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मशीनोें से नहीं, मजदूरों से होगा खनन
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 28 May 2015 11:44 PM IST
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बुंदेलखंड में खनन के दौरान पर्यावरण नियमों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की मुख्य बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने आदेश जारी किया है कि किसी भी दशा में बालू का खनन पर्यावरण नियमों के विरुद्ध नहीं होना चाहिए।
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साथ ही खनन कार्य में मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। तीन विभागों की समिति गठित कर आदेश दिया कि समिति मौके पर जाकर रिपोर्ट दे कि पर्यावरण की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। अगली सुनवाई आठ जुलाई को होगी।
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स्वराज कालोनी (बांदा) निवासी मनोज अवस्थी ने एनजीटी में पिछले दिनों रिट दायर की है। रिट के साथ अवैध खनन के साक्ष्य के तौर पर तमाम अभिलेख, समाचार पत्रों की कटिंग इत्यादि भी दाखिल किए।
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अधिवक्ता कामनी जायसवाल, रोहित कुमार सिंह और सुमित शर्मा के माध्यम से दाखिल रिट में कहा कि नदी के तटों और खदानों में बालू के खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पर्यावरण संबंधी शर्तों और नियम-कानूनों का पालन नहीं हो रहा है। खनन में मशीनों का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
एनजीटी के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यूडी साल्वी (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. डीके अग्रवाल की दो सदस्यीय बेंच ने सुनवाई के बाद 22 मई को जारी किए आदेश में कहा है कि किसी भी दशा में बालू का खनन पर्यावरण नियमों के विपरीत नहीं होना चाहिए।
खनन केवल मैन्युअल (मजदूरों) से ही कराया जाए। एनजीटी ने तीन विभागों की संयुक्त टीम गठित की है। इनमें भूतत्व एवं खनिज विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और क्षेत्रीय खनिज अधिकारी शामिल हैं। एनजीटी बेंच ने समिति को निर्देश दिया कि खनन क्षेत्रों में मौके पर जाकर नापजोख करें और वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट दाखिल करें।
रिपोर्ट में यह भी बताएं कि वहां पर्यावरण की शर्तों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा? यह रिपोर्ट 8 जुलाई तक देनी होगी। एनजीटी में इसी दिन फिर सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान एनजीटी में उपस्थित उत्तर प्रदेश पर्यावरण विभाग के निदेशक को बेंच ने आदेश किया कि वे अपने मुवक्किलों को सूचित कर दें कि इस मामले में 8 जुलाई को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि रिट में उत्तर प्रदेश सरकार (द्वारा मुख्य सचिव) और चित्रकूटधाम मंडलायुक्त तथा बांदा डीएम, खनिज अधिकारी और यहां पट्टा खदान चला रहे दो प्रमुख बालू व्यवसायी मनोज तिवारी और प्रकाशचंद्र द्विवेदी को भी पार्टी बनाया गया है।