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राष्ट्रीय स्वराज पैंथर ने दोहरी शिक्षा पद्धति पर विरोध जताया
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:39 PM IST
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धरने को संबोधित करते राष्ट्रीय अध्यक्ष मुन्नालाल दिनकर।
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय स्वराज पैंथर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। मिडडे मील बंद करने और गरीबों के बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय की मांग की।
सोमवार को अंबेडकर पार्क में आयोजित सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुन्नालाल दिनकर ने कहा कि प्राचीन काल में हमारा देश दुनिया भर के लिए शिक्षा का केंद्र माना जाता है। तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालय इसके उदाहरण हैं। आजादी के बाद लोकतांत्रिक सरकारों ने शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया। प्राथमिक शिक्षा का सबसे बुरा हाल है। मिडडेमील लागू होने के बाद यह और चौपट हो गई। इन स्कूलों में ज्यादातर गरीब बच्चे पढ़ते हैं।
सभा के बाद जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में मिडडे मील बंद करने, गरीबों व ईंट-भट्ठा में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने, दोहरी शिक्षा व्यवस्था समाप्त करने की मांग शामिल है। राष्ट्रीय महासचिव राजबहादुर सिंह कुशवाहा, भोला प्रसाद वर्मा, केशपाल वर्मा, सुरेश वर्मा, केपी गौतम, धर्मराजयादव, बाबू खां, रामगोपाल वर्मा समेत तमाम कार्यकर्ता शामिल रहे। ब्यूरो
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सोमवार को अंबेडकर पार्क में आयोजित सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष मुन्नालाल दिनकर ने कहा कि प्राचीन काल में हमारा देश दुनिया भर के लिए शिक्षा का केंद्र माना जाता है। तक्षशिला व नालंदा विश्वविद्यालय इसके उदाहरण हैं। आजादी के बाद लोकतांत्रिक सरकारों ने शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया। प्राथमिक शिक्षा का सबसे बुरा हाल है। मिडडेमील लागू होने के बाद यह और चौपट हो गई। इन स्कूलों में ज्यादातर गरीब बच्चे पढ़ते हैं।
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सभा के बाद जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में मिडडे मील बंद करने, गरीबों व ईंट-भट्ठा में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने, दोहरी शिक्षा व्यवस्था समाप्त करने की मांग शामिल है। राष्ट्रीय महासचिव राजबहादुर सिंह कुशवाहा, भोला प्रसाद वर्मा, केशपाल वर्मा, सुरेश वर्मा, केपी गौतम, धर्मराजयादव, बाबू खां, रामगोपाल वर्मा समेत तमाम कार्यकर्ता शामिल रहे। ब्यूरो
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