{"_id":"5797a19c4f1c1b356421ef4b","slug":"rain-swept-in-the-first-ten-chekdam-rpte","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बारिश में ही बह गए दस चेकडैम-रपटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बारिश में ही बह गए दस चेकडैम-रपटे
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:15 PM IST
विज्ञापन
उधौपुरवा में बनाया गया रपटा पहली बारिश में ही बह गया।
- फोटो : अमर उजाला
बदौसा (बांदा)। दो जिलों बांदा और चित्रकूट के दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में बनाए गए दस चेकडैम और रपटे पहली बारिश ही न झेल सके। इनमें कुछ बह गए तो ढह गए। इनके निर्माण के समय डकैतों ने खूब चौथ वसूली। ठेकेदारों ने घटिया सामग्री लगाकर इसकी भरपाई की। नतीजे में ये चेकडैम-रपटे पिछले 15 दिनों की जोरदारी बारिश में धराशायी हो गए। इनकी लागत दो अरब से भी ज्यादा बताई गई है। बांदा में दस्यु प्रभावित फतेहगंज थाना क्षेत्र में बीहड़ को खेतों में तब्दील करने के लिए बारिश का पानी रोकने की खातिर चेकडैम और नालों आदि पर रपटे बनाने की योजना लागू हुई थी।
विज्ञापन
महादेवन रसिन गांव में बानगंगा नदी पर करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से रपटा बनाया गया। तमरार गांव के पास लगभग 75 लाख की लागत से रपटे का निर्माण हुआ। इसी जगह चेकडैम भी बनाया गया। इसकी लागत तकरीबन 42 लाख रुपये बताई गई है। इनका निर्माण तो वर्ष 2007-08 में शुरू हो गया था लेकिन दो साल पहले बनकर तैयार हो सके। 17 दिसंबर 2014 को रपटा और चेकडैम निर्माण के दौरान बलखड़िया गैंग ने धावा बोलकर वहां काम कर रहे मजदूरों और ठेकेदार के मेठ को मारपीटकर काम बंद करा दिया था। धमकी दी थी कि कमीशन मिलने पर काम होने देगा। ठेकेदार रमाकांत त्रिपाठी और बब्बू भइया ने कर्वी कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस बारे में ठेकेदार, कार्यदाई संस्था और पुलिस या प्रशासन भले ही डकैतों को कमीशन देने से इनकार करते रहे हों लेकिन हकीकत यही है कि काम तभी आगे बढ़ा जब दस्यु सरगनाआें को उनका कमीशन पहुंचा दिया गया। पिछले सालों नाममात्र को बारिश हुई। अबकी बारिश के तेवर तीखे हैं। नतीजे में नाले, नदियां उफना पड़े हैं। ऐसे में कमीशनबाजी के बीच बनाए गए चेकडैम और रपटे बह गए। कड़ैली नदी में डायवर्जन पर बना रपटा और इसी जमीन पर बने बंधे में भी कटान हो गई है।
विज्ञापन