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चूहे खा-पी गए आयुर्वेदिक चमनप्राश और तेल
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बांदा। एक तरफ बांदा और चित्रकूट के आयुुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं का टोटा है तो दूसरी तरफ मंडल मुख्यालय के स्टोर में रखीं चार लाख रुपये की दवाएं बर्बाद हो गईं। इसमें आयुर्वेदिक च्यवनप्राश और तेल चूहे खा पी गए। अधिकतर दवाएं एक्सपायर हो गई हैं। लाखों रुपये की दवाओं की बर्बादी अफसरों की लापरवाही से हुई है।
बांदा शहर की मंडी समिति परिसर में 15 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। वर्ष 2019 में भरतकूप अस्पताल के लिए जैम पोर्टल से करीब चार लाख रुपये से खरीदी गईं आयुर्वेदिक दवाएं यहां के स्टोर में रखवा दी गई थीं। इसके बाद से ये दवाएं न तो इस अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए आवंटित की गईं और न ही अन्य अस्पतालों के लिए। इसके चलते आयुर्वेदिक दवाएं खराब हो गईं हैं।
आलम यह है कि यहां रखा च्यवनप्राश और घुटने के इलाज का तेल चूहे खा-पी गए। पैकेट आदि फटने से पाउडर जमीन की धूल में मिल गया। लाखों रुपये की दवाएं अनदेखी व लापरवाही से बर्बाद होती रहीं और किसी ने भी इसे खराब होने से बचाने की कोशिश नहीं की, जबकि दोनों में संचालित 35 अस्पतालों में दवाओं का टोटा है।
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भरतकूप अस्पताल की रखीं दवाओं को उठवाने के लिए कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन कोई दवा लेने नहीं आया। पिछले वर्ष से अप्रैल 2022 तक पांच बार क्षेत्रीय अधिकारी (आयुर्वेद एवं यूनानी) को पत्र भेजा कि दवाएं खराब हो रही हैं। इन दवाओं के इस्तेमाल की मंजूरी दी जाए, लेकिन अनुमति नहीं मिली। डीएम को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। -डॉ. नीरज सोनी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, बांदा।
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बांदा शहर की मंडी समिति परिसर में 15 बेड का राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। वर्ष 2019 में भरतकूप अस्पताल के लिए जैम पोर्टल से करीब चार लाख रुपये से खरीदी गईं आयुर्वेदिक दवाएं यहां के स्टोर में रखवा दी गई थीं। इसके बाद से ये दवाएं न तो इस अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए आवंटित की गईं और न ही अन्य अस्पतालों के लिए। इसके चलते आयुर्वेदिक दवाएं खराब हो गईं हैं।
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आलम यह है कि यहां रखा च्यवनप्राश और घुटने के इलाज का तेल चूहे खा-पी गए। पैकेट आदि फटने से पाउडर जमीन की धूल में मिल गया। लाखों रुपये की दवाएं अनदेखी व लापरवाही से बर्बाद होती रहीं और किसी ने भी इसे खराब होने से बचाने की कोशिश नहीं की, जबकि दोनों में संचालित 35 अस्पतालों में दवाओं का टोटा है।
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भरतकूप अस्पताल की रखीं दवाओं को उठवाने के लिए कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन कोई दवा लेने नहीं आया। पिछले वर्ष से अप्रैल 2022 तक पांच बार क्षेत्रीय अधिकारी (आयुर्वेद एवं यूनानी) को पत्र भेजा कि दवाएं खराब हो रही हैं। इन दवाओं के इस्तेमाल की मंजूरी दी जाए, लेकिन अनुमति नहीं मिली। डीएम को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। -डॉ. नीरज सोनी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, बांदा।