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बांदाः ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर किए गए कार्य पर लगाया मनरेगा का बोर्ड
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कार्यस्थल पर लगा मनरेगा का बोर्ड
- फोटो : BANDA
बांदा। नरैनी क्षेत्र के भंवरपुर गांव में प्रवासी और स्थानीय मजदूरों द्वारा गांव के पुराने घरार नाले/नदी की श्रमदान से की गई खुदाई को ग्राम विकास विभाग/ग्राम पंचायत ने मनरेगा कार्य बताकर वहां बोर्ड लगा दिया। इससे श्रमदानी भड़क गए। सोमवार को कार्य का बहिष्कार कर दिया। उधर, सीडीओ और बीडीओ इसे मनरेगा का ही कार्य बता रहे हैं।
गांव में अर्से से सूखे पडे़ घरार नाले/नदी को महानगरों से लौटे कामगारों सहित 50 से ज्यादा लोगों ने श्रमदान से खुदाई शुरू कर दी। यह कार्य पिछले एक हफ्ते से चल रहा है। इसी बीच यह कार्य मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद मुख्यमंत्री ने संज्ञान में ले लिया और श्रमदानियों को सम्मानित करने की बात कही। लखनऊ से आई इस खबर के बाद यहां के अफसरों में बेचैनी और खलबली मच गई।
रविवार को आनन-फानन में खुदाई स्थल के पास ग्राम पंचायत ने मनरेगा से कराए गए कार्य का पत्थर/बोर्ड लगा दिया गया। श्रमदान करने वाले श्रमदानी भड़क गए। श्रमदानी बबिता ने कहा कि पिछले मनरेगा कार्यों की मजदूरी दो माह बाद भी नहीं मिली। उसके भुगतान के बजाय अधिकारी झूठी वाहवाही लूटने को जुट गए हैं। श्रमदानी रामसजीवन ने कहा कि मनरेगा का काम दिखाकर अधिकारी खुद सम्मानित होना चाहते हैं। कहा कि उनके श्रमदान पर पानी न फेरा जाए। मनरेगा का बोर्ड हटाया जाए तभी वह दोबारा काम शुरू करेंगे।
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उधर, इस बारे में मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा ने रविवार को कहा कि नाले की खुदाई सफाई मनरेगा से हो रही है। वहां बोर्ड पहले से लगा था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग श्रमिकों को भड़का और गुमराह कर रहे हैं। सीडीओ ने कहा श्रमिकों से बात कर उन्हें काम के लिए राजी कर लिया गया है। उधर, बीडीओ नरैनी मनोज कुमार ने कहा कि मनरेगा से काम हो रहा है। रविवार को सूर्यग्रहण से श्रमिकों ने काम नहीं किया। बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं है।
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गांव में अर्से से सूखे पडे़ घरार नाले/नदी को महानगरों से लौटे कामगारों सहित 50 से ज्यादा लोगों ने श्रमदान से खुदाई शुरू कर दी। यह कार्य पिछले एक हफ्ते से चल रहा है। इसी बीच यह कार्य मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद मुख्यमंत्री ने संज्ञान में ले लिया और श्रमदानियों को सम्मानित करने की बात कही। लखनऊ से आई इस खबर के बाद यहां के अफसरों में बेचैनी और खलबली मच गई।
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रविवार को आनन-फानन में खुदाई स्थल के पास ग्राम पंचायत ने मनरेगा से कराए गए कार्य का पत्थर/बोर्ड लगा दिया गया। श्रमदान करने वाले श्रमदानी भड़क गए। श्रमदानी बबिता ने कहा कि पिछले मनरेगा कार्यों की मजदूरी दो माह बाद भी नहीं मिली। उसके भुगतान के बजाय अधिकारी झूठी वाहवाही लूटने को जुट गए हैं। श्रमदानी रामसजीवन ने कहा कि मनरेगा का काम दिखाकर अधिकारी खुद सम्मानित होना चाहते हैं। कहा कि उनके श्रमदान पर पानी न फेरा जाए। मनरेगा का बोर्ड हटाया जाए तभी वह दोबारा काम शुरू करेंगे।
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उधर, इस बारे में मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा ने रविवार को कहा कि नाले की खुदाई सफाई मनरेगा से हो रही है। वहां बोर्ड पहले से लगा था। उन्होंने कहा कि कुछ लोग श्रमिकों को भड़का और गुमराह कर रहे हैं। सीडीओ ने कहा श्रमिकों से बात कर उन्हें काम के लिए राजी कर लिया गया है। उधर, बीडीओ नरैनी मनोज कुमार ने कहा कि मनरेगा से काम हो रहा है। रविवार को सूर्यग्रहण से श्रमिकों ने काम नहीं किया। बहिष्कार जैसी कोई बात नहीं है।