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मंडल के 50 फीसदी से अधिक किसानों ने किया पलायन
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:48 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड से पलायन करने वालों में भूमिहीन
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मजदूर ही नहीं बल्कि कई एकड़ के मालिक भी शामिल हैं। सूखे की मार से
भूमिहीनों को काम देने वालों को ही महानगरों में मजदूर बना दिया है।
चित्रकूट धाम मंडल में हुए कुल पलायन करने वालों में औसतन 50 फीसदी किसान हैं। यह दावा किया है कम्युनिस्ट पार्टियों ने। उनका कहना है कि उन्होंने हर ब्लाक का सर्वे किया, जिसमें बड़ी संख्या में खेतिहरों के पलायन की बात सामने आई है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी और भारतीय कम्प्युनिस्ट पार्टी माक्सवादी का दावा है कि उन्होंने संयुक्त रूप से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों का सर्वे किया।
10 ब्लाकों में एक-एक गांव के किए गए सर्वे में जो तस्वीर सामने आई है, वह काफी चौंकाने वाली है। वामपंथी नेताओं ने सर्वे के जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके मुताबिक जिन परिवारों से उन्होंने संपर्क किया है, उनके सदस्यों संख्या 189 थी। इनमें 106 (56 फीसदी) सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए पलायन कर गए हैं।
सर्वे में बांदा जनपद के जसपुरा, बिसंडा, कमासिन और नरैनी, चित्रकूट जनपद के मानिकपुर, रामनगर, पहाड़ी और कर्वी, महोबा जनपद के कबरई तथा हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लाकों को शामिल किया है।
बांदा के गांवों में रामपुर, बिसंडा, दांदौं और बांसपोखरी में सर्वे हुआ। चित्रकूट में सरैंया, इटवां, साईंपुर और नोनार तथा महोबा में बरबई और हमीरपुर में तगारी गांव में सर्वे किया गया।
भाकपा राज्य कौंसिल सदस्य डा. रामचंद्र सरस ने बताया कि सर्वे में शामिल हर परिवार किसान है। पलायन करने वाले परिवारों के पास एक से लेकर 15 एकड़ तक जमीन है।
कुछ पूरे परिवार पलायन कर गए हैं। अधिकांश में बूढ़ों को छोड़कर सभी महानगरों को जा चुके हैं। सर्वे में शामिल परिवारों ने भाकपा नेताओं को बताया कि उन्हें अब तक कोई सरकारी मदद या राहत नहीं मिली।
सर्वे में यह भी सामने आया कि गांवों में 100 में 20 महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6.5 ग्राम है। 100 में 93 किसान कर्जदार हैं। 100 में 87 किसानों के पास बोने के लिए बीज नहीं है। 100 में 17 घर ऐसे हैं जहां दोनों वक्त चूल्हा नहीं जलता।
चित्रकूट धाम मंडल में हुए कुल पलायन करने वालों में औसतन 50 फीसदी किसान हैं। यह दावा किया है कम्युनिस्ट पार्टियों ने। उनका कहना है कि उन्होंने हर ब्लाक का सर्वे किया, जिसमें बड़ी संख्या में खेतिहरों के पलायन की बात सामने आई है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी और भारतीय कम्प्युनिस्ट पार्टी माक्सवादी का दावा है कि उन्होंने संयुक्त रूप से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों का सर्वे किया।
10 ब्लाकों में एक-एक गांव के किए गए सर्वे में जो तस्वीर सामने आई है, वह काफी चौंकाने वाली है। वामपंथी नेताओं ने सर्वे के जो आंकड़े पेश किए हैं, उसके मुताबिक जिन परिवारों से उन्होंने संपर्क किया है, उनके सदस्यों संख्या 189 थी। इनमें 106 (56 फीसदी) सदस्य रोजी-रोटी कमाने के लिए पलायन कर गए हैं।
सर्वे में बांदा जनपद के जसपुरा, बिसंडा, कमासिन और नरैनी, चित्रकूट जनपद के मानिकपुर, रामनगर, पहाड़ी और कर्वी, महोबा जनपद के कबरई तथा हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लाकों को शामिल किया है।
बांदा के गांवों में रामपुर, बिसंडा, दांदौं और बांसपोखरी में सर्वे हुआ। चित्रकूट में सरैंया, इटवां, साईंपुर और नोनार तथा महोबा में बरबई और हमीरपुर में तगारी गांव में सर्वे किया गया।
भाकपा राज्य कौंसिल सदस्य डा. रामचंद्र सरस ने बताया कि सर्वे में शामिल हर परिवार किसान है। पलायन करने वाले परिवारों के पास एक से लेकर 15 एकड़ तक जमीन है।
कुछ पूरे परिवार पलायन कर गए हैं। अधिकांश में बूढ़ों को छोड़कर सभी महानगरों को जा चुके हैं। सर्वे में शामिल परिवारों ने भाकपा नेताओं को बताया कि उन्हें अब तक कोई सरकारी मदद या राहत नहीं मिली।
सर्वे में यह भी सामने आया कि गांवों में 100 में 20 महिलाओं का हीमोग्लोबिन 6.5 ग्राम है। 100 में 93 किसान कर्जदार हैं। 100 में 87 किसानों के पास बोने के लिए बीज नहीं है। 100 में 17 घर ऐसे हैं जहां दोनों वक्त चूल्हा नहीं जलता।