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Banda News: डीएम के आदेश पर भारी डीएमएम और बीएमएम का रसूख

Wed, 07 Oct 2026 11:08 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:08 PM IST
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The clout of senior DMMs and BMMs prevails over the DM's orders.
बांदा। पुष्टाहार की गुणवत्ता, वितरण और उत्पादन व्यवस्था में मिली गंभीर कमियों पर जिलाधिकारी अमित आसेरी के आदेश के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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करीब एक माह पहले डीसी एनआरएलएम की ओर से भेजे गए स्पष्टीकरण से असंतुष्ट डीएम ने पत्र वापस भेजकर सभी कमियां सात दिन में दूर कराने के आदेश दिए थे। इसके अलावा दोषी ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम) व जिला मिशन मैनेजर (डीएमएम) के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के आदेश भी दिए थे। 31 अगस्त को जारी इस आदेश की समय सीमा बीतने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
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मामला पुष्टाहार के टेक होम राशन (टीएचआर) प्लांटों की जांच से जुड़ा है। डीएम के निर्देश पर पांच अगस्त को सदर, बबेरू और नरैनी के तीन प्लांटों का एसडीएम और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण किया था। जांच में तीनों प्लांटों में स्टॉक व वितरण रजिस्टर, लॉगबुक और शिकायत पंजिका उपलब्ध नहीं मिली।
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नीलकंठ प्लांट में 278 केंद्रों के सापेक्ष सिर्फ 50 केंद्रों को आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई। लक्ष्मी प्लांट में स्टॉक और श्रमिकों की संख्या में अंतर मिला और मौके पर केवल छह श्रमिक मिले। शक्ति प्लांट में पुष्टाहार के पैकेट निर्धारित वजन से कम पाए गए।
जांच में पुष्टाहार की गुणवत्ता से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल सामने आए थे। प्लांटों में गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशाला की व्यवस्था नहीं मिली। फोर्टिफिकेशन और पोषण मानकों के अनुपालन की स्थिति भी सवालों के घेरे में रही। काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एप्रन, दस्ताने, कैप और मास्क जैसी स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं में भी कमियां मिली थीं।
इन कमियों के बाद डीसी एनआरएलएम से स्पष्टीकरण मांगा गया था। करीब एक माह पहले डीसी एनआरएलएम ने दोषियों से जवाब लेकर डीएम को भेजा, हालांकि, डीएम इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उनके स्तर से भेजे गए पत्र में सभी बिंदुओं पर कमियां दूर करने के साथ ही जिम्मेदार बीएमएम और डीएमएम के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
डीएम ने 31 अगस्त के आदेश में इसके लिए सात दिन का समय निर्धारित किया था। इसके बावजूद कार्रवाई आगे बढ़ने के बजाय अब तक पत्रावली प्रस्तावित होने की बात कही जा रही है। अधिकारी जल्द कार्रवाई किए जाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन निर्धारित सात दिन की समय सीमा काफी पहले बीत चुकी है।
मामले में डीसी एनआरएलएम दिवाकर सिंह का कहना है कि पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी को भेजी गई है, लेकिन कार्रवाई कब तक होगी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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डीएम के आदेश का ऐसा हाल बना चर्चा का विषय
मामले में सवाल यह है कि जब जांच में इतनी कमियां सामने आईं और जिलाधिकारी ने खुद कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी थी तो जिम्मेदारों के विरुद्ध अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अधिकारियों की ओर से पत्रावली प्रस्तावित होने की बात कही जा रही है, लेकिन 31 अगस्त के आदेश में सात दिन में कार्रवाई के निर्देश थे।

पुष्टाहार जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद भी कार्रवाई लंबित रहने से विभागीय निगरानी और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। यदि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती तो शिकायतों और दूसरी जांचों के निस्तारण में बरती जाने वाली गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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