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Banda News: स्वाइन फ्लू का एक भी केस नहीं, गाइड लाइन का इंतजार
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फोटो-8- डॉक्टर कक्ष के बाहर लगी मरीजों की लाइन। संवाद
-जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में फिलहाल कोई वार्ड आरक्षित नहीं
-जिला अस्पताल में पंजीयन हुआ 1800 का डायरिया और बुखार के पहुंचे 500 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू मामलों में फिलहाल बांदा में एक भी केस स्वाइन फ्लू का सामने नहीं आया है। शासन की ओर से गाइड लाइन न आने पर अभी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अलग से कोई तैयारी नहीं की है। जिम्मेदारों का कहना है कि उनके अस्पतालों में किसी भी महामारी से निपटने से अलग से वार्ड सृजित किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में जिले में ऐसी स्थिति नहीं है। उधर, सोमवार को जिला अस्पताल में 1800 मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। इनमें तकरीबन 500 मरीज बुखार और डायरिया के पहुंचे।
जिला अस्पताल में सोमवार को 1800 मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। पर्चा काउंटर से लेकर दवा वितरण कक्ष और डॉक्टर कक्षों में मरीजों की लंबी लाइन देखीं गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, वायरल व डायरिया से पीड़ित 500 मरीज अस्पताल पहुंचे थे। भर्ती करने लायक तकरीबन 35 से अधिक मरीजों को भर्ती कराया गया है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर एसडी त्रिपाठी व डाॅ. ह्दयेश पटेल ने बताया कि उनकी ओपीडी में मरीजों का आकड़ा 100 के पार कर गया। इनमें ज्यादातर मरीज डायरिया और बुखार के रहे।
वर्जन
स्वाइन फ्लू का अभी एक भी मरीज सामने नहीं आया है। स्वाइन फ्लू को लेकर शासन से कोई गाइड लाइन भी नहीं आई है। वर्तमान में डायरिया और बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। जिला अस्पताल में एहतियात के तौर पर 10 बेड का वार्ड सृजित किया जाता है, फिलहाल स्वाइन फ्लू के एक भी मरीज न होने से अभी वार्ड सृजित नहीं किए गए हैं।-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।
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शासन की गाइडलाइन नहीं आई है। मेडिकल कॉलेज में 30 बेड का वार्ड आरक्षित रहता है। किसी भी आपदा में उस वार्ड का इस्तेमाल करते हैं, फिलहाल स्वाइन फ्लू का एक भी केस सामने नहीं आया है।-डाॅ. सुनील कौशल, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
बांदा। बांदा में स्वाइन फ्लू का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शासन से दिशा-निर्देश न मिलने के कारण जिला अस्पताल और रानी दुर्गावती चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने कोई विशेष तैयारी नहीं की है।
अधिकारियों के अनुसार, अस्पतालों में किसी भी महामारी से निपटने के लिए अलग से वार्ड बनाए जाते हैं। लेकिन वर्तमान में जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर ऐसी स्थिति नहीं है। सोमवार को जिला अस्पताल में 1800 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें लगभग 500 मरीज बुखार और डायरिया से पीड़ित थे। भर्ती करने लायक 35 से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसडी त्रिपाठी और डॉ. हृदयेश पटेल के बाह्य रोगी विभाग में 100 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें अधिकतर मरीज डायरिया और बुखार के थे। चिकित्सकों ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार और डायरिया के मरीज बढ़ रहे हैं।
महामारी से निपटने की तैयारी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किशुन कुमार ने बताया कि एहतियात के तौर पर 10 बिस्तर का वार्ड बनाया जाता है। फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मरीज न होने से अभी यह वार्ड सृजित नहीं किया गया है। रानी दुर्गावती चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने जानकारी दी। उनके अनुसार, महाविद्यालय में 30 बिस्तर का एक वार्ड आरक्षित रहता है। किसी भी आपदा की स्थिति में इस वार्ड का उपयोग किया जाता है, पर अभी स्वाइन फ्लू का कोई मामला नहीं है।
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-जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में फिलहाल कोई वार्ड आरक्षित नहीं
-जिला अस्पताल में पंजीयन हुआ 1800 का डायरिया और बुखार के पहुंचे 500 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे स्वाइन फ्लू मामलों में फिलहाल बांदा में एक भी केस स्वाइन फ्लू का सामने नहीं आया है। शासन की ओर से गाइड लाइन न आने पर अभी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अलग से कोई तैयारी नहीं की है। जिम्मेदारों का कहना है कि उनके अस्पतालों में किसी भी महामारी से निपटने से अलग से वार्ड सृजित किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में जिले में ऐसी स्थिति नहीं है। उधर, सोमवार को जिला अस्पताल में 1800 मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। इनमें तकरीबन 500 मरीज बुखार और डायरिया के पहुंचे।
जिला अस्पताल में सोमवार को 1800 मरीजों ने अपना पंजीयन कराया। पर्चा काउंटर से लेकर दवा वितरण कक्ष और डॉक्टर कक्षों में मरीजों की लंबी लाइन देखीं गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, वायरल व डायरिया से पीड़ित 500 मरीज अस्पताल पहुंचे थे। भर्ती करने लायक तकरीबन 35 से अधिक मरीजों को भर्ती कराया गया है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर एसडी त्रिपाठी व डाॅ. ह्दयेश पटेल ने बताया कि उनकी ओपीडी में मरीजों का आकड़ा 100 के पार कर गया। इनमें ज्यादातर मरीज डायरिया और बुखार के रहे।
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वर्जन
स्वाइन फ्लू का अभी एक भी मरीज सामने नहीं आया है। स्वाइन फ्लू को लेकर शासन से कोई गाइड लाइन भी नहीं आई है। वर्तमान में डायरिया और बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। जिला अस्पताल में एहतियात के तौर पर 10 बेड का वार्ड सृजित किया जाता है, फिलहाल स्वाइन फ्लू के एक भी मरीज न होने से अभी वार्ड सृजित नहीं किए गए हैं।-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।
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शासन की गाइडलाइन नहीं आई है। मेडिकल कॉलेज में 30 बेड का वार्ड आरक्षित रहता है। किसी भी आपदा में उस वार्ड का इस्तेमाल करते हैं, फिलहाल स्वाइन फ्लू का एक भी केस सामने नहीं आया है।-डाॅ. सुनील कौशल, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
बांदा। बांदा में स्वाइन फ्लू का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शासन से दिशा-निर्देश न मिलने के कारण जिला अस्पताल और रानी दुर्गावती चिकित्सा महाविद्यालय प्रशासन ने कोई विशेष तैयारी नहीं की है।
अधिकारियों के अनुसार, अस्पतालों में किसी भी महामारी से निपटने के लिए अलग से वार्ड बनाए जाते हैं। लेकिन वर्तमान में जिले में स्वाइन फ्लू को लेकर ऐसी स्थिति नहीं है। सोमवार को जिला अस्पताल में 1800 मरीजों ने पंजीयन कराया। इनमें लगभग 500 मरीज बुखार और डायरिया से पीड़ित थे। भर्ती करने लायक 35 से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसडी त्रिपाठी और डॉ. हृदयेश पटेल के बाह्य रोगी विभाग में 100 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें अधिकतर मरीज डायरिया और बुखार के थे। चिकित्सकों ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार और डायरिया के मरीज बढ़ रहे हैं।
महामारी से निपटने की तैयारी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. किशुन कुमार ने बताया कि एहतियात के तौर पर 10 बिस्तर का वार्ड बनाया जाता है। फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मरीज न होने से अभी यह वार्ड सृजित नहीं किया गया है। रानी दुर्गावती चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने जानकारी दी। उनके अनुसार, महाविद्यालय में 30 बिस्तर का एक वार्ड आरक्षित रहता है। किसी भी आपदा की स्थिति में इस वार्ड का उपयोग किया जाता है, पर अभी स्वाइन फ्लू का कोई मामला नहीं है।