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Banda News: पन्ना टाइगर रिजर्व में घट गई गिद्धों की संख्या, एक साल में 39 कम मिले

Sun, 23 Feb 2025 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2025 11:54 PM IST
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The number of vultures decreased in Panna Tiger Reserve, 39 fewer found in a year
टाइगर रिजर्व में शिशु गिद्ध को पालती मादा। - फोटो : संवाद
करतल (बांदा)। देश में तेजी से विलुप्त हो रहे गिद्धों की संख्या जनपद की सीमा से सटे पन्ना टाइगर रिजर्व में भी घट गई है। एक साल बाद फरवरी माह में कराई गई गणना में 39 गिद्ध कम पाए गए हैं। पिछले साल की गणना में 730 गिद्ध पाए गए थे। वहीं, इस साल की गणना में 691 गिद्ध मिले हैं।
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पन्ना टाइगर रिजर्व का दुधवा सेहा गिद्धों का स्वर्ग कहा जाता है। ठंड के दिनों में गहरे सेहा की चट्टानों पर बड़ी संख्या में गिद्ध धूप सेंकते नजर आते हैं। इनमें प्रवासी गिद्धों की संख्या काफी होती है। पक्षी प्रेमी पर्यटकों के मुताबिक सेहा के आसपास आसमान में हर समय गिद्ध उड़ते रहते हैं। गिद्धों की घटती संख्या से पक्षी प्रेमी चिंतित हैं।
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टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अंजना सुचिता तिर्की ने बताया कि प्रदेशव्यापी गणना-2025 के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में 17 से 19 फरवरी तक गिद्धों की गिनती की गई। पहले दिन 661, दूसरे दिन 691 और अंतिम दिन 686 गिद्धों की मौजूदगी पाई गई। पिछले वर्ष 18 फरवरी-2024 में गणना कराई गई थी। तब 730 गिद्ध पाए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक इस साल 39 गिद्ध घटे हैं।
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मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली गिद्धों की चार प्रजातियां किंग वल्चर, लॉंग बिल्ड वल्चर, व्हाइट बैक वल्चर तथा इजिप्शियन वल्चर यहां बड़ी संख्या में निवास करते हैं। ठंड का मौसम आने पर गिद्धों की तीन प्रजातियों प्रवास के लिए आती हैं। प्रवासी हिमालय वल्चर पूरी ठंड यहां रहते हैं और घोंसला बनाकर बच्चे पैदा करते हैं। ठंड खत्म होते ही वह वापस हिमालय चले जाते हैं।


आसमान में ऊंची उड़ान भरने वाले गिद्धों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। प्रकृति के सबसे बेहतरीन इन सफाई कर्मियों की जहां भी मौजूदगी होती है, वहां का परिस्थिति तंत्र स्वच्छ और स्वस्थ रहता है, लेकिन प्रकृति और मानवता की सेवा में जुटे रहने वाले इन पक्षियों का वजूद मानवीय गलतियों के कारण संकट में है। गिद्धों के सहवास स्थलों के उजड़ने तथा मवेशियों के लिए दर्द निवारक दवा का उपयोग करने से गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही है।
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