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फट्टी पर सोकर किसान का बेटा बना पुलिस का ‘राजा’

Tue, 11 Aug 2020 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 11:33 PM IST
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phattee par sokar kisaan ka beta bana pulis ka raaja
आईपीएस राजा बाबू सिंह। - फोटो : BANDA
बांदा। माता-पिता अक्सर अपने बेटे-बेटियों को जीवन सफल बनाने की प्रेरणा में कहा करते हैं कि ‘राजा बाबू’ बनो। बुंदेलखंड में बांदा जनपद के अति पिछडे़ गांव पचनेही में साधारण किसान ने अपने बेटे का नाम ही राजा बाबू रख दिया। बेहद विषम परिस्थितियों और दुश्वारियों के बीच किसान का यह बेटा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है। चने बेचकर और टाट फट्टी पर सो कर किसान का बेटा आईपीएस अफसर बन गया। मौजूदा समय वह मध्य प्रदेश में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) हैं।
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राजा बाबू सिंह बताते हैं कि बचपन में सिर से माता-पिता का साया उठ गया। घर में पढ़ने लिखने की परंपरा नहीं थी। पूर्वज सिर्फ खेती किसानी तक ही सीमित रहे। उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा गांव में हासिल की। यहां के बाद झांसी में हास्टल में रहकर पढ़ाई की। वह बताते हैं कि छुट्टियों में गांव आते थे। बुंदेलखंड एक्सप्रेस रात में बांदा आती थी। गांव जाने का कोई साधन नहीं होता था। वह स्टेशन के नजदीक पान दुकानदार से टाट फट्टी मांग कर धर्मशाला में बिछा कर सो जाते थे। सुबह प्राइवेट बस स्टैंड जाकर गांव के लिए बस पकड़ते थे। गांव से दो किलोमीटर दूर बस से उतर कर पैदल जाते थे।
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राजा बाबू बताते हैं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 1985 में बीए में दाखिल लिया। पढ़ाई के खर्च के जुगाड़ की बानगी बयां करते हुए बताया कि कि गांव से दो बोरा चना तांगे पर रखकर बांदा लाते थे। उसे बेचकर पढ़ाई को पैसा ले जाते थे। एक बार बारिश में गांव के रास्ते में नाला उफना रहा था। छोटे भाई दिनेश व जितेंद्र के साथ तीनों लोगों ने सिर पर 35-35 किलो चने की बोरी रखकर छाती तक डूब कर नाला पार किया। बस अड्डे पर दोनों भाई उन्हें बस में बैठाकर गांव ले गए। यह चने उन्होंने बांदा शहर के कैथी बाजार में बेचे। इसके बाद इलाहाबाद पढ़ने चले गए। एमए के बाद यूजीसी की रिसर्च फेलोशिप परीक्षा पास की। कभी कोचिंग ज्वाइन नहीं की। केवल वरिष्ठ छात्रों का मार्गदर्शन लिया। तीसरे प्रयास में वह सफल हुए। आईपीएस ज्वाइन करने का काल लेटर मिल गया।
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विषम परिस्थितियों में भी जीत हासिल कर दिखाएं
बांदा। मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस और अपर पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने युवा दिवस पर कहा कि अगर आपको परिस्थितियों ने हरा दिया तो आपकी बहादुरी कहां रह गई? विषम परिस्थितियों में भी जीत हासिल करके दिखाओ। तभी तो बात है। ‘राजा बाबू बनकर दिखाओ’।
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