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सूखे से बुंदेलखंड में पैदा हो रही आपसी कटुता
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:31 PM IST
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डिया से बातचीत करती गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की शोध छात्रा डॉ. अर्चना सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के शोध दल ने कहा है कि सूखे से बुंदेलखंड में आपसी कटुता और अलगाव की भावना बढ़ रही है। यहां मनरेगा के सिवाय रोजगार देने वाली कोई योजना नहीं है। शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा है कि अगले माह जुलाई में स्कूल खुलेंगे तो बड़ी संख्या में बच्चे दाखिला नहीं लेंगे। संस्थान निदेशक के माध्यम से शोध दल बुंदेलखंड के सूखे की अध्ययन रिपोर्ट भारत सरकार को भेजेगा।
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12 सदस्यीय शोध दल ने बांदा जिले के बड़ोखर ब्लाक में खहरा, मवई, चौकिन पुरवा, नरैनी में हरिहर पुरवा, मटखना, कटरा कालिंजर आदि में भ्रमण कर सूखे के हालातों की गहन समीक्षा की है। बृहस्पतिवार को डीसीडीएफ में अध्यक्ष सुधीर सिंह की मेजबानी ने आयोजित मीडिया वार्ता में शोध दल की डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. कुणाल केसरी और डॉ. रमाशंकर ने कहा कि बुंदेलखंड में सरकारी मदद से लोग संतुष्ट नहीं हैं। किसी को कम और किसी को ज्यादा मदद मिलने से यहां आपसी कटुता और अलगाववाद की भावना पनप रही है।
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खासकर दलित वर्ग में यह भावना ज्यादा है। वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे है। कहा कि जिसे मदद नहीं मिली, वह उसकी शिकायत कर देता है जिसे मदद मिली है। नतीजतन दोनों के बीच कटुता पैदा हो जाती है।
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यह भी कहा कि यहां महिलाओं पर ज्यादा संकट है। उन्हें घर, चौके के अलावा दूर दराज से पानी भी ढोना पड़ रहा है। हालांकि कुछ पुरुष अपनी लाज का हवाला देकर उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने देते। बताया कि शोध का विषय बुंदेलखंड में सूखे का प्रभाव और जाति वर्गों की दशा है।
शोधार्थियों ने कहा कि सरकार अपने तरीके से राहत दे रही है। उसे गांवों में असलियत पता लगाना चाहिए। सूखे का प्रभाव हर वर्ग पर पड़ा है। किसान के साथ मजदूर, पशुपालक, छोटे दुकानदार, दलित सभी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि सूखा पीड़ित गरीबों की यह पीड़ा वह उच्च स्तर तक पहुंचाएंगे।
शोध दल ने बुंदेलखंड की अन्य समस्याओं की भी चर्चा की। कई गांवों का हवाला देकर वहां की दुर्दशा बयां की। शोध दल ने बताया कि अपनी अध्ययन रिपोर्ट अपने संस्थान निदेशक को देंगे। निदेशक के माध्यम से यह रिपोर्ट भारत सरकार और संबंधित मंत्रालयों को भी भेजी जाएगी। रिपोर्ट की एक प्रति यहां डीएम को देंगे। अध्ययन दल में नेहा राय, संजू सरोज, तिलक, अमित, किशन, विनीत, जितेंद्र और नंद किशोर भी शामिल हैं।