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देश संगठन में भी बुंदेलखंड को ठेंगा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 19 Jan 2015 11:19 PM IST
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प्रदेश सरकार में बुंदेलखंड को प्रतिनिधित्व न देने
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के बाद अब सपा ने अपने प्रदेश संगठन में भी बुंदेलखंड को झटका दिया है।
विधानसभा चुनाव में 10 लाख वोटों के साथ पांच विधानसभा सीटों पर मिली जीत
के बाद भी सपा की नजरों में बुंदेलखंडी सपाई खरे नहीं उतर रहे।
नई प्रदेश समिति में 22 सचिवों की लंबी जमात में बुंदेलखंड को स्थान नहीं मिला। समूचे बुंदेलखंड से मात्र चार नेताओं को कार्य समिति का सदस्य बनाया गया है। महोबा जिले का पूरी तरह सफाया है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की 21 सीटों मेें 5 पर सपा को जीत मिली। छह सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। पूरे बुंदेलखंड में सपा को 9 लाख 77 हजार 605 वोट प्राप्त हुए लेकिन प्रदेश मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड को स्थान नहीं दिया।
यहां तक कि कोई राज्यमंत्री भी नहीं बनाया गया। मंत्रिमंडल का तीन बार विस्तार हो चुका है। तीनों बार बुंदेलखंड को मायूसी मिली है। बुंदेलखंड में कई सपा के पुराने दिग्गज और वफादार नेता हैं लेकिन वे भी हाशिये पर हैं। विधायकों या इन नेताओं को लाल बत्ती नहीं मिली।
अब सपा की नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी में भी बुंदेलखंड को ठेंगा दिखाया गया है। लोकसभा चुनाव के पूर्व जहां प्रदेश समिति में दर्जन भर से ज्यादा बुंदेली नेता मुकाम पा गए थे, वहीं अबकी सब हाशिए पर आ गए हैं। 74 सदस्यीय कार्यकारिणी में किसी भी बुंदेलखंडी को पदाधिकारी नहीं बनाया गया।
22 सचिवों की लंबी जमात में भी बुंदेलखंड का पत्ता साफ है। कार्यसमिति में बुंदेलखंड के सात जिलों में मात्र चार जिलों से एक-एक सदस्य शामिल किए गए हैं। महोबा, ललितपुर और उरई आदि जनपदों में किसी को स्थान नहीं मिला।
सदस्यों में बांदा से अच्छेलाल निषाद, चित्रकूट से निर्भय पटेल, हमीरपुर से अंब्रेश कुमारी जाटव और झांसी से दीपमाला कुशवाहा सदस्य बनाई गई हैं। महोबा जनपद को भी नजरअंदाज कर दिया गया है। उपेक्षा से बुुंदेली सपा नेता अंदरूनी तौर पर दुखी हैं लेकिन अनुशासन की तलवार के आगे खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे।
सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के विवेक पर निर्भर करता है कि वे सरकार या संगठन में किससे काम लेना चाहते हैं?
नई प्रदेश समिति में 22 सचिवों की लंबी जमात में बुंदेलखंड को स्थान नहीं मिला। समूचे बुंदेलखंड से मात्र चार नेताओं को कार्य समिति का सदस्य बनाया गया है। महोबा जिले का पूरी तरह सफाया है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की 21 सीटों मेें 5 पर सपा को जीत मिली। छह सीटों पर दूसरे स्थान पर रही। पूरे बुंदेलखंड में सपा को 9 लाख 77 हजार 605 वोट प्राप्त हुए लेकिन प्रदेश मंत्रिमंडल में बुंदेलखंड को स्थान नहीं दिया।
यहां तक कि कोई राज्यमंत्री भी नहीं बनाया गया। मंत्रिमंडल का तीन बार विस्तार हो चुका है। तीनों बार बुंदेलखंड को मायूसी मिली है। बुंदेलखंड में कई सपा के पुराने दिग्गज और वफादार नेता हैं लेकिन वे भी हाशिये पर हैं। विधायकों या इन नेताओं को लाल बत्ती नहीं मिली।
अब सपा की नवगठित प्रदेश कार्यकारिणी में भी बुंदेलखंड को ठेंगा दिखाया गया है। लोकसभा चुनाव के पूर्व जहां प्रदेश समिति में दर्जन भर से ज्यादा बुंदेली नेता मुकाम पा गए थे, वहीं अबकी सब हाशिए पर आ गए हैं। 74 सदस्यीय कार्यकारिणी में किसी भी बुंदेलखंडी को पदाधिकारी नहीं बनाया गया।
22 सचिवों की लंबी जमात में भी बुंदेलखंड का पत्ता साफ है। कार्यसमिति में बुंदेलखंड के सात जिलों में मात्र चार जिलों से एक-एक सदस्य शामिल किए गए हैं। महोबा, ललितपुर और उरई आदि जनपदों में किसी को स्थान नहीं मिला।
सदस्यों में बांदा से अच्छेलाल निषाद, चित्रकूट से निर्भय पटेल, हमीरपुर से अंब्रेश कुमारी जाटव और झांसी से दीपमाला कुशवाहा सदस्य बनाई गई हैं। महोबा जनपद को भी नजरअंदाज कर दिया गया है। उपेक्षा से बुुंदेली सपा नेता अंदरूनी तौर पर दुखी हैं लेकिन अनुशासन की तलवार के आगे खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे।
सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के विवेक पर निर्भर करता है कि वे सरकार या संगठन में किससे काम लेना चाहते हैं?