{"_id":"5e77941d8ebc3e78b622f8af","slug":"sanatized-the-jugglers-and-bandmates-banda-news-knp551888488","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरातघरों और बैंडबाजों को सैनिटाइज्ड करना अनिवार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरातघरों और बैंडबाजों को सैनिटाइज्ड करना अनिवार्य
विज्ञापन
बांदा शहर के चौक बाजार में बंद दुकानें।
- फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना वायरस के मंडराते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग और शासन ने शादी-बरात जैसे आयोजनों पर भी कई पाबंदियां लागू की हैं। मैरिज हाल या बरातघर के रसोइयों और भोजन परोसने वालों को पहले सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोना और मॉस्क पहनना जरूरी होगा।
आगंतुकों के लिए सैनिटाइजर, साबुन तथा हाथ धोने की समुचित व्यवस्था गृह स्वामी कराएंगे। बरातघरों की सफाई और सैनिटाइज्ड शादीघरों के स्वामियों को अनिवार्य रूप से कराना होगा। डीएम अमित सिंह बंसल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शादी ब्याह में हर आयोजन के पहले सैनिटाइज्ड किया जाए।
लोगों के बैठाने की व्यवस्था ऐसी हो कि हरेक के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी हो। मैरिज हाल में उपयुक्त स्थान पर बड़ी होर्डिंग/बैनर लगा हो, जिसमें कोरोना वायरस से बचाव बताए गए हों। यह बरातघर सभी को लगाना होगा। आगंतुकों की संख्या कम रखने के लिए वर-वधू पक्ष से अपील की जाए। डीएम ने यह भी कहा कि शादियों में बजाए जाने वाले विंड इंस्टूमेंट को भी सैनिटाइज्ड किया जाए। खासतौर पर ब्रॉसबैंड संचालक इसे अनिवार्य रूप से करें। डीएम ने खबरदार किया है कि इनका उल्लंघन करने पर धारा 188 की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
कोरोना से बुजुर्गों को खास बचाव की जरूरत
बांदा। वैसे तो कोरोना सभी के लिए खतरनाक है। लेकिन 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों को खास एहतियात बरतना होगी। उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में घर के लोगों का फर्ज है कि बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने दें। लेकिन ऐसा भी न करें कि उन्हें कमरे में कैद कर दें। प्यार और सम्मान से पेश आएं।
महानिदेशक (परिवार कल्याण) डा.बद्री विशाल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बुजुर्गों को ऐसे कमरे में रखें जो हवादार और खुला हो। सफाई की खास व्यवस्था हो। बालकनी व बरामदे में टहलने में कोई पाबंदी न हो। टीवी, पूजापाठ आदि की व्यवस्था हो। व्यायाम कर सकें तो और बेहतर। उन्हें गुनगुना पानी, जूस, नींबू रस, तुलसी-अदरक वाली चाय और भोजन में दूध-दही, पनीर, हरी सब्जियां तथा दाल और मौसमी फल दें।
10वें घंटे में गूंज उठीं तालियां और थालियां
बांदा। 14 घंटे के जनता कर्फ्यू में ठीक 10 घंटे बाद शाम 5 बजे घर-द्वार, छत, बालकनी आदि से ताली-थाली और शंख-घंटी के घोष गूंज उठे। ऐसा करने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। शहर से लेकर कस्बों और गांव तक तालियां और थालियां गूंजीं।
इसका उद्देश्य कोरोना वायरस संक्रमित या इसे फैलने से बचाव में लगे डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिस और अन्य अधिकारी व कर्मचारियों तथा कवरेज कर रहे मीडिया का हौंसला बढ़ाना और उनका आभार जताना था। बांदा शहर सहित बबेरू, अतर्रा, नरैनी, तिंदवारी, बदौसा, मटौंध, कमासिन, खप्टिहा कलां, जसपुरा, चिल्ला, बेंदा, करतल, गिरवां, खत्री पहाड़, ओरन, बिसंडा आदि में भी थालियां और तालियां बजाने के आयोजन हुए।
धार्मिक आस्था पर भी भारी जनता कर्फ्यू
बांदा। जनता कर्फ्यू सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा। आमतौर पर धार्मिक स्थलों में हर हाल में हाजिरी देने वाले श्रद्धालु भी इसमें शामिल हुए। प्रमुख मंदिरों के दरवाजे और कपाट बंद रखे गए। इनमें शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी, काली देवी, बांबेश्वर मंदिर और संकट मोचन मंदिर आदि शामिल हैं। इसी तरह ऐतिहासिक नवाबी जामा मस्जिद में भी सन्नाटा रहा। सिविल लाइन स्थित तीनों चर्च में भी श्रद्धालु नजर नहीं आए।
सूरत से लौटे मजदूर परिवार ने मस्जिद के बाहर डाला डेरा
बांदा। सूरत या अन्य महानगरों से आने वालों से जहां लोग बिदक कर दूरी बना रहे हैं, वहीं जनता कर्फ्यू के दौरान ऐसे ही परदेसियों से हमदर्दी और मानवता के बर्ताव भी नजर आए। पड़ोसी जिले फतेहपुर के गहरू खेड़ा (जुनिहा) के अनुसूचित जाति के जगदीश वर्मा व सुशील वर्मा आदि अपने घर की महिलाओं और बच्चों सहित सूरत में अंगूठी का काम करते हैं।
शनिवार की रात वह ट्रेन से मानिकपुर तक आए। वहां से किसी वाहन से तड़के बांदा आ गए। यहां से उन्हें गांव जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। 12 से ज्यादा संख्या वाले इस परिवार ने शहर की नवाबी जामा मस्जिद की ड्योढ़ी पर अपना डेरा डाल दिया। इनमें कई बच्चे भी थे।
चारों तरफ पड़े सुनसान इलाके में उन्हें खाने-पीने की कोई वस्तु उपलब्ध नहीं हो रही थी। इसी बीच जामा मस्जिद कार्यकर्ताओं ने उन्हें पानी-नाश्ते आदि की व्यवस्था कराई। प्रशासन के अधिकारियों ने भी पहुंचकर इस परिवार से पूछताछ की। बाद में परिवार अपने संबंधियों द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहनों से गांव के लिए कूच कर गया।
विज्ञापन
आगंतुकों के लिए सैनिटाइजर, साबुन तथा हाथ धोने की समुचित व्यवस्था गृह स्वामी कराएंगे। बरातघरों की सफाई और सैनिटाइज्ड शादीघरों के स्वामियों को अनिवार्य रूप से कराना होगा। डीएम अमित सिंह बंसल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शादी ब्याह में हर आयोजन के पहले सैनिटाइज्ड किया जाए।
विज्ञापन
लोगों के बैठाने की व्यवस्था ऐसी हो कि हरेक के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी हो। मैरिज हाल में उपयुक्त स्थान पर बड़ी होर्डिंग/बैनर लगा हो, जिसमें कोरोना वायरस से बचाव बताए गए हों। यह बरातघर सभी को लगाना होगा। आगंतुकों की संख्या कम रखने के लिए वर-वधू पक्ष से अपील की जाए। डीएम ने यह भी कहा कि शादियों में बजाए जाने वाले विंड इंस्टूमेंट को भी सैनिटाइज्ड किया जाए। खासतौर पर ब्रॉसबैंड संचालक इसे अनिवार्य रूप से करें। डीएम ने खबरदार किया है कि इनका उल्लंघन करने पर धारा 188 की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
कोरोना से बुजुर्गों को खास बचाव की जरूरत
बांदा। वैसे तो कोरोना सभी के लिए खतरनाक है। लेकिन 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों को खास एहतियात बरतना होगी। उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे में घर के लोगों का फर्ज है कि बुजुर्गों को घर से बाहर न निकलने दें। लेकिन ऐसा भी न करें कि उन्हें कमरे में कैद कर दें। प्यार और सम्मान से पेश आएं।
महानिदेशक (परिवार कल्याण) डा.बद्री विशाल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बुजुर्गों को ऐसे कमरे में रखें जो हवादार और खुला हो। सफाई की खास व्यवस्था हो। बालकनी व बरामदे में टहलने में कोई पाबंदी न हो। टीवी, पूजापाठ आदि की व्यवस्था हो। व्यायाम कर सकें तो और बेहतर। उन्हें गुनगुना पानी, जूस, नींबू रस, तुलसी-अदरक वाली चाय और भोजन में दूध-दही, पनीर, हरी सब्जियां तथा दाल और मौसमी फल दें।
10वें घंटे में गूंज उठीं तालियां और थालियां
बांदा। 14 घंटे के जनता कर्फ्यू में ठीक 10 घंटे बाद शाम 5 बजे घर-द्वार, छत, बालकनी आदि से ताली-थाली और शंख-घंटी के घोष गूंज उठे। ऐसा करने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। शहर से लेकर कस्बों और गांव तक तालियां और थालियां गूंजीं।
इसका उद्देश्य कोरोना वायरस संक्रमित या इसे फैलने से बचाव में लगे डाक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पुलिस और अन्य अधिकारी व कर्मचारियों तथा कवरेज कर रहे मीडिया का हौंसला बढ़ाना और उनका आभार जताना था। बांदा शहर सहित बबेरू, अतर्रा, नरैनी, तिंदवारी, बदौसा, मटौंध, कमासिन, खप्टिहा कलां, जसपुरा, चिल्ला, बेंदा, करतल, गिरवां, खत्री पहाड़, ओरन, बिसंडा आदि में भी थालियां और तालियां बजाने के आयोजन हुए।
धार्मिक आस्था पर भी भारी जनता कर्फ्यू
बांदा। जनता कर्फ्यू सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं रहा। आमतौर पर धार्मिक स्थलों में हर हाल में हाजिरी देने वाले श्रद्धालु भी इसमें शामिल हुए। प्रमुख मंदिरों के दरवाजे और कपाट बंद रखे गए। इनमें शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी, काली देवी, बांबेश्वर मंदिर और संकट मोचन मंदिर आदि शामिल हैं। इसी तरह ऐतिहासिक नवाबी जामा मस्जिद में भी सन्नाटा रहा। सिविल लाइन स्थित तीनों चर्च में भी श्रद्धालु नजर नहीं आए।
सूरत से लौटे मजदूर परिवार ने मस्जिद के बाहर डाला डेरा
बांदा। सूरत या अन्य महानगरों से आने वालों से जहां लोग बिदक कर दूरी बना रहे हैं, वहीं जनता कर्फ्यू के दौरान ऐसे ही परदेसियों से हमदर्दी और मानवता के बर्ताव भी नजर आए। पड़ोसी जिले फतेहपुर के गहरू खेड़ा (जुनिहा) के अनुसूचित जाति के जगदीश वर्मा व सुशील वर्मा आदि अपने घर की महिलाओं और बच्चों सहित सूरत में अंगूठी का काम करते हैं।
शनिवार की रात वह ट्रेन से मानिकपुर तक आए। वहां से किसी वाहन से तड़के बांदा आ गए। यहां से उन्हें गांव जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। 12 से ज्यादा संख्या वाले इस परिवार ने शहर की नवाबी जामा मस्जिद की ड्योढ़ी पर अपना डेरा डाल दिया। इनमें कई बच्चे भी थे।
चारों तरफ पड़े सुनसान इलाके में उन्हें खाने-पीने की कोई वस्तु उपलब्ध नहीं हो रही थी। इसी बीच जामा मस्जिद कार्यकर्ताओं ने उन्हें पानी-नाश्ते आदि की व्यवस्था कराई। प्रशासन के अधिकारियों ने भी पहुंचकर इस परिवार से पूछताछ की। बाद में परिवार अपने संबंधियों द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहनों से गांव के लिए कूच कर गया।

बेरू नगर में वीरान पड़ी मुख्य सड़क।- फोटो : BANDA

बांदा शहर के महेश्वरी देवी मंदकिर के बंद गेट के बाहर से दर्शन करता श्रद्धालु।- फोटो : BANDA

बांदा की नवाबी जामा मस्जिद के बाहर डेरा डाले सूरत से लौटा अनुसूचित जाति का मजदूर परिवार ।- फोटो : BANDA

अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष सुबीर सिंह गौर।- फोटो : BANDA

अतर्रा में मॉस्क पहनकर भागवत कथा सुनाते कथा वाचक माधवेश ललित।- फोटो : BANDA