बांदा। मशरूम की खेती तथा उत्पादन से न सिर्फ प्रोटीन की पूर्ति होती है, बल्कि अतिरिक्त रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। यह बातें सोमवार को कृषि विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार में प्रदेश के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने कहीं।
मशरूम उत्पादन युवाओं और किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय विषय पर आयोजित वेब सेमिनार की सोमवार को शुरुआत हुई। समापन 23 अक्तूबर को होगा। कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि आमदनी दोगुना करने सहित किसानों के लिए सामाजिक, आर्थिक विकास में मशरूम की खेती मील का पत्थर साबित होगी। सेमिनार संयोजक विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने भी मशरूम की खेती को फायदेमंद बताया।
सेमिनार संयोजक डॉ. दुर्गा प्रसाद ने प्रशिक्षण की जानकारी दी। डॉ. मंजीत सिंह (पूर्व निदेशक मशरूम शोध निदेशालय, सोलन), मशरूम विशेषज्ञ डॉ. आरपी सिंह (निदेशक तराई फूडस लिमिटेड, रुद्रपुर, उत्तराखंड), डॉ. होशियार सिंह नेगी, डॉ. उमेश चंद्रा, डॉ. नरेंद्र सिंह आदि ने भी संबोधित किया।