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Banda News: ट्राॅमा सेंटर में नौ साल से एक्सरे और पैथोलॉजी नहीं, बाहर जांच करा रहे मरीज
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बांदा। जिला अस्पताल में संचालित ट्राॅमा सेंटर फेल साबित हो रहा है। ट्राॅमा सेंटर में एक्सरे और पैथोलॉजी की सुविधा नौ साल से नहीं है। मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच करानी पड़ रही है।
ट्रॉमा सेंटर में मरीज दो बजे के बाद भर्ती कराया गया है तो उसे एक्सरे और जांच के लिए प्राइवेट में जाना पड़ता है, उसे अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को रेफर की स्लिप बना दी जाती है। यह नजारा पिछले नौ साल से चल रहा है। जिला अस्पताल में वर्ष 2015 में 2.38 लाख की लागत से ट्राॅमा सेंटर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में ट्राॅमा सेंटर में 20 बेड हैं। यहां ज्यादातर मौसमी बीमारी, एक्सीडेंटल और मारपीट के मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल में पैथोलॉजी और एक्सरे की सुविधा सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक रहती है। प्रतिदिन यहां 50 से अधिक मरीज आते हैं जिसमें से प्रतिदिन 15 से 20 मरीज रेफर किए जाते हैं।
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ट्रॉमा सेंटर में 50 की जरूरत, तैनात हैं 35
बांदा। ट्राॅमा सेंटर में वर्तमान में 50 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत है। वर्तमान में यहां 35 ही कार्यरत हैं। 15 की आवश्यकता है। दो ईएमओ डॉ. विनीत सचान और डॉ. प्रदीप गुप्ता ही तैनात हैं। इसके अलावा संविदा में दो डॉक्टरों को और तैनात किया गया है, जो कि ईएमओ का कार्य देखते हैं। यहां एनेस्थीसिया के दो पद हैं, उनमें एक ही तैनात है। इसी तरह आर्थोपेडिक सर्जन एक ही है। जबकि दो की आवश्यकता है। जनरल सर्जन भी एक ही है, दो की आवश्यक है। स्टाफ नर्स भी सिर्फ सात ही तैनात हैं जबकि जरूरत 15 की है। एक्सरे टेक्नीशियन के तीन पद हैं, यहां एक ही तैनात है।
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केस-1
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शहर कोतवाली क्षेत्र के खुटला मोहल्ला निवासी जुम्मन (65) ने बताया कि वह मारपीट में घायल होकर शनिवार को ट्रामा सेंटर आए थे। दोपहर तीन बजे के बाद भर्ती होने से उनका एक्सरे नहीं हो सका। उनके पास बाहर से एक्सरे कराने के लिए पैसे नहीं थे तो वह शनिवार व रविवार को ट्राॅमा सेंटर में भर्ती रहे। सोमवार को उनका जिला अस्पताल में एक्सरे हो सका है।
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केस- 2
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मटौंध थाना क्षेत्र के खैराडा गांव निवासी सुप्रीत कुमार (32) ने बताया कि वह शनिवार की देर शाम बोलेरो की टक्कर से घायल हो गए थे। उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनके सिर में चोट आई है। अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा न होने से प्राइवेट में तीन हजार रुपये खर्च करके सिटी स्कैन कराया है। डॉक्टर अभी भर्ती किए हैं।
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जिला अस्पताल 100 बेड का है, उसी के साथ ट्राॅमा सेंटर को भी संचालित किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर में वर्तमान में 20 बेड हैं। स्टाफ, एक्सरे और पैथोलॉजी के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। शासन से मांग पूरी होने पर ही मानक पूरे किए जाएंगे। फिलहाल आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी व एक्सरे की सुविधा दी जाती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाता है।
डॉ. एसडी त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।
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ट्रॉमा सेंटर में मरीज दो बजे के बाद भर्ती कराया गया है तो उसे एक्सरे और जांच के लिए प्राइवेट में जाना पड़ता है, उसे अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को रेफर की स्लिप बना दी जाती है। यह नजारा पिछले नौ साल से चल रहा है। जिला अस्पताल में वर्ष 2015 में 2.38 लाख की लागत से ट्राॅमा सेंटर का निर्माण किया गया था। वर्तमान में ट्राॅमा सेंटर में 20 बेड हैं। यहां ज्यादातर मौसमी बीमारी, एक्सीडेंटल और मारपीट के मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल में पैथोलॉजी और एक्सरे की सुविधा सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक रहती है। प्रतिदिन यहां 50 से अधिक मरीज आते हैं जिसमें से प्रतिदिन 15 से 20 मरीज रेफर किए जाते हैं।
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ट्रॉमा सेंटर में 50 की जरूरत, तैनात हैं 35
बांदा। ट्राॅमा सेंटर में वर्तमान में 50 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत है। वर्तमान में यहां 35 ही कार्यरत हैं। 15 की आवश्यकता है। दो ईएमओ डॉ. विनीत सचान और डॉ. प्रदीप गुप्ता ही तैनात हैं। इसके अलावा संविदा में दो डॉक्टरों को और तैनात किया गया है, जो कि ईएमओ का कार्य देखते हैं। यहां एनेस्थीसिया के दो पद हैं, उनमें एक ही तैनात है। इसी तरह आर्थोपेडिक सर्जन एक ही है। जबकि दो की आवश्यकता है। जनरल सर्जन भी एक ही है, दो की आवश्यक है। स्टाफ नर्स भी सिर्फ सात ही तैनात हैं जबकि जरूरत 15 की है। एक्सरे टेक्नीशियन के तीन पद हैं, यहां एक ही तैनात है।
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केस-1
शहर कोतवाली क्षेत्र के खुटला मोहल्ला निवासी जुम्मन (65) ने बताया कि वह मारपीट में घायल होकर शनिवार को ट्रामा सेंटर आए थे। दोपहर तीन बजे के बाद भर्ती होने से उनका एक्सरे नहीं हो सका। उनके पास बाहर से एक्सरे कराने के लिए पैसे नहीं थे तो वह शनिवार व रविवार को ट्राॅमा सेंटर में भर्ती रहे। सोमवार को उनका जिला अस्पताल में एक्सरे हो सका है।
केस- 2
मटौंध थाना क्षेत्र के खैराडा गांव निवासी सुप्रीत कुमार (32) ने बताया कि वह शनिवार की देर शाम बोलेरो की टक्कर से घायल हो गए थे। उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनके सिर में चोट आई है। अस्पताल में सिटी स्कैन की सुविधा न होने से प्राइवेट में तीन हजार रुपये खर्च करके सिटी स्कैन कराया है। डॉक्टर अभी भर्ती किए हैं।
जिला अस्पताल 100 बेड का है, उसी के साथ ट्राॅमा सेंटर को भी संचालित किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर में वर्तमान में 20 बेड हैं। स्टाफ, एक्सरे और पैथोलॉजी के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। शासन से मांग पूरी होने पर ही मानक पूरे किए जाएंगे। फिलहाल आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी व एक्सरे की सुविधा दी जाती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही रेफर किया जाता है।
डॉ. एसडी त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष, बांदा।