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जलवायु के हिसाब से करें दलहन की बुआई
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तिंदवारी। दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए रविवार को महोखर गांव में प्रशिक्षण आयोजित हुआ। आयोजक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड में जलवायु के हिसाब से दलहन की दो किस्में पीडीएल-1, पीएसएल-9 बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तकनीक से खेती करने की सलाह दी।
सदस्य बलराम सिंह कछवाह ने बताया कि नई तकनीक व बीजों का इस्तेमाल फार्म हाउस में किया गया है। कृषि विश्वविद्यालय के एचओडी डॉ. श्याम सिंह, प्रवक्ता डॉ. कमालुद्दीन ने किसानों से कहा कि यहां की जलवायु के अनुकूल दहलन की बीजों की बुआई करें।
किसानों ने प्रदर्शनी में दलहन की नई-नई किस्मों की जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों का जवाब दिया। कृषि विश्वविद्यालय के राम खेलावन, कमलेश, रविकांत, आनंद सिंह, ब्रजेश सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने खप्टिहा कलां में बोई गई दलहन पीडीएल-1, पीएसएल-9 की फसल देखी।
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सदस्य बलराम सिंह कछवाह ने बताया कि नई तकनीक व बीजों का इस्तेमाल फार्म हाउस में किया गया है। कृषि विश्वविद्यालय के एचओडी डॉ. श्याम सिंह, प्रवक्ता डॉ. कमालुद्दीन ने किसानों से कहा कि यहां की जलवायु के अनुकूल दहलन की बीजों की बुआई करें।
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किसानों ने प्रदर्शनी में दलहन की नई-नई किस्मों की जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने किसानों के सवालों का जवाब दिया। कृषि विश्वविद्यालय के राम खेलावन, कमलेश, रविकांत, आनंद सिंह, ब्रजेश सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने खप्टिहा कलां में बोई गई दलहन पीडीएल-1, पीएसएल-9 की फसल देखी।
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