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हीरे की चाह ने बना दिया ‘राजा से रंक’

Thu, 02 Sep 2021 11:20 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 11:20 PM IST
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The desire for a diamond made him a 'rank from a king'
बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को हीरा खदान में बदलने की तैयारी है। दूसरी तरफ बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश स्थित एशिया की मशहूर हीरा खदान पन्ना का स्याह सच कुछ और है।
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सरकार के लिए यह भारी भरकम राजस्व देने का जरिया है, लेकिन न जाने कितने लोग हीरा की तमन्ना में राजा से रंक बन गए। इनसे भी ज्यादा खराब हालत हीरा खदानों के उन मजदूरों की है, जो रात दिन कीचड़ और पानी में खुद को सराबोर करके हीरा तलाशते हैं।
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हीरा मिल जाने पर खुदाई कराने वाले की किस्मत तो चमक जाती है, लेकिन इन मजदूरों की जिंदगियों में कोई उजाला फिर भी नहीं आता है। कीमती हीरों के लिए न सिर्फ देश, बल्कि पूरी दुनिया में मध्यप्रदेश की पन्ना खदान मशहूर है।
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सदियों से यहां हीरे निकाले जा रहे हैं। न जाने कितने लोगों की किस्मत हर साल खदान में मिले हीरे से चमक उठती है, लेकिन यह तथ्य कम दिलचस्प नहीं कि चमकते हीरों की नगरी पन्ना बहुत पिछड़ा है।
जानकर बताते हैं कि लगभग तीन सदियों से यहां हीरा खनन हो रहा है। ऐसे में इस हीरे की धरती को विकास और समृद्धि से लकदक होना चाहिए, लेकिन यहां इसके उलट है। गरीबी, बेरोजगारी का आलम है। बड़ी तादाद में आबाद आदिवासी बेहाल हैं।
इन्हीं सब हालात को देखते हुए लोग बकस्वाहा के हरे-भरे जंगल को हीरा खदान में बदलने का विरोध कर रहे हैं। बकस्वाहा के लिए सरकार की दलीलें पन्ना से सबक ले चुके लोगों के गले नहीं उतर रहीं।
सालों किया खनन, नहीं हुआ हीरा दर्शन
पन्ना की हीरा खदानों में दिहाड़ी मजदूरी पर खनन और हीरे की खोज करने वाले मजदूरों पर नजर डालें, तो इनकी बदहाली सिर चढ़कर बोलेगी। 60 वर्षीय बब्बू गोड़ बताते हैं कि उन्होंने कई सालों तक खुदाई कराई पर हीरा देखने तक को नहीं मिला।
बब्बू गोड़ पन्ना से आठ किलोमीटर दूर कल्याणपुर के रहने वाले आदिवासी हैं। गांव के पास ही बजरिया हीरा खदान है। यहां बड़ी तादाद में लोग हीरे की तलाश में खुदाई कराते हैं, लेकिन कल्याणपुर का कोई कल्याण नहीं अभी तक नहीं हो पाया है। महिलाएं जंगल से लकड़ी लाकर शहर में बेचतीं हैं, उसी से चूल्हा जलता है।
हीरे की तमन्ना में झोपड़ी में बसर
हीरों की तलाश में दूरदराज से आने वाले यहां खदान के जंगली इलाके में पॉलिथीन और घास-फूस की झुग्गी झोपड़ी बनाकर रहते हैं।
आसपास वन क्षेत्र भी है। ऐसी ही एक झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लगभग 37 वर्षीय छतरपुर जिले के चंदला निवासी हलके विश्वकर्मा ने बताया कि ऊपर वाला चाहेगा तभी हीरा मिलेगा। इसके काफी अरसे पहले वह खिन्नी घाट खदान में खनन कर चुका है, लेकिन कुछ नहीं मिला था।
चार एकड़ जमीन बेची, 10 लाख कर्ज लिया
हीरा खनन क्षेत्र का जायजा और हीरे के लिए हाड़तोड़ मेहनत मजदूरी करने वालों की हकीकत जानने आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर दीक्षित (बांदा) अपनी टीम के साथ पहुंचे।
जनकपुर गांव के खेलाई साहू ने उन्हें बताया कि वह अपने जीवन में 50 साल तक हीरे की खोज में खदानें लगाते रहे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। लालच में चार एकड़ खेती की जमीन भी बिक गई। सिर्फ हीरे के तीन कण मिले थे, जो 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक में बिके थे, लेकिन लालच बुरी बला।
खेलाई साहू हीरों के खेल से बाज नहीं आए। उनके ऊपर 10 लाख रुपये का कर्ज हो गया। इसे अदा करने के लिए मुख्य सड़क की अपनी पैतृक जमीन 16 लाख रुपये में बेच डाली। अब खेलाई साहू वृद्धावस्था में पत्नी के साथ पेंशन के सहारे जी रहे हैं।
एशिया में अव्वल है पन्ना हीरा खदान
पन्ना में मझगवां हीरा खदान एशिया में नंबर एक है। इसे कई वर्षों से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) चला रहा है। हालांकि, पन्ना टाइगर रिजर्व प्रशासन की आपत्ति पर जनवरी माह में यहां खनन रोक दिया गया था।
अब एमपी शासन ने फिर अनुमति दे दी है। एनएमडीसी की वेबसाइट के मुताबिक, मझगवां खदान की सालाना क्षमता 84 हजार कैरेट हीरे की है। यहां से अब तक 10,05,064 कैरेट से ज्यादा हीरा निकाला जा सका है। यहां प्रति 100 टन मिट्टी में 10 कैरेट हीरा निकलता है।
बर्बाद हुए ज्यादा, गिने चुने को फायदा
हीरा खदान में यहां ज्यादातर लोगों को नाकामी और घाटे का सामना करना पड़ता है, वहीं कुछ मजदूरों की किस्मत हीरे से चमकी भी है। कुछ दिन पूर्व यहां एक मजदूर और उसकी टीम को खदान में 14.09 कैरेट का हीरा मिला था।
इससे पहले एक मजदूर और उसकी टीम को 7.94 और 1.93 कैरेट के हीरे मिले थे। और भी कई लोगों को हीरे मिले हैं।
200 रुपये में मिलती है आठ वर्ग मीटर खदान
हीरा खदान लेने के लिए पन्ना स्थित जिला हीरा कार्यालय में 200 रुपये चालान से जमा होते हैं। आठ मीटर लंबी और आठ मीटर चौड़ी खदान का पट्टा मिलता है। हीरा निकलने पर नियमानुसार उसे हीरा कार्यालय में जमा किया जाता है।

इन हीरों की खुली नीलामी होती है। बिकने पर खनिज राजस्व काटकर शेष पैसा हीरा खुदाने वाले संबंधित व्यक्ति को दिया जाता है।
चोरी छिपे भी हीरों का कारोबार
पन्ना की रत्नगर्भा धरती में हीरों का काला कारोबार भी होता है। राजस्व और टैक्स चोरी के चक्कर में तमाम हीरे चोरी छिपे बेच दिए जाते हैं। इस पर रोक लगा पाने में हीरा कार्यालय नाकाम है। स्टाफ भी कम बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में अवैध खदानें चल रहीं हैं।
- आशीष सागर दीक्षित, आरटीआई एक्टिविस्ट बांदा।
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