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विदाई में बारातियों को दिए गौरैया के घोंसले
Mon, 04 Mar 2019 11:34 PM IST
ASIF ASIF
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Mon, 04 Mar 2019 11:34 PM IST
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विदाई के पूर्व पौधा रोपते दूल्हा-दुल्हन।
- फोटो : अमर उजाला
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तेजी से विलुप्त हो रही घर के आंगन की चीं-चीं यानी गौरैया को याद करने का दिन फिर नजदीक है। 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया जाएगा। पर्यावरण प्रेमियों ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है। पर्यावरण संरक्षण का अनूठे अंदाज में संदेश देने वाले दंपति ने अपनी भतीजी की शादी में विदाई के दौरान बारातियों को गौरैया के घोंसले भेंट किए। बाबुल की देहरी छोड़ने से पहले बेटी और दूल्हे ने पौधे भी लगाए।
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प्रकृति सम्यक शादी का यह आयोजन नरैनी क्षेत्र के मोहन पुरवा (खलारी) में रविवार को हुआ। ग्राम प्रधान सुमन लता पटेल और उनके अध्यापक पति यशवंत पटेल ने भतीजी ममता पटेल (पुत्री श्रीपाल पटेल) का विवाह अनोखे और पर्यावरण प्रेम दर्शाने वाले अंदाज में किया। बारातियों को मिट्टी के कुल्लड़ में पानी और पत्तल में भोजन परोसा गया। हरे पत्तों से मंडप सजा। विदाई के समय दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ पौधरोपण किया।
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प्रधान दंपति ने बारातियों को गौरैया के घोंसले भेंट किए। साथ ही उन्हें संदेश दिया कि 20 मार्च को गौरैया दिवस पर इन घोंसलों को उचित स्थान पर स्थापित करें और विलुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण दें। बारात सीमावर्ती छतरपुर जिले के सरबई गांव से आई थी। दूल्हा अखिलेश वहां विद्युत विभाग में लाइनमैन है। पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने बताया कि प्रधान दंपति इसके पूर्व भी इसी तर्ज पर आठ विवाह समारोह कर चुके हैं। उन्होंने शादी के नाम पर लाखों और करोड़ों रुपये फूंकने और पर्यावरण को पलीता लगाने वालों के लिए यह प्रेरणादायक बताया।
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