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बालू बनी ‘सोना’, पुलिस व खनिज विभाग की ‘चांदी’
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बांदा। सरकारी खजाने से कहीं ज्यादा खनिज संपदा से बालू चोरों, पट्टाधारकों, पुलिस और विभागीय लोगों की जेबें भर रहीं हैं। मंडल मुख्यालय की नाक तले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और शासन के आदेशों की धज्जियां रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक उड़ रही है। खेत और गांव की गलियां तथा करोड़ों की सड़कें ध्वस्त कर रहे ओवरलोड ट्रकों की धर पकड़ के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही हैं। अक्सर सैकड़ों ट्रकों को पकड़कर गिने-चुने का चालान करके शेष ट्रकों से वसूली कर उन्हें क्लीन चिट दे दी जाती है।
हाईकोर्ट के आदेशाें का भी पालन नहीं हो रहा। खदानें आबाद हो गई। जेबें भरने लगीं, लेकिन शर्तों और निर्देशों पर अमल नहीं किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की सरहद से लेकर मंडल मुख्यालय की नाक तले चल रही खदानों में अब तक न तो धर्मकाटे लगे और न ही सीसीटीवी कैमरे। 1 अक्टूबर से शुरू हुए खनन के दूसरे चरण में दो माह बाद भी मानक पूरे नहीं किए जा रहे हैं।
धर पकड़ के नाम पर मध्य प्रदेश की खदानों से आने वाले गिने चुने ट्रकों पर कार्रवाई कर सैकड़ों ट्रकों से लेन-देन कर रवाना कर दिया जा रहा है। सीमावर्ती थानों और चौकियों की चांदी है। मध्य प्रदेश की खदानों से रोजाना सैकड़ों की तादाद में आ रहे ओवरलोड बालू ट्रकों से रायल्टी से कई गुना ज्यादा सिंडीकेट और पुलिस की वसूली हो रही है। ओवरलोड ट्रकों से वसूली के मानक अलग-अलग है।
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अगर रायल्टी इत्यादि नहीं है तो पकडे़ गए ट्रक को 60 हजार रुपए तक भुगतना पड़ सकते है। वैध रायल्टी है और सिर्फ ओवरलोडिंग है तो 25 से 30 हजार में क्लीन चिट मिलती है। चेकिंग के समय खनिज अधिकारी, परिवहन और पुलिस अधिकारियों को भी साथ रखते हैं। इस गोरखधंधे में सत्तारूढ़ दल से जुडे़ माननीयों की भी मिलीभगत बताई जा रही है।
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हाईकोर्ट के आदेशाें का भी पालन नहीं हो रहा। खदानें आबाद हो गई। जेबें भरने लगीं, लेकिन शर्तों और निर्देशों पर अमल नहीं किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की सरहद से लेकर मंडल मुख्यालय की नाक तले चल रही खदानों में अब तक न तो धर्मकाटे लगे और न ही सीसीटीवी कैमरे। 1 अक्टूबर से शुरू हुए खनन के दूसरे चरण में दो माह बाद भी मानक पूरे नहीं किए जा रहे हैं।
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धर पकड़ के नाम पर मध्य प्रदेश की खदानों से आने वाले गिने चुने ट्रकों पर कार्रवाई कर सैकड़ों ट्रकों से लेन-देन कर रवाना कर दिया जा रहा है। सीमावर्ती थानों और चौकियों की चांदी है। मध्य प्रदेश की खदानों से रोजाना सैकड़ों की तादाद में आ रहे ओवरलोड बालू ट्रकों से रायल्टी से कई गुना ज्यादा सिंडीकेट और पुलिस की वसूली हो रही है। ओवरलोड ट्रकों से वसूली के मानक अलग-अलग है।
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अगर रायल्टी इत्यादि नहीं है तो पकडे़ गए ट्रक को 60 हजार रुपए तक भुगतना पड़ सकते है। वैध रायल्टी है और सिर्फ ओवरलोडिंग है तो 25 से 30 हजार में क्लीन चिट मिलती है। चेकिंग के समय खनिज अधिकारी, परिवहन और पुलिस अधिकारियों को भी साथ रखते हैं। इस गोरखधंधे में सत्तारूढ़ दल से जुडे़ माननीयों की भी मिलीभगत बताई जा रही है।