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वेतन-भत्ते से न हो मतलब वही लड़ें चुनाव
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गोष्ठी को संबोधित करते एडीआर/यूपी इलेक्शन वाच कोआर्डिनेटर अनिल शर्मा।
- फोटो : BANDA
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बांदा। मतदाता एकजुट होकर संसद में ऐसा कानून बनवाएं जिसमें सच्चे जन प्रतिनिधियों को वेतन, भत्ते और पेंशन तथा निधियों के बजाए सिर्फ जनता की सेवा में रुचि हो। राजनीति में बढ़ते बाहुबल और धनबल को खत्म करने के लिए दागियों का राजनीति से पत्ता साफ करना जरूरी है। यह बात एडीआर एवं यूपी इलेक्शन वाच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चुनाव सुधार एवं युवा संवाद गोष्ठी में प्रदेश कोआर्डिनेटर अनिल शर्मा ने कही।
राजा देवी डिग्री कालेज सभागार में आयोजित गोष्ठी में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित हुए कि दागियों को राजनीति से हटाया जाए और सच्चे समाजसेवियों को लाया जाए। उन्हें वेतन, भत्ते, पेंशन और निधियों से कोई मतलब नहीं होना चाहिए। जब कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा तो दागी अपने आप चुनाव से बाहर हो जाएंगे।
एक अन्य पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मतदान में अगर नोट जीते तो उस क्षेत्र में दोबारा चुनाव हों। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डा.संतोष तिवारी ने कहा कि बेहतर प्रत्याशियों के लिए नोटा बेहतर विकल्प है। एडीआर प्रदेश कोर कमेटी सदस्य अधिवक्ता आनंद सिन्हा ने कहा कि युवाओं को तय करना होगा कि वह अच्छे और सच्चे प्रत्याशी के साथ हैं या दागी या बाहुबली के साथ।
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उन्होंने जनपद के कई ऐसे नेताओं की मिसालें पेश कीं जो 10-20 या 30 हजार रुपये में ही चुनाव लड़कर जीत लेते थे। गोष्ठी को बीएड विभागाध्यक्ष शिवाकांत त्रिपाठी, जिला एडीआर कोआर्डिनेटर सचिन चतुर्वेदी आदि ने भी संबोधित किया। संचालन डा.कुलदीप यादव ने किया। अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू, अंकित मेहरोत्रा आदि उपस्थित रहे।
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राजा देवी डिग्री कालेज सभागार में आयोजित गोष्ठी में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित हुए कि दागियों को राजनीति से हटाया जाए और सच्चे समाजसेवियों को लाया जाए। उन्हें वेतन, भत्ते, पेंशन और निधियों से कोई मतलब नहीं होना चाहिए। जब कोई आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा तो दागी अपने आप चुनाव से बाहर हो जाएंगे।
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एक अन्य पारित प्रस्ताव में कहा गया कि मतदान में अगर नोट जीते तो उस क्षेत्र में दोबारा चुनाव हों। गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डा.संतोष तिवारी ने कहा कि बेहतर प्रत्याशियों के लिए नोटा बेहतर विकल्प है। एडीआर प्रदेश कोर कमेटी सदस्य अधिवक्ता आनंद सिन्हा ने कहा कि युवाओं को तय करना होगा कि वह अच्छे और सच्चे प्रत्याशी के साथ हैं या दागी या बाहुबली के साथ।
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उन्होंने जनपद के कई ऐसे नेताओं की मिसालें पेश कीं जो 10-20 या 30 हजार रुपये में ही चुनाव लड़कर जीत लेते थे। गोष्ठी को बीएड विभागाध्यक्ष शिवाकांत त्रिपाठी, जिला एडीआर कोआर्डिनेटर सचिन चतुर्वेदी आदि ने भी संबोधित किया। संचालन डा.कुलदीप यादव ने किया। अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू, अंकित मेहरोत्रा आदि उपस्थित रहे।