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मस्जिदें सूनीं, घरों में कुनबे के साथ अदा कर रहे नमाज

Wed, 29 Apr 2020 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2020 10:54 PM IST
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Mosques are heard, houses are offered with prayers
बांदा। लॉकडाउन ने रमजान की इबादतों के तौर-तरीके बदल दिए। रोजदारों और नमाजियों को नए तजुर्बे मिल रहे हैं। मस्जिदों में जो इमाम के पीछे खड़े होकर तरावीह और नमाज अदा करते थे, अब वे खुद घरों में इमामत कर रहे हैं। परिवार के साथ छोटी सी जमात में नमाज अदा कर रहे हैं। उधर, तड़के सहरी से देर रात तरावीह की खास नमाज खत्म होने तक गुलजार और आबाद रहने वाली मस्जिदें सूनी हैं।
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कोरोना के विश्वव्यापी संकट ने काफी कुछ बदल दिया है। धर्म, कर्म भी इससे अछूते नहीं रहे। एक माह से ज्यादा समय से मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों में ताले लटक रहे हैं। भक्त घरों में ही पूजा और इबादत कर रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित रमजान माह और रोजेदार हो रहे हैं।
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इस माह मुस्लिम इलाके तड़के से देर रात तक अजान की सदाओं, इफ्तार पार्टियों से गुलजार रहते थे। अब यही इलाके सुनसान हैं। जो इबादतें मस्जिदों में सार्वजनिक स्थानों पर होती थीं वो इबादतें अब घरों में कुनबे के साथ हो रही हैं। पड़ोसी को भी शामिल करना लॉकडाउन का उल्लंघन है।
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शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी कहते हैं कि जरूर हम इंसानों से कोई बड़ी खता हुई है। तभी परवरदिगार खफा है।
उसने अपने दरबार में आने से रोक दिया है। फिर भी जल्द ही हालात बहाल होने की उम्मीद है। उधर, शहर काजी मौलाना कमरुद्दीन का कहना है कि रमजान जैसे मुबारक माह में मस्जिदों का वीरान रहना बेहद अफसोसजनक है। परवरदिगार पूरे मुल्क और पूरी दुनिया को वबा (महामारी) से निजात दिलाए।
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