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अधूरी रिपोर्ट पेश करने पर एनजीटी ने जताई नाराजगी

Wed, 23 Sep 2020 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 11:27 PM IST
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NGT expressed displeasure at presenting incomplete report
NGT expressed displeasure at presenting incomplete report - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड और खासकर बांदा में खनिज के अवैध खनन पर कई बार सख्त तेवर अपना चुकी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर बांदा जिले में खनन को लेकर नाराजगी जताई है। दायर याचिका पर सुनवाई कर रही एनजीटी ने कहा है कि पेश की गई रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारियां/डाटा ही नदारद हैं। जांच कराकर इसे पूरा करके पेश करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता संदीप कुमार सिंह ने एनजीटी में पिछले वर्ष रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई चल रही है। याचिका में बांदा में केन, यमुना और बागै नदियों में हो रहे अवैध खनन और इससे पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान का मुद्दा शामिल है।
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शुक्रवार (18 सितंबर) को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान बहस सुनी गई। ट्रिब्यूनल के चेयरमैन न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और सदस्य न्यायमूर्ति एसपी वांगड़ी व विशेषज्ञ सदस्य नागिन नंदा ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल कुमार और विपक्षी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा, दिलीप ध्यानी व अमन भल्ला ने बहस की और तर्क पेश किए।
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ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा है कि विचारणीय मुद्दा यह है कि खनिज गतिविधियों पर अध्ययन की जरूरत है। खनिज क्षेत्रों में एहतियाती कदम और सारगर्भित विकास के सिद्धांत पर अध्ययन की अनुमति दी जानी जरूरी है या नहीं? कहा कि बांदा की केन, यमुना और बागै नदी में खनन से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है या नहीं?
ट्रिब्यूनल ने कहा कि 15 जनवरी 2020 को इस बारे में निर्देश दिए गए थे, लेकिन संबंधित लोगों ने जो रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल की है, उसमें महत्वपूर्ण डाटा/ब्योरा नहीं है। आदेश दिया कि टीम से जांच कराकर अध्ययन रिपोर्ट पूरी की जाए। अगली सुनवाई के लिए 7 जनवरी 2021 निर्धारित की गई है।
अवैध और नियम विरुद्ध भारी भरकम मशीनों से खनन आदि मुद्दों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने खनिज विभाग की जुर्माने आदि की कार्रवाई को पर्याप्त माना है। सुमन सिंह, आशीष सागर दीक्षित और देशराज निषाद ने अपने अधिवक्ता सिद्धार्थ निरंजन के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इसमें कहा था कि खनन करा रही कंपनी यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स आदि अवैध खनन और नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। डीएम ने मार्च माह में पांच पोकलैंड मशीनें सीज की थीं।
रिट में अनुरोध किया गया कि फर्म को ब्लैक लिस्ट करने और बांदा डीएम को याचिकाकर्ता और ग्रामीणों को सूचना देकर पुन: मौके पर जांच कराकर आख्या देने का आदेश दिया जाए। अधिवक्ता धर्मपाल सिंह ने कहा कि पट्टाधारकों ने पट्टे की शर्तों और नियम-कानून का उल्लंघन किया है। अपूर्णनीय क्षति पहुंचाई है। गांववासियों को भी नुकसान हुआ है।
मुख्य शासकीय अधिवक्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय में कहा कि मेसर्स यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स की मशीन जब्त कर 37 लाख रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है।
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति समिति गोपाल की दो सदस्यीय बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि शासकीय अधिवक्ता द्वारा दी गई सूचना पर न्यायालय इस याचिका में कोई कार्रवाई की इच्छा नहीं रखती। उधर, याचिकाकर्ता आशीष सागर ने बताया कि जय शक्ति रियलकान प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स शिवप्रताप सिंह चंदेल अलग-अलग पट्टों की फर्म पर बांदा व फतेहपुर में कारोबार करते थे।

पूर्व डीएम अमित सिंह बंसल ने बांदा की कई खदानों पर 15 करोड़ का जुर्माना किया था। लड़ाका पुरवा की यूफोरिया माइंस में 37 लाख का जुर्माना हुआ है। फतेहपुर डीएम ने भी किस्त न देने पर जय शक्ति फर्म पर 3 करोड़ 37 लाख 9 हजार रुपये जुर्माना और ब्लैक लिस्ट करने की जानकारी हाईकोर्ट को दी है।
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