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ऊंचे दामों पर खरीदे उपकरण, प्रधानों पर भुगतान का दबाव

Thu, 10 Sep 2020 11:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:31 PM IST
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Purchased equipment at high prices, payment pressure on princes
ग्राम पंचायतों को दिया गया सामान खरीद का बिल। - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलकर कुछ अफसरों ने उपकरणों की खरीद में ‘खेल’ कर दिया। शासन से तय मूल्य से दोगुनी कीमत पर निजी फर्मों से थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर उपकरण खरीद डाले।
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शासन से निर्धारित मूल्य के मुताबिक जिले की 470 ग्राम पंचायतों में 13.16 लाख के उपकरण खरीदे जाने थे, लेकिन यहां इन उपकरणों की खरीद पर 25.38 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। ज्यादा कीमत में उपकरणों की खरीद पंचायती राज विभाग के गले की फांस बन सकती है।
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उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (पंचायती राज) मनोज कुमार सिंह ने जुलाई में पत्र जारी कर ग्राम निधि/राज्य वित्त व केंद्र वित्त मद से ग्राम पंचायतों को थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने के निर्देश दिए थे। दोनों की कीमत 2800 रुपये तय की थी।
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थर्मल स्कैनर का मूल्य 1600 और पल्स ऑक्सीमीटर की दर 1200 रुपये थी। दोनों उपकरणों की खरीद खुद ग्राम पंचायतों को करनी थी, लेकिन विभागीय अफसरों ने फर्म से महंगी दर पर उपकरण खरीदकर ग्राम पंचायतों को सौंप दिए। भुगतान के लिए ग्राम पंचायत सचिवों को बिल और खाता नंबर थमा दिए गए। प्रधानों पर भुगतान का दबाव बनाया जाने लगा।
शासन से तय मूल्य के बजाय उपकरण 5400 रुपये में खरीदे गए। यह खुलासा फर्मों द्वारा दिए गए बिल बाउचर में रेट से हुआ। इसमें थर्मल स्कैनर की कीमत 3200 रुपये और पल्स ऑक्सीमीटर की दर 2200 रुपये है। प्रधानों ने इन उपकरणों को ग्राम पंचायत निगरानी समिति को सौंप दिए। कुछ ग्राम पंचायतों ने भुगतान भी कर दिया।
बिना टेंडर और कोटेशन हो गई लाखों की खरीद
डीपीआरओ खुद बताते हैं कि एक लाख रुपये से ऊपर की खरीद टेंडर के माध्यम से होती है। 20 हजार से एक लाख तक की खरीद कोटेशन से की जाती है।
उधर, 25.38 लाख रुपये की खरीद में टेंडर अथवा कोटेशन की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इस बाबत डीपीआरओ का कहना है कि 4000 रुपये तक की खरीद में उक्त दोनों प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं होती।
किट पर खर्च किए 19.27 लाख रुपये
थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के अलावा मास्क, सैनिटाइजर और सुरक्षा किट (कुल 4100 रुपये कीमत) की भी खरीद की गई। इनके भुगतान अलग होने हैं।
हालांकि इनकी खरीद महिला समूहों से की गई। ग्राम पंचायतों को दिए गए बिल के मुताबिक 20 रुपये की दर से 100 मास्क (कुल 2000 रुपये) खरीदे गए। इसी तरह पांच लीटर सैनिटाइजर 1500 रुपये और एक सुरक्षा किट 600 रुपये में खरीदी गई। जिले की कुल 470 ग्राम पंचायतों में किट पर लगभग 19,27,000 रुपये खर्च हो गए।

कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में रेट अलग थे। क्वालिटी पर भी कीमत निर्भर करती है। अधिक कीमत में उपकरणों की खरीद मेरे संज्ञान में नहीं है। जांच कराकर बाजार से उपकरणों के दामों का सत्यापन कराएंगे। निर्धारित मूल्य से ज्यादा दाम होने पर कार्रवाई की जाएगी। -संजय कुमार यादव
जिला पंचायत राज अधिकारी, बांदा।

डीपीआरओ संजय यादव।

डीपीआरओ संजय यादव।- फोटो : BANDA

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