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तीन की मौत की सूचना से बंद हो गई शहनाई
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The shehnai stopped due to the information of the death of three
- फोटो : BANDA
बांदा। शादी की शहनाई गूंज रही थी। जयमाल आदि की रस्मों की तैयारी थी। इसी बीच दूल्हा दयाशाह के तीन चचेरे भाइयों की मौत की सूचना से शहनाई थम गई। बरात में शोक छा गया। बाजे-गाजे बंद हो गए। नजदीकी रिश्तेदारों की आंखों से आंसू निकल पड़े।
देर तक यह माहौल रहने के बाद अंतत: सादगी से शादी की रस्में पूरी की गईं। जो मेहमान बरात में आए थे अगले दिन घर के युवकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए। कमल के पिता बिंदादीन समेत अन्य परिजनों ने बताया कि गुरुवार को विदाई भी शोकाकुल माहौल में हुई। तीनों मृतकों का मुक्तिधाम में एक साथ अंतिम संस्कार किया।
फोटो-12बीएनडीपी-11 : हादसे के बाद घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़। संवाद
तीन घरों के बुझे चिराग, चल बसे कमाऊपूत
बांदा। बाइक हादसे में अजय वर्मा की मौत परिवार पर कहर बनकर टूटी है। अजय की मौत के बाद अब घर में एक भाई सचिन है। बड़े भाई दीपक की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पिता छोटेलाल का दायां हाथ ट्रेन हादसे में कट चुका है। घर का खर्च चलाने में अजय मददगार था।
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दूसरा मृतक प्रमोद दो भाइयों में बड़ा और प्रवासी मजदूर था। वह दिल्ली में पेंटिंग करता था। चचेरे भाई सोनू की शादी में शामिल होने 18 अप्रैल को आया था। परिजनों ने बताया कि प्रमोद की अगले वर्ष फरवरी में बांदा शहर में शादी तय हो चुकी थी। पिता पेशे से प्लंबर हैं और मां सियाप्यारी खेतिहर मजदूरी करती हैं।
हादसे में जान गंवाने वाला तीसरा कमल तीन भाइयों में बड़ा था। बालू ढोने की मजदूरी के साथ खेतीबाड़ी भी करता था। वह अपने पीछे पत्नी सोना, मां दुखिया और तीन बच्चों को छोड़ गया है।
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देर तक यह माहौल रहने के बाद अंतत: सादगी से शादी की रस्में पूरी की गईं। जो मेहमान बरात में आए थे अगले दिन घर के युवकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए। कमल के पिता बिंदादीन समेत अन्य परिजनों ने बताया कि गुरुवार को विदाई भी शोकाकुल माहौल में हुई। तीनों मृतकों का मुक्तिधाम में एक साथ अंतिम संस्कार किया।
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फोटो-12बीएनडीपी-11 : हादसे के बाद घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़। संवाद
तीन घरों के बुझे चिराग, चल बसे कमाऊपूत
बांदा। बाइक हादसे में अजय वर्मा की मौत परिवार पर कहर बनकर टूटी है। अजय की मौत के बाद अब घर में एक भाई सचिन है। बड़े भाई दीपक की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पिता छोटेलाल का दायां हाथ ट्रेन हादसे में कट चुका है। घर का खर्च चलाने में अजय मददगार था।
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दूसरा मृतक प्रमोद दो भाइयों में बड़ा और प्रवासी मजदूर था। वह दिल्ली में पेंटिंग करता था। चचेरे भाई सोनू की शादी में शामिल होने 18 अप्रैल को आया था। परिजनों ने बताया कि प्रमोद की अगले वर्ष फरवरी में बांदा शहर में शादी तय हो चुकी थी। पिता पेशे से प्लंबर हैं और मां सियाप्यारी खेतिहर मजदूरी करती हैं।
हादसे में जान गंवाने वाला तीसरा कमल तीन भाइयों में बड़ा था। बालू ढोने की मजदूरी के साथ खेतीबाड़ी भी करता था। वह अपने पीछे पत्नी सोना, मां दुखिया और तीन बच्चों को छोड़ गया है।