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बच्चे की सच्चाई पर मुरीद हो गए थे डकैत

Tue, 10 Jan 2017 11:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बांदा
ब्यूरो, अमर उजाला बांदा Updated Tue, 10 Jan 2017 11:20 PM IST
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The child had a fan on the truth of mobster
लंगर बांटते अकीदतमंद। - फोटो : Amar ujala

महान पुरुष शेख अब्दुल कादिर जिलानी (गौसे आजम) का यौमे वफात (पुण्यतिथि) मंगलवार को इस्लामी कलेंडर के रबी उस्सानी माह की 11वीं तारीख को मनाई गई। जुलूसे गौसिया में हरे परचम लहराते रहे।  घर-घर फातेहा ख्वानी हुई और तबर्रुक बांटा गया।

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दोपहर बाद जुलूसे गौसिया को कालवनगंज स्थित दरगाह खानकाह के पास हरी झंडी दिखाकर खुद्दामें गौस-ओ-ख्वाजा कमेटी के सरपरस्त (संरक्षक) हाजी अहमद ने रवाना किया। बड़ी संख्या में युवा, बच्चे और बुजुर्ग सिरों पर पगड़ी बांधे और भारी-भरकम हरे परचम लिए जुलूस में शामिल रहे। कुछ झांकियां भी शामिल थीं। शहर के कई इलाकों से होकर शाम को जुलूस कालवनगंज में खत्म हुआ। फातेहा हुई और तबर्रुक (प्रसाद) बांटा गया। मेराजुल हसन, मोहम्मद शफीकुद्दीन, मेराज हशमती, शीबू नियाजी, अब्दुल खालिक, सैय्यद अख्तर हुसैन, आसिफ मतीन, मोहम्मद माज वारसी, मोहम्मद फारुक अहमद, अब्दुल रहमान, बरकत अली, कादिर अफजाल, इमरान अली, इमरान रजा, जहीर बाबा, वसी अहमद, मोहम्मद हबीब, रियाज अहमद इत्यादि शामिल रहे।
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गौसे आजम का पूरा नाम अल सैय्यद मुहीउद्दीन अबु मोहम्मद अब्दुल कादिर जिलानी था। वह इराक के जिलान नामक कसबे में 19 मार्च 1078 ईसवी को पैदा हुए। उनकी वफात (देहांत) 12 जनवरी 1166 (इस्लामी कलेंडर के रबी उस्सानी माह की 11वीं तारीख) को हुई। उनके वालिद का नाम हजरत अबु स्वालेह मूसा अलहसनी और मां का नाम उम्मुलखैर फात्मा था। शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) ने इस मौके पर बताया कि गौसुल आजम अपने बचपन में पढ़ाई के लिए बगदाद जा रहे थे।
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खर्च के लिए उनकी मां ने उनकी सदरी के अंदर 40 अशर्फियां छिपाकर ऊपर से सिलाई कर दी। ताकि किसी को पता न चले। जंगल में डाकुओं ने काफिला रोक लिया। शेख अब्दुल कादिर जिलानी से पूछा कि उनके पास क्या है ? शेख ने बता दिया कि सदरी में 40 अशर्फियां छिपी हैं। यह भी कहा कि चलते वक्त उनकी मां ने नसीहत दी थी कि कभी किसी से झूठ न बोलना। डाकू गिरोह बच्चे की सच्चाई से बेहद प्रभावित हुआ और सभी डकैत शेख अब्दुल कादिर के मुरीद बन गए।

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