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तोहफे देकर साधु संतों को किया विदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 17 Dec 2015 11:27 PM IST
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बबेरू। अंतिम दिन श्रद्धालुओं के उमड़े हुजूम के बीच
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भंडारा और साधु-संतों को तोहफे देकर विदाई के साथ तीन दिवसीय सिमौनीधाम
मेला गुरुवार को खत्म हो गया।
भीड़ को काबू करने में सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह से देर रात तक भंडारे में महिला-पुरुष और बच्चों की पंगत लगी रहीं।
सुबह पहली पंगत में साधू-संतों को भोजन कराया गया। अवधूत महाराज ने सभी संतों को एक-एक कंबल, दो रामनामी पीतांबरी और थाली, कटोरी, गिलास आदि भेंटकर विदा किया।
देर रात तक भंडारा चलता रहा। पांच पंडालों में महिला व पांच पंडालों में पुरुष श्रद्धालुओं की पंगते लगीं। आगरा से आए रसोइयों ने भोजन की व्यवस्था संभाली।
ब्रजमोहन सिंह लाला (कुचेंदू), बच्चा सिंह (काजीटोला), सुकदेव सिंह लवकुश महाविद्यालय प्रबंधक चंद्रपाल कुशवाहा और देवरथा गांव की टीम ने अलग-अलग पंडालों में भोजन व्यवस्था संभाली।
श्रमदानियों में डा. राजकरन अवस्थी, मनोज सिंह, रामबाबू, राजू, कमल यादव, पप्पू (इंगोहटा) समेत स्काउट-गाइड छात्र-छात्राओं ने दिन-रात सेवाभाव से काम किया।
सिमौनीधाम मेला में भंडारा छकने के साथ क्षेत्रीय लोगों ने जमकर खरीददारी की। चूड़ी-बिंदी की दुकानों में महिलाओं की ज्यादा भीड़ रही। प्रदर्शनी और सरकारी स्टालों में ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं की जानकारी ली।
महिलाओं ने जहां चूड़ी, बिंदी और गृहस्थी का सामान खरीदा तो बच्चों ने खिलौनों की खरीददारी की। 50 स्टालों में देश के कोने-कोने से आए हस्तशिल्पियों की सामग्री भी खूब बिकी।
झूला झूलने के लिए दिनभर कतार लगी रही। उधर, तमाम सरकारी विभागों ने स्टाल लगाकर ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। बबेरू सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डा. पीएन यादव, डा. अनवर, डा. रामपाल, डा. शिल्पा गुप्ता व फार्मेसिस्ट संदीप गुप्ता आदि ने परीक्षण कर उपचार की सलाह दी।
भीड़ को काबू करने में सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह से देर रात तक भंडारे में महिला-पुरुष और बच्चों की पंगत लगी रहीं।
सुबह पहली पंगत में साधू-संतों को भोजन कराया गया। अवधूत महाराज ने सभी संतों को एक-एक कंबल, दो रामनामी पीतांबरी और थाली, कटोरी, गिलास आदि भेंटकर विदा किया।
देर रात तक भंडारा चलता रहा। पांच पंडालों में महिला व पांच पंडालों में पुरुष श्रद्धालुओं की पंगते लगीं। आगरा से आए रसोइयों ने भोजन की व्यवस्था संभाली।
ब्रजमोहन सिंह लाला (कुचेंदू), बच्चा सिंह (काजीटोला), सुकदेव सिंह लवकुश महाविद्यालय प्रबंधक चंद्रपाल कुशवाहा और देवरथा गांव की टीम ने अलग-अलग पंडालों में भोजन व्यवस्था संभाली।
श्रमदानियों में डा. राजकरन अवस्थी, मनोज सिंह, रामबाबू, राजू, कमल यादव, पप्पू (इंगोहटा) समेत स्काउट-गाइड छात्र-छात्राओं ने दिन-रात सेवाभाव से काम किया।
सिमौनीधाम मेला में भंडारा छकने के साथ क्षेत्रीय लोगों ने जमकर खरीददारी की। चूड़ी-बिंदी की दुकानों में महिलाओं की ज्यादा भीड़ रही। प्रदर्शनी और सरकारी स्टालों में ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं की जानकारी ली।
महिलाओं ने जहां चूड़ी, बिंदी और गृहस्थी का सामान खरीदा तो बच्चों ने खिलौनों की खरीददारी की। 50 स्टालों में देश के कोने-कोने से आए हस्तशिल्पियों की सामग्री भी खूब बिकी।
झूला झूलने के लिए दिनभर कतार लगी रही। उधर, तमाम सरकारी विभागों ने स्टाल लगाकर ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। बबेरू सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डा. पीएन यादव, डा. अनवर, डा. रामपाल, डा. शिल्पा गुप्ता व फार्मेसिस्ट संदीप गुप्ता आदि ने परीक्षण कर उपचार की सलाह दी।