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बुंदेलखंड के कृष्णानंद को विधान परिषद करेगी ‘सलाम’

Fri, 26 Jul 2019 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2019 11:39 PM IST
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'Saram' will be organized by Krishananand
बांदा। हिम्मते मर्दां-मददे खुदा। कुछ ऐसे ही जज्बे के साथ बूढ़ी भुजाओं ने अकेले दम तालाब खोद डाला। न कोई शोहरत और न किसी की मदद। अमर उजाला में इस गुमनाम श्रमदानी की कहानी छपी तो हमीरपुर जिले के पचखुरा गांव के किशनपाल उर्फ बाबा कृष्णानंद चर्चाओं में आ गए। अब उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भी बाबा का यह श्रमदान गूंजा है। जल्द ही विधान परिषद में बाबा के लिए बधाई प्रस्ताव पारित हो सकता है। इसकी शुरुआत हो गई है।
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पचखुरा बुजुर्ग गांव में सूखे पड़े चंदेलकालीन तालाब को इसी गांव के किशनपाल सिंह ने संन्यास धारण करने के बाद अकेले दम पर खोदने का बीड़ा उठाया। गांव वालों से मदद मांगी, लेकिन नहीं मिली। फरवरी 2014 में किशनपाल ने तालाब खोदने की शुरुआत कर दी। पांच साल की मेहनत के बाद पिछले वर्ष से तालाब अपने पुराने स्वरूप में लौट आया। इसमें पानी का भंडार होने लगा। यही काम सरकारी विभाग करते तो अनुमानित 15 लाख रुपये का खर्च होता। 18 जून को ‘अमर उजाला’ में यह स्टोरी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी।
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अब यह मामला प्रदेश की विधान परिषद जा पहुंचा है। इसी बुधवार को विधान परिषद सदस्य दीपक सिंह ने विधान परिषद में नियम-59 के तहत परिषद के प्रमुख सचिव को दी लिखित नोटिस में कहा है कि बुंदेलखंड के हमीरपुर के पचखुरा गांव में बाबा कृष्णानंद ने अपने अदम्य साहस और संकल्प शक्ति की बदौलत बुंदेलखंड की धरती को एक नई राह दिखाई है। 200 साल पुराने और पूरी तरह पट चुके तालाब से 3000 ट्राली मिट्टी खोदकर तालाब को पुनर्जीवित कर दिया है।
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विधान परिषद सदस्य ने कहा कि यह कार्य उनकी दृढ़ संकल्प शक्ति, लगन और समाज के लिए चुपचाप कुछ कर गुजरने की भावना का अप्रतिम उदाहरण है। दीपक सिंह ने सदन से अनुरोध किया कि पचखुरा के इस कर्मयोगी और उनके जैसे अन्य कर्म योगियों के प्रति सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए। इस तरह के लोकोपकारी कार्य करने वालों को बल मिलेगा और दूसरे लोगों को प्रेरणा। उनके इस प्रस्ताव पर अगले सत्र में चर्चा और मंजूरी की संभावना है।
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