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Banda News: 84 घंटे बाद पूर्व मंत्री की पत्नी का पोस्टमार्टम
Wed, 07 Oct 2026 11:50 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:50 PM IST
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फाेटो-20- रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी हाउस में डटे शहर कोतवाल व पुलिस कर्मी। संवाद
बांदा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेंद्र पाल वर्मा की मां और पूर्व मंत्री सुरेंद्र पाल वर्मा की पत्नी कुसुमा देवी वर्मा की मौत के करीब 84 घंटे बाद बुधवार को पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी हुई।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में शाम पांच बजे के बाद डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम शुरू किया।
मामले में पुलिस ने कुसुमा देवी के पौत्र व वर्तमान प्रधान देवेंद्र पाल वर्मा की मोर्चरी में मौजूदगी की पुष्टि की। हालांकि वह मौके पर दिखाई नहीं दिए। पंचनामे में पहले नंबर पर देवेंद्र पाल वर्मा के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर अंकित किए गए हैं।
नरैनी के नंदवारा गांव में 30 सितंबर को भइयाराम के दो मासूम बेटों मनोज और युवराज की मौत के मामले में महेंद्र पाल वर्मा समेत नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद महेंद्र ने जन अधिकार पार्टी के संस्थापक और जौनपुर सांसद बाबू सिंह कुशवाहा व उनके भाई शिवशरण पर साजिश के तहत नामजद कराने का आरोप लगाया था।
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इसके बाद महेंद्र ने सांसद और उनके भाई समेत 13 लोगों पर घर पहुंचकर मां कुसुमा देवी से मारपीट करने और धमकी देने का आरोप लगाया था। चार अक्तूबर की सुबह बांदा के एक निजी अस्पताल में कुसुमा देवी की मौत हो गई। इसके बाद परिजन सभी पर एफआईआर दर्ज करने और शव को सीएम कार्यालय लखनऊ ले जाने की मांग पर अड़े रहे। सोमवार को इसको लेकर पुलिस और परिजन के बीच कई बार गहमा-गहमी हुई।
सोमवार रात करीब नौ बजे महेंद्र के पुत्र देवेंद्र पाल वर्मा ने पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस को लिखित सहमति दी। इसके बाद पुलिस शव को मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी ले आई। मंगलवार को पूरे दिन परिजनों का इंतजार किया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। पंचनामा नहीं होने के कारण पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका।
बुधवार को भी पुलिस पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पूरे दिन लगी रही। पुलिस के अनुसार नरैनी कोतवाल भास्कर मिश्रा देवेंद्र पाल को लखनऊ से लेकर आए और पंचनामा की कार्रवाई पूरी कराई। इसके बाद पोस्टमार्टम शुरू हो सका। हालांकि मोर्चरी में देवेंद्र पाल वर्मा दिखाई नहीं दिए। पंचनामा में उनके हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर दर्ज होने की पुलिस ने पुष्टि की है।
उधर, करीब 84 घंटे से शव मोर्चरी में रखे होने के कारण खराब होने लगा था। इससे पोस्टमार्टम की कार्रवाई में भी चिकित्सकों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
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रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में शाम पांच बजे के बाद डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम शुरू किया।
मामले में पुलिस ने कुसुमा देवी के पौत्र व वर्तमान प्रधान देवेंद्र पाल वर्मा की मोर्चरी में मौजूदगी की पुष्टि की। हालांकि वह मौके पर दिखाई नहीं दिए। पंचनामे में पहले नंबर पर देवेंद्र पाल वर्मा के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर अंकित किए गए हैं।
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नरैनी के नंदवारा गांव में 30 सितंबर को भइयाराम के दो मासूम बेटों मनोज और युवराज की मौत के मामले में महेंद्र पाल वर्मा समेत नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद महेंद्र ने जन अधिकार पार्टी के संस्थापक और जौनपुर सांसद बाबू सिंह कुशवाहा व उनके भाई शिवशरण पर साजिश के तहत नामजद कराने का आरोप लगाया था।
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इसके बाद महेंद्र ने सांसद और उनके भाई समेत 13 लोगों पर घर पहुंचकर मां कुसुमा देवी से मारपीट करने और धमकी देने का आरोप लगाया था। चार अक्तूबर की सुबह बांदा के एक निजी अस्पताल में कुसुमा देवी की मौत हो गई। इसके बाद परिजन सभी पर एफआईआर दर्ज करने और शव को सीएम कार्यालय लखनऊ ले जाने की मांग पर अड़े रहे। सोमवार को इसको लेकर पुलिस और परिजन के बीच कई बार गहमा-गहमी हुई।
सोमवार रात करीब नौ बजे महेंद्र के पुत्र देवेंद्र पाल वर्मा ने पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस को लिखित सहमति दी। इसके बाद पुलिस शव को मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी ले आई। मंगलवार को पूरे दिन परिजनों का इंतजार किया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। पंचनामा नहीं होने के कारण पोस्टमार्टम भी नहीं हो सका।
बुधवार को भी पुलिस पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए पूरे दिन लगी रही। पुलिस के अनुसार नरैनी कोतवाल भास्कर मिश्रा देवेंद्र पाल को लखनऊ से लेकर आए और पंचनामा की कार्रवाई पूरी कराई। इसके बाद पोस्टमार्टम शुरू हो सका। हालांकि मोर्चरी में देवेंद्र पाल वर्मा दिखाई नहीं दिए। पंचनामा में उनके हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर दर्ज होने की पुलिस ने पुष्टि की है।
उधर, करीब 84 घंटे से शव मोर्चरी में रखे होने के कारण खराब होने लगा था। इससे पोस्टमार्टम की कार्रवाई में भी चिकित्सकों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।