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डॉक्टरों के कमीशन में लुट रहे गरीब

Tue, 05 Feb 2019 11:47 PM IST
ASIF ASIF अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Published by: ASIF ASIF Updated Tue, 05 Feb 2019 11:47 PM IST
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The poor are being robbed in the commission of doctors
जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला

जीवनरक्षक दवाओं को आम मरीजों तक पहुंचाने के लिए मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में चालू किए गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र कमीशनबाजी के शिकार हो गए। डाक्टरों द्वारा बाहरी दवाएं लिखने का पुराना ढर्रा बदस्तूर जारी है। केंद्रों में उपलब्ध दवाएं लिखने से डाक्टर परहेज कर रहे हैं। नतीजतन मरीजों को 60 से 70 फीसदी तक अधिक कीमतें चुकाकर बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। यह हकीकत औषधि केंद्र के प्रभारी ने डीएम को भेजे पत्र में खुद बयां की है।  

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करीब 6 माह पूर्व मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र खोले गए थे। सरकार की मंशा थी कि मरीजों को यहां सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 1500 नए-पुराने मरीज आते हैं। इनके पर्चों पर ज्यादातर डाक्टर जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाओं के स्थान पर बाजार में बिकने वाली दवाएं लिख रहे हैं, जबकि केंद्रों के प्रभारियों का कहना है कि जन औषधि केंद्र में हर प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद भी मरीजों को बाजार की दवाएं लिखे जाने का साफ मतलब है कमीशनबाजी। डाक्टरों के इस रवैये से जन औषधि केंद्रों में रोजाना बमुश्किल दो से तीन हजार रुपये की दवाएं ही बिक रही हैं। 
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डाक्टरों का बाजारू दवाओं के प्रति प्रेम और औषधि केंद्र की अनदेखी की पोल जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र प्रभारी रामलखन सिंह के पत्र से खुली है। डीएम को भेजे पत्र में प्रभारी ने कहा है कि जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में संचालित केंद्रों में उच्च गुणवत्ता की जेनेरिक दवाएं न्यूनतम दरों पर उपलब्ध हैं, लेकिन डाक्टरों का इसमें अपेक्षित सहयोग न मिलने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। पत्र पर डीएम ने मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल के अधीक्षकों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 
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जिला अस्पताल के सभी डाक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखने के लिए निर्देशित किया गया है। पहली प्राथमिकता मरीज को अस्पताल की मुफ्त दवा देने की है। यहां उपलब्ध न होने के बाद जेनेरिक केंद्र की दवाएं लिखी जाती हैं। अनदेखी नहीं की जा रही है। यह भी बताया कि सरकारी दवाओं की आपूर्ति अब कार्पोरेशन से होती है। अस्पताल में पर्याप्त दवा और इंजेक्शन उपलब्ध हैं।-डॉ. किशोरीलाल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बांदा। 

इनसेट  
80 फीसदी तक सस्ती हैं जेनेरिक दवाएं 
बांदा। जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाएं बाजार से लगभग 60 से 80 फीसदी तक सस्ती हैं। टायफाइड में इस्तेमाल एंटीबॉयटिक सिफिलेक्सिम ओफलॉक्सासिन (10 गोली) जन औषधि केंद्र में 36 रुपये और बाजार में 200 रुपये की है। टरबूटालिन-2 कफ सिरप केंद्र में अधिकतम 42 रुपये का है। बाजार में यह 80 से 100 रुपये में मिलता है। इंजेक्शन पिपरासिलीन-4.5 यहां 110 रुपये में और बाजार में 460 रुपये में मिलता है। 


जेलों में भी जेनेरिक दवाओं से होगा इलाज 
बांदा। जेलों के अस्पतालों में भी जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल होगा। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं महानिरीक्षक/अपर पुलिस महानिदेशक चंद्रप्रकाश ने जारी पत्र में कहा है कि केंद्रों में उपलब्ध दवाएं ब्रांडेड से काफी कम मूल्य की हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि जेलों के लिए जेनेरिक दवाओं के स्टोर से ही खरीददारी की जाए। केंद्र में दवा उपलब्ध न होने पर मेडिकल स्टोर से प्रमाणपत्र प्राप्त कर दवाओं की खरीद की जाए।

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