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अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस में भी एलएचबी कोच
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बांदा। रेलवे ने चंबल एक्सप्रेस के बाद अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस को एलएचबी कोच (लिंक हाफमैन बुश) से लैस किया है। यह कोच जर्मन तकनीक से बना है। हादसा होने पर पलटने के आसार कम रहते हैं। इन कोच के बाद अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस की रफ्तार में 20 किलोमीटर प्रति घंटे की वृद्धि होगी।
रेलवे पुरानी तकनीक से बनी आईसीएफ (इंटग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों के बाद ट्रेनों में जर्मन तकनीक से बनी एलएचबी कोच लगा रहा है। पिछले दिनों चंबल एक्सप्रेस में यह कोच लगाए जा चुके हैं। 16 मई से बुंदेलखंड एक्सप्रेस भी एलएचबी कोच से चलेगी। ग्वालियर से वाराणसी के बीच चलने वाली इस ट्रेन से पहले दिन शुरूआत होगी। अगले दिन 17 मई को ग्वालियर की तरफ जाने वाली ट्रेन में भी यह कोच होंगे। उत्तर मध्य रेलवे के जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि ट्रेेन में कुल 20 कोच होंगे। नए कोच लगने के बाद ट्रेन की स्पीड में 20 किलोमीटर प्रति घंटा की बढ़ोत्तरी होगी।
यह कोच ज्यादातर हाई स्पीड ट्रेनों में इस्तेमाल किए जाते हैं। हादसा होने पर पलटते नहीं हैं। स्पेस अधिक होने से यात्री आराम से सीट पर बैठ व लेट सकते हैं।
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रेलवे पुरानी तकनीक से बनी आईसीएफ (इंटग्रल कोच फैक्ट्री) कोचों के बाद ट्रेनों में जर्मन तकनीक से बनी एलएचबी कोच लगा रहा है। पिछले दिनों चंबल एक्सप्रेस में यह कोच लगाए जा चुके हैं। 16 मई से बुंदेलखंड एक्सप्रेस भी एलएचबी कोच से चलेगी। ग्वालियर से वाराणसी के बीच चलने वाली इस ट्रेन से पहले दिन शुरूआत होगी। अगले दिन 17 मई को ग्वालियर की तरफ जाने वाली ट्रेन में भी यह कोच होंगे। उत्तर मध्य रेलवे के जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि ट्रेेन में कुल 20 कोच होंगे। नए कोच लगने के बाद ट्रेन की स्पीड में 20 किलोमीटर प्रति घंटा की बढ़ोत्तरी होगी।
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यह कोच ज्यादातर हाई स्पीड ट्रेनों में इस्तेमाल किए जाते हैं। हादसा होने पर पलटते नहीं हैं। स्पेस अधिक होने से यात्री आराम से सीट पर बैठ व लेट सकते हैं।
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