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न लगा जुगाड़ तो कैसे होगा बेड़ा पार

Thu, 10 Nov 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 10 Nov 2016 11:06 PM IST
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So how would raise were not unscathed
स्टेट बैंक की सिटी ब्रांच में लंबी लाइन। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। न लगा जुगाड़ तो कैसे होगा बेड़ा पार? चुनाव की ‘पूंजी’ थी पूरी तैयार। पर केंद्र सरकार ने कर दिया बंटाधार। चंद महीनों बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव में किसी प्रमुख पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे नेताओं के दिलोदिमाग में यही सवाल कौंध रहा है। कई संभावित प्रत्याशी तो कल ही लखनऊ कूच कर गए। गलियारों में चर्चा है कि हाईकमान से उपाय पूछेंगे कि चुनाव की ‘काली’ पूंजी को व्हाइट मनी में कैसे बदला जाए?

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चित्रकूटधाम मंडल की 10 विधानसभा सीटों पर प्रमुख दल भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस से लगभग 50 लोग टिकट की लाइन में हैं। सबकों को बखूबी पता है कि चुनाव कितना महंगा होगा? जिन्हें टिकट मिलने की पूरी उम्मीद है, उन्होंने चुनाव का बजट पहले ही जमा कर लिया है। बैंक खातों में तो नाममात्र की, पर घरों और गुप्त स्थानों पर करोड़ों की बेनामी करेंसी है। चुनाव में इसी का इस्तेमाल होना था पर 1000 और 500 के पुराने नोट बंद हो जाने से सारे प्रत्याशियों की नींद उड़ गई है।
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पुराने नोट बदलकर नई करेंसी जुटाने के जुगाड़ में जुटे इन नेताओं के दिलोदिमाग में यह खौफ समाया हुआ है कि करेंसी बदलने का जुगाड़ न लगा तो कैसे बेड़ापार होगा? एक प्रमुख दल के प्रत्याशी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नरेंद्र मोदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया। अच्छी खासी रकम चुनाव के लिए 500 व 1000 के नोटों में रखी थी। अब इन्हें कैसे बचाया जाए? समझ में नहीं आ रहा।
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बालू का पैसा अब बना बवाल
बांदा। बड़े नोट बंद होने से चारों तरफ चल रही चटखारेदार चर्चाओं के बीच बुंदेलखंड में यह चर्चा आम है कि प्रधानमंत्री ने सबसे बड़ा झटका यहां के बालू माफिया और कारोबारियों को दिया है। हर माह खदानों से खजाना भरने वाले अब इस चिंता में हैं कि सिंडीकेट और बालू की कमाई कैसे जाए बचाई?

बुंदेलखंड के सातों जिलों में लगभग साढ़े तीन अरब रुपये सालाना सिर्फ खनिज से रायल्टी के रूप में राजस्व मिलता है। इससे कहीं ज्यादा पैसा बालू माफियाओं, बालू कारोबारी और सिंडीकेट चलाने वालों की जेबों में जाता है। लखनऊ का हिस्सा निकालने के बाद भी भारी भरकम रकम बचती है। यह पूरी तरह अवैध होने से बैंकों में सारी की सारी जमा नहीं हो पाती। घरों, बंगलों, कोठी या तिजोरियों में बड़े नोटों में बदल कर रखी जाती है।


खनिज विभाग में बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा कमाई महोबा जिले की है। यहां रायल्टी का राजस्व लगभग 85 करोड़ रुपये सालाना है। 70 करोड़ पर हमीरपुर का दूसरा नंबर है। झांसी 65 करोड़, जालौन 35 करोड़, ललितपुर 33 करोड़ और बांदा 30 करोड़ तथा चित्रकूट 16 करोड़ रायल्टी राजस्व देता है। सातों जिलों में इससे कहीं ज्यादा कमाई अवैध खनन और सिंडीकेट में होती है।

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