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Banda News: लेखपालों की हड़ताल से अटके नौ हजार से अधिक प्रमाणपत्र
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फोटो-11-सदर तहसील में हड़ताल पर बैठे लेखपाल।
बांदा। लेखपालों के कार्य बहिष्कार से जिले में राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने लगा है। सबसे ज्यादा असर आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर पड़ा है।
जिले की पांचों तहसीलों में 9,444 आय, जाति, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित हैं। रिपोर्ट नहीं लगने से लोग तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। छात्रों को छात्रवृत्ति और नौकरी के आवेदन के लिए जरूरी प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर शनिवार को लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया और तहसीलों में धरना-प्रदर्शन किया। लेखपालों ने आठ सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपे। इनमें 2800 ग्रेड पे, वेतन विसंगति दूर करने, अंतर मंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति, भत्ते बढ़ाने और लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने समेत अन्य मांगें शामिल हैं।
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नरैनी में लेखपालों के कार्य बहिष्कार से प्रमाणपत्रों पर रिपोर्ट लगाने का काम प्रभावित रहा। अतर्रा में तहसीलदार महेंद्र कुमार तिवारी ने करीब 250 आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र लंबित होने की जानकारी दी। बबेरू में लेखपालों ने एसडीएम अवनीश त्यागी को ज्ञापन सौंपा। पैलानी में भी लेखपालों ने सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक धरना दिया। सदर तहसील में अध्यक्ष दीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार किया गया।
अतर्रा क्षेत्र के चंद्रायाल गांव निवासी छात्र श्यामबाबू गिरी ने बताया कि जाति प्रमाणपत्र के लिए 15 दिन में दो बार आवेदन करने के बाद भी तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बाघा गांव के किसान रामसजीवन नामदेव ने बताया कि उनकी बेटी का जाति प्रमाणपत्र शिक्षक भर्ती में लगना है, लेकिन एक सप्ताह से परेशानी हो रही है।
वहीं, लेखपाल संघ का कहना है कि मांगों के समाधान के लिए आंदोलन जारी रहेगा। अतर्रा में संघ ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 17 अक्तूबर से संपूर्ण कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। नरैनी में आठ अक्तूबर से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार और शासकीय व्हाट्सएप समूह छोड़ने का निर्णय लिया गया है।
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सबसे ज्यादा आय प्रमाणपत्र लंबित
जिले में आय प्रमाणपत्र के 4,670, जाति के 2,322, निवास के 2,282 और ईडब्ल्यूएस के 170 आवेदन लंबित हैं। आय प्रमाणपत्र छात्रवृत्ति समेत कई योजनाओं में जरूरी है। जाति और निवास प्रमाणपत्र नौकरी व शैक्षिक प्रक्रियाओं में मांगे जाते हैं। ऐसे में रिपोर्ट न लगने से आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है।
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पैमाइश और कुरा बंटवारे के मुकदमे भी प्रभावित
लेखपालों के न्यायालयों में नहीं पहुंचने और रिपोर्ट नहीं देने से जमीन की पैमाइश और कुरा बंटवारे से जुड़े मुकदमों की कार्रवाई भी प्रभावित है। रिपोर्ट के अभाव में इन मामलों में अगली कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। ग्रामीणों को तारीख मिलने के बावजूद निस्तारण के लिए लेखपाल की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ रहा है।
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हड़ताल से समाधान दिवस में बढ़ीं फरियादियों की मुश्किलें
बांदा। लेखपालों के कार्य बहिष्कार के बीच शनिवार को जिले की तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित किए गए। यहां फरियादियों को समस्याओं के निस्तारण के लिए अफसरों के चक्कर लगाने पड़े।
राजस्व विभाग से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रही, लेकिन लेखपालों की हड़ताल के चलते कई मामलों में मौके पर कार्रवाई के बजाय जांच और रिपोर्ट के लिए टीमें गठित करनी पड़ीं। इससे फरियादियों की परेशानी साफ नजर आई।
तहसील सभागार पैलानी में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समाधान दिवस में 85 शिकायतें आईं। मौके पर छह का निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों में जांच के लिए टीमें गठित की गईं। अमलोर गांव के करीब 50 ग्रामीणों ने पेयजल संकट को लेकर प्रार्थनापत्र दिया।
महेश शर्मा, रामावतार और पप्पू सिंह समेत ग्रामीणों ने बंद पड़ी पुरानी पानी की टंकी और बोरिंग को दोबारा चालू कराने तथा जल जीवन मिशन के तहत मिल रहे दूषित पानी की समस्या दूर कराने की मांग की। पिपरहरी निवासी राजाराम सिंह ने नालियां साफ न होने से फैली गंदगी की शिकायत की।
वहीं, बबेरू में एसडीएम अवनीश त्यागी के पास 74 शिकायतें पहुंचीं। इनमें महज आठ का मौके पर निस्तारण हो सका। सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित रहीं। इस दौरान सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी, तहसीलदार राधेश्याम सिंह, नायब तहसीलदार राहुल गौरव, कोतवाली प्रभारी संजय द्विवेदी, विद्युत एसडीओ एजाज रसूल और बीडीओ अभिषेक चौधरी मौजूद रहे। (संवाद)
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जिले की पांचों तहसीलों में 9,444 आय, जाति, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के आवेदन लंबित हैं। रिपोर्ट नहीं लगने से लोग तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। छात्रों को छात्रवृत्ति और नौकरी के आवेदन के लिए जरूरी प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर शनिवार को लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया और तहसीलों में धरना-प्रदर्शन किया। लेखपालों ने आठ सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपे। इनमें 2800 ग्रेड पे, वेतन विसंगति दूर करने, अंतर मंडलीय स्थानांतरण, पदोन्नति, भत्ते बढ़ाने और लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित करने समेत अन्य मांगें शामिल हैं।
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नरैनी में लेखपालों के कार्य बहिष्कार से प्रमाणपत्रों पर रिपोर्ट लगाने का काम प्रभावित रहा। अतर्रा में तहसीलदार महेंद्र कुमार तिवारी ने करीब 250 आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र लंबित होने की जानकारी दी। बबेरू में लेखपालों ने एसडीएम अवनीश त्यागी को ज्ञापन सौंपा। पैलानी में भी लेखपालों ने सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक धरना दिया। सदर तहसील में अध्यक्ष दीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार किया गया।
अतर्रा क्षेत्र के चंद्रायाल गांव निवासी छात्र श्यामबाबू गिरी ने बताया कि जाति प्रमाणपत्र के लिए 15 दिन में दो बार आवेदन करने के बाद भी तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बाघा गांव के किसान रामसजीवन नामदेव ने बताया कि उनकी बेटी का जाति प्रमाणपत्र शिक्षक भर्ती में लगना है, लेकिन एक सप्ताह से परेशानी हो रही है।
वहीं, लेखपाल संघ का कहना है कि मांगों के समाधान के लिए आंदोलन जारी रहेगा। अतर्रा में संघ ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर 17 अक्तूबर से संपूर्ण कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। नरैनी में आठ अक्तूबर से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार और शासकीय व्हाट्सएप समूह छोड़ने का निर्णय लिया गया है।
सबसे ज्यादा आय प्रमाणपत्र लंबित
जिले में आय प्रमाणपत्र के 4,670, जाति के 2,322, निवास के 2,282 और ईडब्ल्यूएस के 170 आवेदन लंबित हैं। आय प्रमाणपत्र छात्रवृत्ति समेत कई योजनाओं में जरूरी है। जाति और निवास प्रमाणपत्र नौकरी व शैक्षिक प्रक्रियाओं में मांगे जाते हैं। ऐसे में रिपोर्ट न लगने से आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है।
पैमाइश और कुरा बंटवारे के मुकदमे भी प्रभावित
लेखपालों के न्यायालयों में नहीं पहुंचने और रिपोर्ट नहीं देने से जमीन की पैमाइश और कुरा बंटवारे से जुड़े मुकदमों की कार्रवाई भी प्रभावित है। रिपोर्ट के अभाव में इन मामलों में अगली कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। ग्रामीणों को तारीख मिलने के बावजूद निस्तारण के लिए लेखपाल की रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ रहा है।
हड़ताल से समाधान दिवस में बढ़ीं फरियादियों की मुश्किलें
बांदा। लेखपालों के कार्य बहिष्कार के बीच शनिवार को जिले की तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित किए गए। यहां फरियादियों को समस्याओं के निस्तारण के लिए अफसरों के चक्कर लगाने पड़े।
राजस्व विभाग से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रही, लेकिन लेखपालों की हड़ताल के चलते कई मामलों में मौके पर कार्रवाई के बजाय जांच और रिपोर्ट के लिए टीमें गठित करनी पड़ीं। इससे फरियादियों की परेशानी साफ नजर आई।
तहसील सभागार पैलानी में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समाधान दिवस में 85 शिकायतें आईं। मौके पर छह का निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों में जांच के लिए टीमें गठित की गईं। अमलोर गांव के करीब 50 ग्रामीणों ने पेयजल संकट को लेकर प्रार्थनापत्र दिया।
महेश शर्मा, रामावतार और पप्पू सिंह समेत ग्रामीणों ने बंद पड़ी पुरानी पानी की टंकी और बोरिंग को दोबारा चालू कराने तथा जल जीवन मिशन के तहत मिल रहे दूषित पानी की समस्या दूर कराने की मांग की। पिपरहरी निवासी राजाराम सिंह ने नालियां साफ न होने से फैली गंदगी की शिकायत की।
वहीं, बबेरू में एसडीएम अवनीश त्यागी के पास 74 शिकायतें पहुंचीं। इनमें महज आठ का मौके पर निस्तारण हो सका। सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित रहीं। इस दौरान सीओ कृष्णकांत त्रिपाठी, तहसीलदार राधेश्याम सिंह, नायब तहसीलदार राहुल गौरव, कोतवाली प्रभारी संजय द्विवेदी, विद्युत एसडीओ एजाज रसूल और बीडीओ अभिषेक चौधरी मौजूद रहे। (संवाद)

फोटो-11-सदर तहसील में हड़ताल पर बैठे लेखपाल।

फोटो-11-सदर तहसील में हड़ताल पर बैठे लेखपाल।

फोटो-11-सदर तहसील में हड़ताल पर बैठे लेखपाल।

फोटो-11-सदर तहसील में हड़ताल पर बैठे लेखपाल।