{"_id":"a4a151e8747028a42f1de1c8ba79648b","slug":"pot-method-may-wasteland-green-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मटका विधि से बंजर भूमि हो सकती है हरी-भरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मटका विधि से बंजर भूमि हो सकती है हरी-भरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 23 Feb 2015 11:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानी के संकट से त्रस्त बुंदेलखंड की बंजर भूमि की
विज्ञापन
सिंचाई के लिए नई तरकीब खोजकर उसका मॉडल प्रदर्शित करने पर अतर्रा
महाविद्यालय कृषि संकाय के डॉ. एमएच खान को सम्मानित किया गया है। इसमें कई
कृषि छात्रों की भी सहभागिता रही।
डॉ. खान के नेतृत्व में ‘बुंदेलखंड की बंजर भूमि में मृदा एवं जल संरक्षण (मटका विधि) तकनीक से कृषि, वानिकी, उद्यानिकी का विकास’ विषय पर मॉडल तैयार किया गया है।
चित्रकूट में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले के किसान मेला में प्रदर्शित यह मॉडल आकर्षण का केंद्र रहा। सभी ने इसे सराहा। चित्रकूट डीएम नीलम अहलावत ने इस मॉडल को प्रथम पुरस्कार दिया। डॉ. खान को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
यह मॉडल तैयार करने मेें बीएससी कृषि के छात्र अखिलेश कुमार सेन, उमेश श्रीवास्तव, बृज बिहारी शुक्ला, मनीष पांडेय, मनोज कुमार और प्रागेंद्र गर्ग की सहभागिता रही।
मॉडल के बारे में डॉ. खान ने बताया कि इस विधि से बुंदेलखंड की बंजर भूमि की सिंचाई कर उपजाऊ बनाया जा सकता है। बरसात के पानी को खेत के किसी उचित स्थान पर संरक्षित करके विषम परिस्थितियाें वाले गर्मियों के दिन में इस पानी से सिंचाई की जा सकती है।
इसके लिए एक मटके में नीचे छोटा सूराख (छिद्र) करके उससे सुतली बांधकर पौधे की जड़ तक सुतली पहुंचा दी जाए। मटके में भरा पानी सुतली के सहारे पौधे की जड़ तक धीरे-धीरे पहुंचता रहेगा और नमी बनी रहेगी।
डॉ. खान के नेतृत्व में ‘बुंदेलखंड की बंजर भूमि में मृदा एवं जल संरक्षण (मटका विधि) तकनीक से कृषि, वानिकी, उद्यानिकी का विकास’ विषय पर मॉडल तैयार किया गया है।
चित्रकूट में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले के किसान मेला में प्रदर्शित यह मॉडल आकर्षण का केंद्र रहा। सभी ने इसे सराहा। चित्रकूट डीएम नीलम अहलावत ने इस मॉडल को प्रथम पुरस्कार दिया। डॉ. खान को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
यह मॉडल तैयार करने मेें बीएससी कृषि के छात्र अखिलेश कुमार सेन, उमेश श्रीवास्तव, बृज बिहारी शुक्ला, मनीष पांडेय, मनोज कुमार और प्रागेंद्र गर्ग की सहभागिता रही।
मॉडल के बारे में डॉ. खान ने बताया कि इस विधि से बुंदेलखंड की बंजर भूमि की सिंचाई कर उपजाऊ बनाया जा सकता है। बरसात के पानी को खेत के किसी उचित स्थान पर संरक्षित करके विषम परिस्थितियाें वाले गर्मियों के दिन में इस पानी से सिंचाई की जा सकती है।
इसके लिए एक मटके में नीचे छोटा सूराख (छिद्र) करके उससे सुतली बांधकर पौधे की जड़ तक सुतली पहुंचा दी जाए। मटके में भरा पानी सुतली के सहारे पौधे की जड़ तक धीरे-धीरे पहुंचता रहेगा और नमी बनी रहेगी।