाने के लिए प्रबंधन पर विचार विमर्श हुआ।
केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता एएस गोयल और पीएम स्काट तथा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड क्षेत्रीय निदेशक वाईबी कौशिक ने स्थानीय अधिकारियों से प्रदेश सरकार द्वारा सिंचाई और पेयजल के लिए किए जा रहे प्रयासों और योजनाओं की जानकारी ली।
अधिकारियों ने केंद्रीय दल को बताया कि बजट के बगैर राहत कार्य और वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं हो पा रहीं। तालाबों को नलकूप से भरने के लिए जल निगम अधिकारियों ने पाइप डालने के लिए बजट की मांग की।
नहर और नलकूप विभागों के अभियंताओं ने भी बिना बजट कोई भी कार्य करा पाने में हाथ खड़े कर दिए। बैठक में केंद्रीय जल आयोग के एसडीओ एके राय, जल निगम 16वीं शाखा अभिशासी अभियंता एके सिंह और लघु डाल नहर एक्सईएन एके मल्होत्रा, केन केनाल एक्सईएन ओपी मौर्या सहित कई अन्य अभियंता उपस्थित रहे।
केंद्रीय दल यहां के बाद खजुराहो के लिए रवाना हो गया। वहां बुंदेलखंड मेें शामिल पन्ना, छतरपुर और सतना जनपदों के अफसरों के साथ बैठक करेंगे। मुख्य अभियंता गोयल ने बताया कि दिल्ली जाकर वे अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे।
केंद्रीय जल आयोग की टीम ने बुंदेलखंड में साल दर साल कम हो रही बारिश और तेजी से नीचे खिसक रहे भूजल स्तर पर चिंता जताई। बांधों में पानी के डेड स्टोर के हालात पर भी चर्चा की।
जल आयोग के स्थानीय अधिकारियों ने केंद्रीय दल को वर्ष 2010 से 2015 तक बारिश के आंकड़े सौंपे। वर्ष 2013 को छोड़कर हर वर्ष औसत बारिश कम रही।
आंकड़ों के मुताबिक यहां की औसत सालाना बारिश 1250 मिलीमीटर है, लेकिन इतनी बारिश नहीं हो रही। वर्ष 2010 में 723.4, 2011 में 1070.1, 2012 में 873.8, 2013 में 1790.4, 2014 में 744 और वर्ष 2015 में मात्र 614.4 मिमी बारिश हुई है।
स्थानीय अफसरों ने बजट का रोना रोकर केंद्रीय दल को साफ जता दिया कि पैसा मिले बगैर कोई काम नामुमकिन है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम इन दिनों बुंदेलखंड के भ्रमण पर है।
शुक्रवार को टीम बांदा में थी। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय परिसर में टीम ने यहां के सिंचाई, नहर, नलकूप, जल निगम आदि विभागों के अफसरों के साथ बैठक की।
उनसे पानी के संकट से निपटने के उपाय पूछे। बुंदेलखंड को सिंचाई और पेयजल संकट से राहत दिलाने के लिए प्रबंधन पर विचार विमर्श हुआ।
केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता एएस गोयल और पीएम स्काट तथा सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड क्षेत्रीय निदेशक वाईबी कौशिक ने स्थानीय अधिकारियों से प्रदेश सरकार द्वारा सिंचाई और पेयजल के लिए किए जा रहे प्रयासों और योजनाओं की जानकारी ली।
अधिकारियों ने केंद्रीय दल को बताया कि बजट के बगैर राहत कार्य और वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं हो पा रहीं। तालाबों को नलकूप से भरने के लिए जल निगम अधिकारियों ने पाइप डालने के लिए बजट की मांग की।
नहर और नलकूप विभागों के अभियंताओं ने भी बिना बजट कोई भी कार्य करा पाने में हाथ खड़े कर दिए। बैठक में केंद्रीय जल आयोग के एसडीओ एके राय, जल निगम 16वीं शाखा अभिशासी अभियंता एके सिंह और लघु डाल नहर एक्सईएन एके मल्होत्रा, केन केनाल एक्सईएन ओपी मौर्या सहित कई अन्य अभियंता उपस्थित रहे।
केंद्रीय दल यहां के बाद खजुराहो के लिए रवाना हो गया। वहां बुंदेलखंड मेें शामिल पन्ना, छतरपुर और सतना जनपदों के अफसरों के साथ बैठक करेंगे। मुख्य अभियंता गोयल ने बताया कि दिल्ली जाकर वे अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेंगे।
केंद्रीय जल आयोग की टीम ने बुंदेलखंड में साल दर साल कम हो रही बारिश और तेजी से नीचे खिसक रहे भूजल स्तर पर चिंता जताई। बांधों में पानी के डेड स्टोर के हालात पर भी चर्चा की।
जल आयोग के स्थानीय अधिकारियों ने केंद्रीय दल को वर्ष 2010 से 2015 तक बारिश के आंकड़े सौंपे। वर्ष 2013 को छोड़कर हर वर्ष औसत बारिश कम रही।
आंकड़ों के मुताबिक यहां की औसत सालाना बारिश 1250 मिलीमीटर है, लेकिन इतनी बारिश नहीं हो रही। वर्ष 2010 में 723.4, 2011 में 1070.1, 2012 में 873.8, 2013 में 1790.4, 2014 में 744 और वर्ष 2015 में मात्र 614.4 मिमी बारिश हुई है।