{"_id":"5f3977148ebc3eaad348bbbf","slug":"the-fate-of-the-farmers-of-bundelkhand-will-change-from-the-pond-in-the-fields-banda-news-knp5771110130","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतों में तालाब से बदलेगी बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतों में तालाब से बदलेगी बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर
विज्ञापन
The fate of the farmers of Bundelkhand will change from the pond in the fields
- फोटो : BANDA
बांदा। ‘इत सूखत जलस्रोत सब बूंद चली पाताल, पानी मोलै आबरू उठो बुंदेली लाल’। बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान और खेत-तालाब योजना के विशेषज्ञ पुष्पेंद्र भाई ने इन्हीं बुंदेली दोहों के साथ ‘अमर उजाला’ के फेसबुक लाइव पर बुंदेलखंड के किसानों को खेतों में तालाब खुदवाकर बारिश का पानी संचय करने के टिप्स दिए।
कहा कि हर वर्ष करोड़ों लीटर बारिश का पानी खेतों से गुजरकर नदी-नालों में चला जाता है। खेतों में तालाब खोदकर इसे संचित कर लिया जाए तो बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदल सकती है। उनके अच्छे दिन आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खेतों में तालाब से आसपास का भूजल स्तर भी सुधरेगा। ट्यूबवेल, कुएं और तालाबों में जलस्तर बढ़ेगा। तमाम किसानों ने फेसबुक लाइव पर उनसे सवाल किए और जानकारियां लीं।
विज्ञापन
प्रश्न- दो बीघा खेत है। आसपास नहर भी नहीं है। खेत में तालाब खुदवाना है। इसे भरा कैसे जाएगा? -कुलदीप (पतवन, बांदा)
उत्तर- दो बीघा के खेत में 4 बिस्वा में तालाब खुदवाया जा सकता है। यह खेत को नमी और सिंचाई के लिए काफी होगा। इसमें ज्यादा लागत भी नहीं आएगी, लेकिन डिजाइन और निर्माण ठीक हो।
प्रश्न- शहरी क्षेत्र की जमीन में तालाब खुदवाना है। इसमें सरकारी अनुदान मिलेगा या नहीं? -जिरगाम (हमीरपुर)
उत्तर- शहर में भी अगर जमीन है तो खेत-तालाब योजना के तहत अनुदान मिलेगा। प्रक्रिया और औपचारिकता पूरी करनी होगी। तालाब का आकार आधार पर निर्धारित है।
प्रश्न- खेतों में तालाब बनाकर फसल अच्छी तो पैदा कर ली जाए, लेकिन अन्ना मवेशियों का क्या किया जाए? ये तो सारी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।- रामजी भाई (दलपा पुरवा, बांदा)
उत्तर- अन्ना मवेशियों को भी अगर पशुधन के नजरिए से देखा जाए तो बुंदेलखंड से यह समस्या खत्म हो सकती है। हर किसान को कम से कम तीन मवेशी रखना चाहिए। इनके गोबर, दूध आदि से इनका खर्च और किसान की आमदनी हो सकती है। छोटी जगह पर भी योजना बनाकर अन्ना पशुओं को पशुधन के रूप में पाला जा सकता है।
प्रश्न- धान के खेत की मेड़ में अरहर या मूंग की फसल तैयार की जा सकती है या नहीं? इसके लिए क्या सावधानी/उपाय अपनाना होंगे?- बालेंद्र तिवारी (पुनाहुर, बांदा)
उत्तर- खेत की मेड़ की चौड़ाई पर्याप्त होनी चाहिए। मूंग और अरहर एक साथ मिश्रित न रहे। दोनों में कुछ दूरी रहे। मेड़ की मिट्टी पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। खेत में तालाब होगा तो मेड़ में नमी रहेगी।
प्रश्न-खेत में तालाब से कितनी भूमि को सिंचाई की जा सकती है? कितनी नमी रहती है?- रज्जाक (हथौरा, बांदा)
उत्तर- लघु आकार के तालाब (22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा, 3 मीटर गहरा) में एक एकड़ जमीन को तीन बार सींचा जा सकता है। इस पर 52,500 रुपये अनुदान है।
इन लोगों ने भी पूछे सवाल
इनके अलावा ब्रह्मदत्त शुक्ला (अतर्रा), राजेश द्विवेदी (गुमाई), प्रवीण निगम (लुकतरा), शकील सिद्दीकी (बांदा), सुरेश रैकवार (बदौसा), संतोष सोनी (बांदा), नयन सिंह (बांदा), मजहर (बांदा) आदि ने भी सवाल पूछकर जानकारी ली।
विज्ञापन
कहा कि हर वर्ष करोड़ों लीटर बारिश का पानी खेतों से गुजरकर नदी-नालों में चला जाता है। खेतों में तालाब खोदकर इसे संचित कर लिया जाए तो बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदल सकती है। उनके अच्छे दिन आ सकते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि खेतों में तालाब से आसपास का भूजल स्तर भी सुधरेगा। ट्यूबवेल, कुएं और तालाबों में जलस्तर बढ़ेगा। तमाम किसानों ने फेसबुक लाइव पर उनसे सवाल किए और जानकारियां लीं।
विज्ञापन
प्रश्न- दो बीघा खेत है। आसपास नहर भी नहीं है। खेत में तालाब खुदवाना है। इसे भरा कैसे जाएगा? -कुलदीप (पतवन, बांदा)
उत्तर- दो बीघा के खेत में 4 बिस्वा में तालाब खुदवाया जा सकता है। यह खेत को नमी और सिंचाई के लिए काफी होगा। इसमें ज्यादा लागत भी नहीं आएगी, लेकिन डिजाइन और निर्माण ठीक हो।
प्रश्न- शहरी क्षेत्र की जमीन में तालाब खुदवाना है। इसमें सरकारी अनुदान मिलेगा या नहीं? -जिरगाम (हमीरपुर)
उत्तर- शहर में भी अगर जमीन है तो खेत-तालाब योजना के तहत अनुदान मिलेगा। प्रक्रिया और औपचारिकता पूरी करनी होगी। तालाब का आकार आधार पर निर्धारित है।
प्रश्न- खेतों में तालाब बनाकर फसल अच्छी तो पैदा कर ली जाए, लेकिन अन्ना मवेशियों का क्या किया जाए? ये तो सारी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।- रामजी भाई (दलपा पुरवा, बांदा)
उत्तर- अन्ना मवेशियों को भी अगर पशुधन के नजरिए से देखा जाए तो बुंदेलखंड से यह समस्या खत्म हो सकती है। हर किसान को कम से कम तीन मवेशी रखना चाहिए। इनके गोबर, दूध आदि से इनका खर्च और किसान की आमदनी हो सकती है। छोटी जगह पर भी योजना बनाकर अन्ना पशुओं को पशुधन के रूप में पाला जा सकता है।
प्रश्न- धान के खेत की मेड़ में अरहर या मूंग की फसल तैयार की जा सकती है या नहीं? इसके लिए क्या सावधानी/उपाय अपनाना होंगे?- बालेंद्र तिवारी (पुनाहुर, बांदा)
उत्तर- खेत की मेड़ की चौड़ाई पर्याप्त होनी चाहिए। मूंग और अरहर एक साथ मिश्रित न रहे। दोनों में कुछ दूरी रहे। मेड़ की मिट्टी पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। खेत में तालाब होगा तो मेड़ में नमी रहेगी।
प्रश्न-खेत में तालाब से कितनी भूमि को सिंचाई की जा सकती है? कितनी नमी रहती है?- रज्जाक (हथौरा, बांदा)
उत्तर- लघु आकार के तालाब (22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा, 3 मीटर गहरा) में एक एकड़ जमीन को तीन बार सींचा जा सकता है। इस पर 52,500 रुपये अनुदान है।
इन लोगों ने भी पूछे सवाल
इनके अलावा ब्रह्मदत्त शुक्ला (अतर्रा), राजेश द्विवेदी (गुमाई), प्रवीण निगम (लुकतरा), शकील सिद्दीकी (बांदा), सुरेश रैकवार (बदौसा), संतोष सोनी (बांदा), नयन सिंह (बांदा), मजहर (बांदा) आदि ने भी सवाल पूछकर जानकारी ली।