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लिपिक से रिश्वत ले रहे रोडवेज आरएम रंगेहाथ गिरफ्तार

Tue, 24 Nov 2020 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Nov 2020 11:54 PM IST
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Roadways RM Rangarath arrested for bribing clerk
एंटी करप्शन टीम द्वारा पकड़े गए रोडवेज आरएम संजीव अग्रवाल (मध्य में)। लिपिक से रिश्वत ले रहे रोडव? - फोटो : BANDA
बांदा। वेतन विसंगति दूर करने के लिए अपने अधीनस्थ वरिष्ठ लिपिक से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज, बांदा डिपो) के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार अग्रवाल को झांसी से आई भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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वरिष्ठ लिपिक रमेश कुमार वर्मा (जमुनिहा पुरवा, बांदा) डिपो में तैनात हैं। उन्होंने 14 सितंबर को शासन और उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी कि उसके वेतन में सालों से चली आ रही विसंगति को ठीक करने के लिए बांदा डिपो के आरएम संजीव कुमार अग्रवाल 10 हजार रुपये मांग रहे हैं। इस पर शासन ने झांसी एंटी करप्शन टीम कार्यालय भेजी। टीम ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर इस संबंध में जानकारी दी।
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साथ ही स्थानीय साक्षी को नियुक्त करने का अनुरोध किया। डीएम के निर्देश पर कलक्ट्रेट के न्याय सहायक लिपिक दिनेश श्रीवास और कनिष्ठ सहायक प्रदीप निगम को साथ लेकर टीम इंसपेक्टर सुरेंद्र सिंह व प्रेमकुमार के नेतृत्व में दोपहर करीब दो बजे रोडवेज पहुंची। दोपहर में आरएम को गिरफ्तार कर लिया गया। एंटी करप्शन टीम में उप निरीक्षक मोहम्मद इसरार, हेड कांस्टेबल राजबहादुर सिंह, क्रांति कुमार पांडेय, महिला हेड कांस्टेबल बीना सिंह और निरंजन सिंह शामिल थे।
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इसके बाद दोपहर करीब दो बजे योजना के तहत वरिष्ठ लिपिक ने क्षेत्रीय प्रबंधक को उनके कक्ष में जाकर 10 हजार रुपये सौंपे। इसी बीच एंटी करप्शन टीम ने उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया। वहां से कोतवाली ले जाकर देर शाम तक औपचारिकता पूरी कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई। टीम आरोपी आरएम को साथ ले जाकर लखनऊ स्थित कोर्ट में पेश करेगी।

उधर, आरएम कार्यालय में घूसखोरी में रंगेहाथ पकड़े जाने की यह दूसरी घटना है। इसके पूर्व इसी कार्यालय के लिपिक को करीब दो वर्ष पूर्व 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया था। कंडक्टर, ड्राइवर की संविदा भर्ती हो या फिर मेडिकल किट खरीद और जनरेटर तेल घोटाला सभी में आरएम कार्यालय चर्चा में रहा है। हालांकि इस कार्यालय के कई कर्मियों का कहना है कि निगम के स्थानीय कई अनुभागों में भी ड्राइवर और कंडक्टर तथा अन्य कर्मियों से उनके कार्यों के लिए उगाही की जाती है।
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