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Banda News: शहर में 16, गांवों को 10 घंटे ही मिल रही बिजली
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बांदा। भीषण गर्मी में बिजली की डिमांड बढ़कर 550 मेगावाट पहुंच गई है, जबकि आपूर्ति 350 मेगावाट ही हो रही है। इस कारण शहर से लेकर गांव तक बिजली कटौती हो रही है। आलम यह है शहरों में 16 और ग्रामीण क्षेत्रों को महज 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
शासन से शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 20 घंटे बिजली देने का प्रावधान किया गया है। जून में बढ़ती उमस भरी गर्मी में ये निर्देश दरकिनार हैं। लगातार बिजली आपूर्ति करने में कहीं ट्रांसफार्मर दगा दे रहे हैं तो कहीं केबल जलकर पिघल रहे हैं। जिले में सामान्य दिनों में 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है। उस समय बिजली विभाग निर्देशानुसार आपूर्ति करता है, लेकिन मई से यह व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। इस समय जिले में 550 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। यह कमी पूरा करने के लिए बिजली विभाग लगातार कटौती कर रहा है।
गर्मी में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह घर-घर एसी व कूलरों की संख्या बढ़ी है। सामान्य दिनों में जिले में 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है। गर्मी में इस समय यह 550 मेगावाट हो गई है। 50 प्रतिशत खपत बढ़ने से बिजली विभाग कटौती किसी तरह मैनेज कर रहा है। शहर व ग्रामीण इलाकों में इस समय लगातार कटौती की जा रही है। इससे लोग उमस भरी गर्मी में बेहाल हो रहे हैं।
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कटौती कर ओवरलोड ट्रांसफार्मर बचा रहा विभाग
ट्रांसफार्मर जलने या शार्ट सर्किट की समस्या न हो, इससे बचने के लिए बिजली विभाग इन दिनों मनमानी कटौती कर रहा है। इसके पीछे का प्रमुख कारण बजट मिलने के बाद भी समय से तैयारी न हो पाना है। गर्मी से बचाव के लिए लोग एसी, बड़े-बड़े कूलर, फ्रीज और डीप फ्रीजर आदि का प्रयोग कर रहे हैं। इससे बिजली खपत में भी लगातार इजाफा हो रहा है। पहले जहां घरों में एक-एक एसी चलता था, वहीं अब गर्मी बढ़ने के बाद दो से तीन और चार-चार एसी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे आम जनता या विद्युत उपभोक्ताओं की समस्या का तो निदान हुआ है, लेकिन बिजली विभाग की समस्या बढ़ गई है।
बिजली विभाग को शहर में नए वार्डों और अन्य हिस्से में ट्रांसफार्मर लगाने, उनकी क्षमता बढ़ाने तथा नए पोल व केबल गाने के लिए करीब 120 करोड़ रुपये मिले थे। यदि बिजली विभाग समय से कार्य पूरा करा लेता तो गर्मी में इतनी बड़ी समस्या नहीं आती। बजट मिलने के दो वर्ष बाद भी विभाग काम पूरा नहीं कर पाया। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
एसी, कूलर व फ्रिज के बढ़े दाम
बांदा। गर्मी बढ़ने के साथ ही बाजार में एसी, कूलर व फ्रिज के दाम बढ़ गए हैं। आम दिनों में जो एसी 30 से 35 हजार रुपये में मिल जाते थे, वही अब 40 हजार के आसपास हैं। ऐसी ही जो कूलर 10 हजार रुपये में मिल रहा था, वह 14 से 15 हजार रुपये में मिल रहा है। फ्रिज की बात करें तो इसमें भी चार से पांच हजार रुपये बढ़े हैं।
शहर में 24 व गांवों में 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा
शहर और गांवों में क्षमता वृद्धि न होने से ट्रांसफार्मर खूब फुंक रहे हैं। शहर में तो 24 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा किया जा रहा है। वहीं गांवों में फुंका ट्रांसफार्मर बदलने में 72 घंटे से भी ज्यादा का समय लग रहा है। अधिकारी खुद स्वीकार करते हैं कि क्षमता वृद्धि न होने से ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ रहा है और वह फुंक रहे हैं।
बिजली व्यवस्था पर एक नजर
बिजली उपभोक्ता -3.15 लाख
बिन कनेक्शन उपभोक्ता-पांच हजार
बड़े बकाएदार उपभोक्ता -18 हजार
उपकेंद्रों की संख्या -34
ट्रांसफार्मर-49 हजार
ट्राली ट्रांसफार्मर -178
वर्जन-
-गर्मी से बिजली की खपत बढ़ी है। इसी से ओवरलोडिंग की समस्या हो रही है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का काम कराया जा रहा है। जल्द ही समस्या से निजात मिलेगी। -नंदलाल, अधीक्षण अभियंता, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
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शासन से शहरी क्षेत्र में 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 20 घंटे बिजली देने का प्रावधान किया गया है। जून में बढ़ती उमस भरी गर्मी में ये निर्देश दरकिनार हैं। लगातार बिजली आपूर्ति करने में कहीं ट्रांसफार्मर दगा दे रहे हैं तो कहीं केबल जलकर पिघल रहे हैं। जिले में सामान्य दिनों में 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है। उस समय बिजली विभाग निर्देशानुसार आपूर्ति करता है, लेकिन मई से यह व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। इस समय जिले में 550 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। यह कमी पूरा करने के लिए बिजली विभाग लगातार कटौती कर रहा है।
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गर्मी में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह घर-घर एसी व कूलरों की संख्या बढ़ी है। सामान्य दिनों में जिले में 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है। गर्मी में इस समय यह 550 मेगावाट हो गई है। 50 प्रतिशत खपत बढ़ने से बिजली विभाग कटौती किसी तरह मैनेज कर रहा है। शहर व ग्रामीण इलाकों में इस समय लगातार कटौती की जा रही है। इससे लोग उमस भरी गर्मी में बेहाल हो रहे हैं।
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कटौती कर ओवरलोड ट्रांसफार्मर बचा रहा विभाग
ट्रांसफार्मर जलने या शार्ट सर्किट की समस्या न हो, इससे बचने के लिए बिजली विभाग इन दिनों मनमानी कटौती कर रहा है। इसके पीछे का प्रमुख कारण बजट मिलने के बाद भी समय से तैयारी न हो पाना है। गर्मी से बचाव के लिए लोग एसी, बड़े-बड़े कूलर, फ्रीज और डीप फ्रीजर आदि का प्रयोग कर रहे हैं। इससे बिजली खपत में भी लगातार इजाफा हो रहा है। पहले जहां घरों में एक-एक एसी चलता था, वहीं अब गर्मी बढ़ने के बाद दो से तीन और चार-चार एसी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे आम जनता या विद्युत उपभोक्ताओं की समस्या का तो निदान हुआ है, लेकिन बिजली विभाग की समस्या बढ़ गई है।
बिजली विभाग को शहर में नए वार्डों और अन्य हिस्से में ट्रांसफार्मर लगाने, उनकी क्षमता बढ़ाने तथा नए पोल व केबल गाने के लिए करीब 120 करोड़ रुपये मिले थे। यदि बिजली विभाग समय से कार्य पूरा करा लेता तो गर्मी में इतनी बड़ी समस्या नहीं आती। बजट मिलने के दो वर्ष बाद भी विभाग काम पूरा नहीं कर पाया। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
एसी, कूलर व फ्रिज के बढ़े दाम
बांदा। गर्मी बढ़ने के साथ ही बाजार में एसी, कूलर व फ्रिज के दाम बढ़ गए हैं। आम दिनों में जो एसी 30 से 35 हजार रुपये में मिल जाते थे, वही अब 40 हजार के आसपास हैं। ऐसी ही जो कूलर 10 हजार रुपये में मिल रहा था, वह 14 से 15 हजार रुपये में मिल रहा है। फ्रिज की बात करें तो इसमें भी चार से पांच हजार रुपये बढ़े हैं।
शहर में 24 व गांवों में 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा
शहर और गांवों में क्षमता वृद्धि न होने से ट्रांसफार्मर खूब फुंक रहे हैं। शहर में तो 24 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा किया जा रहा है। वहीं गांवों में फुंका ट्रांसफार्मर बदलने में 72 घंटे से भी ज्यादा का समय लग रहा है। अधिकारी खुद स्वीकार करते हैं कि क्षमता वृद्धि न होने से ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ रहा है और वह फुंक रहे हैं।
बिजली व्यवस्था पर एक नजर
बिजली उपभोक्ता -3.15 लाख
बिन कनेक्शन उपभोक्ता-पांच हजार
बड़े बकाएदार उपभोक्ता -18 हजार
उपकेंद्रों की संख्या -34
ट्रांसफार्मर-49 हजार
ट्राली ट्रांसफार्मर -178
वर्जन-
-गर्मी से बिजली की खपत बढ़ी है। इसी से ओवरलोडिंग की समस्या हो रही है। ऐसे में ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का काम कराया जा रहा है। जल्द ही समस्या से निजात मिलेगी। -नंदलाल, अधीक्षण अभियंता, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।