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बकस्वाहा जंगल पर अब अंतिम सुनवाई करेगा एमपी हाईकोर्ट

Tue, 25 Jan 2022 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 11:48 PM IST
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MP High Court will now hold final hearing on Bakswaha forest
बकस्वाहा जंगल में पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर बचाने का संकल्प लेते पर्यावरण पैरोकार। (फाइल फोट? - फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन और पेड़ों की कटान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक फिलहाल बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट में मंगलवार (25 जनवरी) को इसकी सुनवाई थी। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने संबंधित पक्षों के जवाब न आने पर अब अगली अंतिम सुनवाई का आदेश दिया है।
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बकस्वाहा जंगल में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हीरा खनन के लिए बिरला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग कंपनी को 50 वर्ष के लिए पट्टा हीरा खदान के लिए दे दिया है। जंगल में 2.15 लाख से ज्यादा पेड़ हैं। हीरा खनन में इन्हें काटा जाएगा।
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पर्यावरण के इस बड़े संभावित नुकसान पर तमाम पर्यावरण के पैरोकार संगठन और कार्यकर्ता लगातार विरोध कर रहे हैं। आंदोलन की भी भरमार रही। जिसके बाद पिछले वर्ष जुलाई माह में एनजीटी ने जंगल में पेड़ काटने पर रोक लगा दी थी।
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पर्यावरण पैरोकार डा.पीजी नाजपांडे (दिल्ली) ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इसके खिलाफ रिट दायर कर रखी है। इस पर सुनवाई चल रही है। 26 अक्तूबर 2021 को इस याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश खंडपीठ ने हीरा खनन और जंगल कटान पर रोक (स्थगन आदेश) जारी किया था। यह अभी प्रभावी है।
हाईकोर्ट ने पुरातत्व विभाग, वन विभाग और एस्सेल माइनिंग कंपनी को अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई हुई। लेकिन पुरातत्व, वन विभाग और एस्सेल माइनिंग कंपनी ने अब तक हाईकोर्ट के समक्ष अपने जवाब दाखिल नहीं किए।

याचिकाकर्ता नाजपांडे की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अब आदेश दिया है कि उपरोक्त पक्षों के जवाब आने पर इस मामले की अंतिम रूप से सुनवाई की जाएगी। अधिवक्ता के मुताबिक हाईकोर्ट द्वारा दिया गया स्टे आर्डर बरकरार रहेगा।
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