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पर्यटन दिवस पर विशेषः कोरोना में अजेय नहीं रहा कालिंजर दुर्ग

Mon, 24 Jan 2022 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 11:18 PM IST
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Special on Tourism Day: Kalinjar fort was not invincible in Corona
पहाड़ पर स्थित कालिंजर दुर्ग में नीलकंठेश्वर मंदिर का दृश्य। संवाद - फोटो : BANDA
नरैनी। बुंदेलखंड का ऐतिहासिक और धार्मिक नजरियों से महत्वपूर्ण और मशहूर अजेय दुर्ग कालिंजर भी कोरोना महामारी से अछूता नहीं रहा। पिछले वर्ष से यहां पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। इससे पुरातत्व विभाग की आमदनी भी घटी है। दूसरी तरफ दुर्ग में कई समस्याएं हैं। यहां पर्यटकों को पेयजल के लिए भी परेशान होना पड़ता है।
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कालिंजर दुर्ग चंदेल कालीन बताया गया है। यह वास्तुकला और नक्काशी के साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बुंदेलखंड में पर्यटकों को यह रिझाता भी है। दुर्ग में नीलकंठेश्वर मंदिर, वेंकट बिहारी मंदिर, रानी महल, राजा महल, पाताल गंगा, मृग धारा, अमान सिंह महल सहित कई प्राचीन तालाब और मजार हैं। पर्यटकों और श्रद्धालुओं को यही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
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दुर्ग के केयर टेकर सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना महामारी के पूर्व दुर्ग में रोजाना तकरीबन 700 पर्यटक हर माह आते रहे हैं। बाद में यह संख्या घटकर 600 के आसपास सिमट गई है। इनमें बमुश्किल 2 फीसदी पर्यटक विदेशी होते हैं, जो खजुराहो से यहां आते हैं। बताया कि कुछ विशेष पर्वों पर मंदिरों में भारी भीड़ जुटती है। नए वर्ष पर भी काफी लोग आते हैं।
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इस वर्ष पहली जनवरी को रिकार्ड 3700 लोग आए। केयर टेकर ने बताया कि कोरोना के बाद पर्यटकों की संख्या काफी घटी है। उधर, दुर्ग में पिछले चार वर्षों से पेयजल संकट बना हुआ है। जल संस्थान यहां स्थित टंकियों में जलापूर्ति नहीं कर रहा है। केयर टेकर ने बताया कि अपर जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि नमामि गंगे योजना से जोड़कर यहां पेयजल आपूर्ति कराई जाएगी।

विदेशी पर्यटकों के लिए अधिक प्रवेश शुल्क
नरैनी। कालिंजर दुर्ग आने वाले पर्यटकों/सैलानियों से पुरातत्व विभाग शुल्क वसूलता है। केयर टेकर ने बताया कि स्वदेशी सैलानियों से 25 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाता है। ऑनलाइन बुकिंग पर 20 रुपये लगते हैं। विदेशी पर्यटकों का टिकट 300 रुपये है, ऑनलाइन बुकिंग पर 250 रुपये लिए जाते हैं।
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कालिंजर दुर्ग की चट्टानों पर तराशीं गईं दुर्लभ मूर्तियां।

कालिंजर दुर्ग की चट्टानों पर तराशीं गईं दुर्लभ मूर्तियां। - फोटो : BANDA

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