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खुली पोल: 84 लाख खर्च, गंदगी जस की तस
Sun, 26 Nov 2023 01:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 26 Nov 2023 01:30 AM IST
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बांदा। डीएम जनपद के नगर व कस्बों में सफाई व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण कर रहीं हैं। जन-जन में स्वच्छ बांदा का नारा दे रहीं हैं। वहीं प्रति माह कर्मचारियों के वेतन व डीजल व कलई आदि में 84 लाख खर्च करने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था फ्लाप साबित हो रही है। शनिवार पड़ताल की गई तो शहर में स्वच्छता के दावों की पोल खुल गई। शहर के गली-मोहल्लों से मुख्य बाजारों में जगह-जगह पर कूड़े के ढ़ेर लगे मिले। कुछ स्थानों पर हालात यह थे कि रास्ते से निकलने वाले राहगीर गंदगी और अन्ना जानवरों के हमले के जोखिम के बीच गुजर रहे हैं। अक्सर खाने की तलाश में जुटे जानवरों के पलटवार से राहगीर घायल होते रहते है।
अवस्थी पुल रोड में बने कूडा स्थल में समय करीब 11 बजे कूडे का ढ़ेर लगा था। अन्ना पशु कूडे में खाने की तलाश में उसे इधर-उधर फैलाकर सडक़ तक ले आए थे। राजकीय बालिका इंटर कालेज के बगल में समय 12:45 बजे कई टै्रक्टर कूड़े का ढ़ेर लगा था। कूड़ा उठाया नहीं गया था। छात्राएं बदबू के कारण नाक दबाकर निकल रहीं थीं। इसी तरह मुख्य बाजार रामलीला मैदान के पास समय दोपहर-एक बजे कूड़े का ढ़ेर लगा था। बदबू के कारण दुकानों में ग्राहक तक नहीं रूक रहे थे। उफ! बड़ी गंदगी है कहकर आगे बढ़ जाते थे। वहीं, छत्रसाल जूनियर हाईस्कूल के पास कूड़े का अंबार लगा था। जानवर उसमें आराम फरमा रहे थे। बगल में बाथरूम बना है जो बुरी तरह से बदबू मार रहा था। गंदगी से दुकानदार व ग्राहक सभी परेशान थे।
नगर पालिका से 10 से 12 दिन में कूड़ा उठाने कर्मचारी आते है। कई बार कूड़े को प्रतिदिन उठवाने के लिए कहा गया । कोई ध्यान नहीं दिया।
योगेंद्र कुमार
रामलीला (दुकानदार)
कूड़ा तो उठाया जाता है लेकिन कभी-कभी दिन-दिनभर पड़ा रहता है। बाजार होने से सड़क़ पर पड़ा कूड़ा दिक्कत पैदा करता है।
परवेज अहमद
मर्दननाका (दुकानदार)
सफाई कर्मियों की स्थिति
स्थाई कर्मचारी-73
संविदा कर्मचारी-192
आउट सोर्सिंग-230
सफाई नायक-01
स्वच्छता के संसाधन
ट्रैक्टर छोटे-बड़े-6
लोडर छोटे-बड़े-7
कूड़ा ट्रक-6
जेसीबी-6
ट्रिपर गाड़ी-32
स्वच्छता में प्रतिमाह खर्च-
डीजल में-10 लाख
कलई/चूना में- 2 लाख
वेतन में -70 लाख
अन्य खर्च-2 लाख
नियमित कूड़े का उठान कराया जाता है। अक्सर इसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। कूड़ा उठान न होने की जानकारी मिलने पर कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बुद्धि प्रकाश
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका, बांदा
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अवस्थी पुल रोड में बने कूडा स्थल में समय करीब 11 बजे कूडे का ढ़ेर लगा था। अन्ना पशु कूडे में खाने की तलाश में उसे इधर-उधर फैलाकर सडक़ तक ले आए थे। राजकीय बालिका इंटर कालेज के बगल में समय 12:45 बजे कई टै्रक्टर कूड़े का ढ़ेर लगा था। कूड़ा उठाया नहीं गया था। छात्राएं बदबू के कारण नाक दबाकर निकल रहीं थीं। इसी तरह मुख्य बाजार रामलीला मैदान के पास समय दोपहर-एक बजे कूड़े का ढ़ेर लगा था। बदबू के कारण दुकानों में ग्राहक तक नहीं रूक रहे थे। उफ! बड़ी गंदगी है कहकर आगे बढ़ जाते थे। वहीं, छत्रसाल जूनियर हाईस्कूल के पास कूड़े का अंबार लगा था। जानवर उसमें आराम फरमा रहे थे। बगल में बाथरूम बना है जो बुरी तरह से बदबू मार रहा था। गंदगी से दुकानदार व ग्राहक सभी परेशान थे।
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नगर पालिका से 10 से 12 दिन में कूड़ा उठाने कर्मचारी आते है। कई बार कूड़े को प्रतिदिन उठवाने के लिए कहा गया । कोई ध्यान नहीं दिया।
योगेंद्र कुमार
रामलीला (दुकानदार)
कूड़ा तो उठाया जाता है लेकिन कभी-कभी दिन-दिनभर पड़ा रहता है। बाजार होने से सड़क़ पर पड़ा कूड़ा दिक्कत पैदा करता है।
परवेज अहमद
मर्दननाका (दुकानदार)
सफाई कर्मियों की स्थिति
स्थाई कर्मचारी-73
संविदा कर्मचारी-192
आउट सोर्सिंग-230
सफाई नायक-01
स्वच्छता के संसाधन
ट्रैक्टर छोटे-बड़े-6
लोडर छोटे-बड़े-7
कूड़ा ट्रक-6
जेसीबी-6
ट्रिपर गाड़ी-32
स्वच्छता में प्रतिमाह खर्च-
डीजल में-10 लाख
कलई/चूना में- 2 लाख
वेतन में -70 लाख
अन्य खर्च-2 लाख
नियमित कूड़े का उठान कराया जाता है। अक्सर इसका भौतिक सत्यापन किया जाता है। कूड़ा उठान न होने की जानकारी मिलने पर कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बुद्धि प्रकाश
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका, बांदा