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तटबंध ने बचाया फिर जिले को बाढ़ से

Mon, 22 Aug 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा Updated Mon, 22 Aug 2016 11:43 PM IST
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Saved the district from the flood dike
केन नदी किनारे ब्रह्माडेरा गांव में पीएसी बोट से लुटाए जा रहे लंच पैकेट लूटते बाढ़ पीड़ित भूखे बच्चे व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। केन नदी तट पर बसपा सरकार में बनाए गए मार्जिनल बांध ने एक बार फिर बांदा शहर को बांध से बचा लिया। करोड़ों रुपये की संपत्ति बच गई। सैकड़ों लोग बेघर होने से सुरक्षित रहे। अलबत्ता, बसपा सरकार के बाद इस बांध पर पिछले पांच वर्षों में मौजूदा सरकार ने एक बार भी नजर नहीं डाली। कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रहे बांध की मरम्मत और अधूरे कामों को पूरा करने के लिए धेला बराबर बजट नहीं दिया। वर्ष 2005 में केन नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। बांदा शहर के 13 मोहल्ले पूरी तरह जलमग्न हो गए थे। करोड़ों रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति जमींदोज हो गई थी।

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इसी के बाद बसपा सरकार मेें यहां के बाशिंदे नसीमुद्दीन सिद्दीकी सिंचाई मंत्री बने। वह यहां से विधायक रह चुके थे। बाढ़ का बखूबी अनुभव था। उन्होंने केन नदी तट पर मार्जिनल तटबंध को मंजूरी दी। बजट देकर बांध बनवाया। हालांकि इसमें अभी रेगुलेटर का पूरा काम नहीं हो पाया था और बसपा सरकार का तख्ता पलट हो गया। रेगुलेटर का काम जहां का तहां अधूरा रह गया। तब से केन नदी कई बार खतरे का निशान पार कर चुकी है। लेकिन अब शहर में पानी रोकने के लिए यह बांध दीवार बनकर खड़ा हो जाता है। इस बार भी नदी का जल स्तर 111 मीटर हो जाने के बाद भी केन का पानी बांध के काफी नीचे ही रहा। रेगुलेटर न बनाए जाने से शहर की बारिश का पानी नदी में नहीं जा पाता। इसके जल भराव से छाबी तालाब, कंचन पुरवा, मानिक कुइयां आदि निचले इलाकों में काफी गहराई तक पानी भर जाता है। अबकी यह भरा है। सिंचाई विभाग पंप लगाकर यह पानी नदी में फेंकता है। प्रदेश सरकार द्वारा तटबंध के लिए कोई पैसा न दिए जाने से इसकी मरमम्मत नहीं हो पा रही। न ही रेगुलेटर बन पा रहा।

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