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आंगन से नदारद हुई ‘चीं-चीं...’
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 19 Mar 2015 11:38 PM IST
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गौरैया भटकती है,
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तलाश में आश्रय की।
पुराने पीपल पर
कौओं ने बसेरा कर लिया है
नए पर गिद्धों ने
वह कहाँ जाए।
कहां अपना घोसला बनाए
वह मुझसे पूछती है घर
कोई और विकल्प ढूंढ़ लो गौरैया
लोग अब घरों में
बिल्लियां पालने लगे हैं।
यह कविता सच हो गई है। गौरैया हमारे घरों से गायब हो चुकी है। कभी सुबह की नींद आंगन में चीं-चीं... का शोर करने वाली चिड़ियों से टूटती थी। बस्तियों के आसपास और घरों के पेड़ों में शाम होते ही अपना अड्डा जमाने के लिए गौरैयों में तेज चहचहाटे के साथ जमकर झगड़े होते थे, लेकिन यह लोगों को नागवार नहीं गुजरते थे।
आवाज तेज होने के बावजूद कर्कश नहीं होती थी, पर अब यह नजारे नदारद हैं। गौरैया के झुंड ढूंढे नहीं मिलते। यह तेजी से विलुप्त हो रही हैं इसीलिए अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में डाल दिया है।
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20 मार्च को हर वर्ष ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है। इसका मकसद इस नन्हें पक्षी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। पर्यावरणविदों के मुताबिक, मनुष्यों और आसपास के वातावरण से अपना अस्तित्व बचाने के लिए गौरैया इन दिनों संघर्ष कर रही है।
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उसकी तेजी से घटती संख्या के पीछे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ ही इनके भोजन और पानी की कमी भी है। उनके घोंसलों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बचे। गौरैया को अपने बच्चों की परवरिश भी दूभर हो रही है। बच्चों का भोजन शुरुआती 10-15 दिनों में सिर्फ कीड़े-मकौडे़ होता है, लेकिन घर से लेकर खेतों तक इस्तेमाल किए जा रहे रासायनिक पदार्थों से कीड़े-मकौडे़ भी नहीं रह गए।
गिद्ध और कौए के बाद अब गौरैया भी हमसे रूठने की कगार पर है। बुंदेलखंड के वन्यजीव कार्यकर्ता महर्षि कुमार तिवारी (राठ, हमीरपुर) का कहना है कि गौरैया की संख्या में 60 से 80 फीसदी तक कमी आई है। इसके संरक्षण की ठोस कोशिशें नहीं हुईं तो यह इतिहास में सिमट जाएगी और आने वाली पीढ़ियां इसे देखने को तरस जाएंगी।
ब्रिटेन की रायल सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स ने विश्व के अनुसंधान कर्ताओं के अध्ययनों के आधार पर गौरैया को ‘रेड लिस्ट’ में शामिल कर लिया है।
गौरैया की शादी और किसान संसद आज
शुक्रवार को नरैनी तहसील के मोहनपुर गांव में गौरैया चिड़िया का धूमधाम से विवाह होगा। साथ ही पर्यावरण किसान संसद लगेगी। जीवाें की समान हिस्से दारी की वकालत करने वाले स्वयंसेवी और किसान इसमें शामिल होंगे।
किसान संसद में केंद्र सरकार के किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण बिल, बुंदेलखंड में जल संसाधनों के अंधाधुंध दोहन, बेमौसम बारिश, जलवायु परिवर्तन आदि पर मंथन होगा। प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने बताया कि इस अवसर पर वन्यजीव विशेषज्ञ और वन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।