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Banda News: सात साल बाद अप्रैल में जून जैसी गमी, पारा 44.5 डिग्री
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बांदा। अप्रैल में ही मई और जून जैसी गर्मी पड़ने लगी है। बुधवार को अधिकतम पारा 44.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सात साल बाद ऐसी गर्मी पड़ रही है। गर्मी के कारण सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। जो लोग जरूरी काम से निकले, वह पूरी तरह से सिर और कानों को ढककर निकले।
बुधवार को सुबह से ही सूर्य की किरणें तल्ख रहीं। दोपहर को तो मानों आसमान से आग बरस रही हो। सड़कों पर सन्नाटा छा गया। सड़कों पर टेंपो और रिक्शा कम ही नजर आए। सरकारी कार्यालयों से अधिकारी गायब रहे और बंगलों में आराम फरमाते रहे। कर्मचारी कूलर व एससी में बैठे रहे।
कचहरी परिसर में मुकदमे के सिलसिले में आए रामराज गश्त खाकर गिर गए। वकीलों ने मुंह पर पानी के छीटे मारे। हालांकि दो मिनट में ही होश में आ गए। अधिवक्ता गोपाल नारायण बस्ते में पंखे के नीचे काफी देर तक लेटाए रखा। शाम को वह वापस घर गए। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 26 अप्रैल वर्ष 2018 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री पहुंचा था। अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा रहा। सामान्य तौर पर 39 या 40 डिग्री के आसपास होना चाहिए था। वहीं न्यूनतम तापमान भी करीब छह डिग्री ज्यादा है। अप्रैल में सामान्य 22 या 23 डिग्री होना चाहिए था।
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कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक प्रो. दिनेश शाहा का कहना है कि रात में भी तापमान बढ़ रहा है। मंगलवार की रात 28.7 तापमान रहा, जिससे गर्मी और तल्ख हो गई। पांच किलो मीटर प्रति घंट की गति से सूखी गर्म हवाएं भी चल रही हैं। गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी जे.रीभा ने नगर निकायों को सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था करने के साथ ही सीएमओ को जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं का स्टाक रखने के निर्देश दिए हैं। मनरेगा श्रमिकों को ओआरएस का पैकेट्स देने के निर्देश दिए हैं।
जाम में फंसे तो कराह उठे राहगीर
जनपद में 11 बजे के बाद धूप ऐसी असहनीय हुई कि राहगीर कराह उठे। सिविल लाइंस क्योटरा तिराहे के पास बुधवार को दोपहर 12 बजे करीब जाम लग गया। इसमें ई-रिक्शा व बाइक सवारों की भी संख्या काफी रही। तेज धूप में करीब आधा घंटे के बाद वाहन निकले, तब कहीं राहत मिली। दरअसल यहां पर पाइप लाइन लीकेज सुधारने को करीब 10 फीट चौड़ा गड्ढा सप्ताह भर से खोदा हुआ पड़ा है। इसे बंद करना विभागीय अधिकारी भूल गए हैं। इससे राहगीरों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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बुधवार को सुबह से ही सूर्य की किरणें तल्ख रहीं। दोपहर को तो मानों आसमान से आग बरस रही हो। सड़कों पर सन्नाटा छा गया। सड़कों पर टेंपो और रिक्शा कम ही नजर आए। सरकारी कार्यालयों से अधिकारी गायब रहे और बंगलों में आराम फरमाते रहे। कर्मचारी कूलर व एससी में बैठे रहे।
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कचहरी परिसर में मुकदमे के सिलसिले में आए रामराज गश्त खाकर गिर गए। वकीलों ने मुंह पर पानी के छीटे मारे। हालांकि दो मिनट में ही होश में आ गए। अधिवक्ता गोपाल नारायण बस्ते में पंखे के नीचे काफी देर तक लेटाए रखा। शाम को वह वापस घर गए। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 26 अप्रैल वर्ष 2018 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री पहुंचा था। अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा रहा। सामान्य तौर पर 39 या 40 डिग्री के आसपास होना चाहिए था। वहीं न्यूनतम तापमान भी करीब छह डिग्री ज्यादा है। अप्रैल में सामान्य 22 या 23 डिग्री होना चाहिए था।
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कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक प्रो. दिनेश शाहा का कहना है कि रात में भी तापमान बढ़ रहा है। मंगलवार की रात 28.7 तापमान रहा, जिससे गर्मी और तल्ख हो गई। पांच किलो मीटर प्रति घंट की गति से सूखी गर्म हवाएं भी चल रही हैं। गर्मी को देखते हुए जिलाधिकारी जे.रीभा ने नगर निकायों को सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था करने के साथ ही सीएमओ को जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं का स्टाक रखने के निर्देश दिए हैं। मनरेगा श्रमिकों को ओआरएस का पैकेट्स देने के निर्देश दिए हैं।
जाम में फंसे तो कराह उठे राहगीर
जनपद में 11 बजे के बाद धूप ऐसी असहनीय हुई कि राहगीर कराह उठे। सिविल लाइंस क्योटरा तिराहे के पास बुधवार को दोपहर 12 बजे करीब जाम लग गया। इसमें ई-रिक्शा व बाइक सवारों की भी संख्या काफी रही। तेज धूप में करीब आधा घंटे के बाद वाहन निकले, तब कहीं राहत मिली। दरअसल यहां पर पाइप लाइन लीकेज सुधारने को करीब 10 फीट चौड़ा गड्ढा सप्ताह भर से खोदा हुआ पड़ा है। इसे बंद करना विभागीय अधिकारी भूल गए हैं। इससे राहगीरों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।