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महाकुंभ के निकाले जाने ले सियासी मायने

Sun, 19 Dec 2021 12:16 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 12:16 AM IST
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Political meaning for the removal of Mahakumbh
बांदा। चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़...। श्रीराम की 14 वर्ष की वनवास यात्रा का पड़ाव रहे चित्रकूट में 14 दिसंबर हुए को हिंदू एकता महाकुंभ में संतों के जमघट के सियासी मतलब भी निकाले जा रहे हैं। महाकुंभ का एजेंडा भले ही राजनीति से परे रहा लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसे विधानसभा चुनाव के पूर्व भाजपा के लिए माहौल बनाने में मददगार माना जा रहा है। भाजपा भी शायद ही इसे भुनाने में चूक करे। संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति ने महाकुंभ का महत्व और बढ़ा दिया। महाकुंभ के बाद साधू-संतों का सरकार पर दबाव भी बढ़ा है।
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इसी वर्ष जुलाई में धर्मनगरी चित्रकूट में राष्ट्रीय स्वयं सेवक का तीन दिवसीय मंथन शिविर हुआ था। संघ नेतृत्व ने देश-प्रदेश की सरकारों और संगठनों को कुछ दिशा-निर्देश दिए थे। अपने एजेंडे पर भी मंथन किया था। इसके पांच माह बाद चित्रकूट में हिंदू एकता महाकुंभ आयोजित किया गया। मेजबानी और अगुवाई जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने की। हिंदू एकता, मठ-मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के दुष्परिणाम, जनसंख्या नियंत्रण कानून, गोरक्षा और राष्ट्रवाद समेत 12 बिंदु महाकुंभ के एजेंडे में थे। संत वक्ताओं ने ज्यादातर इन्हीं बिंदुओं पर संबोधन दिया।
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महाकुंभ में संतों का एक नजरिया शायद सरकार और सत्ता को नागवार गुजरा हो। वह यह कि संतों ने मठ-मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का खुलकर विरोध किया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामदास ने तो यह तक कह डाला कि सरकार मालदार मंदिरों पर कब्जा कर रही है। जबकि सिर्फ चित्रकूट में ही करीब पांच सैकड़ा मंदिर में दीप तक नहीं जलते।
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भव्य महाकुंभ आयोजन से सरकार पर साधु-संतों का दबाव बढ़ा है। केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारें साधु-संतों को साधकर अपना चुनावी एजेंडा मजबूत कर सकती हैं। दूसरी तरफ साधु-संत भी सत्ता से कुछ हित साधने में सफल हो सकते हैं।

महाकुंभ का खास हिस्सा रहा संघ प्रमुख का भाषण
महाकुंभ में कुछ साधु-संतों के तेवर कई मुद्दों पर भले ही तीखे रहे पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बात ‘सबका साथ’ वाली रही। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि बिना किसी को डराए-सताए, सबको अपना मानकर काम करना है। घर वापसी प्यार से करानी है। भागवत ने कहा कि भय ज्यादा दिन नहीं चलता। संघ प्रमुख यह सधा हुआ भाषण महाकुंभ का खास हिस्सा रहा।
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