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पंजाब-हरियाणा से ज्यादा बारिश, फिर भी पानी के लाले
Wed, 29 May 2019 11:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Published by: ASIF ASIF
Updated Wed, 29 May 2019 11:52 PM IST
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शंकर पुरवा में सूखे तालाब को श्रमदान से खोदने की खुद फावड़ा चलाकर शुरुआत करते डीएम हीरालाल।
- फोटो : अमर उजाला
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बारिश के मौसम में बांदा में 902 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि पंजाब में 636 और हरियाणा में सिर्फ 563 मिलीमीटर बारिश होती है। इसके बाद भी हरियाणा और पंजाब में पानी का संकट नहीं है, जबकि बुंदेलखंड में इनसे ड्योढ़ी बारिश होने के बाद भी पानी के लाले हैं। यह बात बुधवार की सुबह डीएम हीरालाल ने उदयपाल का डेरा (सिंहपुर) में पुराने कुएं की पूजा और शंकर पुरवा में सूखे तालाब में फावड़ा चलाकर कुआं तालाब जिआओ अभियान के दौरान कहीं।
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मंत्रोच्चारण के बीच पूजा के साथ कुएं के जीर्णोद्धार की शुरुआत कराई। ग्रामीणों के साथ तालाब में खुद फावड़ा चलाया। डीएम ने जल संरक्षण के लिए बारिश के पानी को रोकना बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में बांदा में 902 मिलीमीटर वर्षा होती है, जबकि पंजाब में 636 और हरियाणा में सिर्फ 563 मिलीमीटर बारिश होती है। इसके बाद भी इन दोनों राज्यों में पानी का संकट नहीं है।
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बुंदेलखंड में इनसे ड्योढ़ी बारिश होने के बाद भी पानी के लाले हैं। बताया कि दोनों राज्यों में तालाब, कुओं और जलस्रोतों पर अवैध कब्जे नहीं होते। बारिश का पानी इनमें संरक्षित होता है, जबकि बुंदेलखंड में बरसाती नदी, नालों से बहकर निकल जाता है। डीएम ने कहा कि मनरेगा, ग्राम पंचायत निधि, कृषि विभाग आदि के सहयोग और ग्रामीणों के श्रमदान से पुराने तालाबों और कुओं को जिंदा करना है। अभी बारिश को एक माह का समय है। इस मुद्दत में इसके लिए अभियान चलाएं। डीएम ने भरोसा दिलाया कि यह अभियान सफल हो गया तो बांदा में पानी का संकट नहीं रहेगा। उन्होंने खेतों में छोटे तालाब बनाकर मछली पालन का भी सुझाव दिया।
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परियोजना निदेशक आरपी मिश्र ने बताया कि ग्राम पंचायतों को सरकारी बजट दो दशक पहले ही मिलना शुरू हुआ है। इसके पहले गांव में श्रमदान से ही कुएं और तालाब बनाए जाते थे। कोई सरकारी मदद नहीं मिलती थी। कार्यक्रम में एसडीएम सदर संदीप कुमार, कृषि उप निदेशक एके सिंह, एबीएसए राजेंद्र प्रसाद, बीडीओ पियूष मोहन श्रीवास्तव, एडीओ राम कुमार वर्मा, प्रधान प्रतिनिधि रामसागर पाल, बेंदा पूर्व प्रधान विवेक कुमार सिंह, गोधनी प्रधान रमेशचंद्र पांडेय, विनय तिवारी छापर, जाहर सिंह खप्टिहाकलां, ज्ञान सिंह यादव प्रधान संघ अध्यक्ष (तिंदवारी) सहित बड़ी संख्या में ग्राम स्तरीय कर्मचारी मौजूद रहे। संचालन रमेश कुमार पटेल ने किया।