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Banda News: केन की धारा में खनन से गड्ढे, 12 की जा चुकी जान
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फोटो-18-केन नदी में खनन करतीं मशीनें। आर्काइव
बांदा। केन नदी की धारा में मौरंग खनन के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे लोगों की जान ले रहे हैं।
पैलानी तहसील क्षेत्र के खप्टिहा कलां, सांडी, खरेई, अमलोर, शादी मदनपुर, पड़ोहरा और बरेहटा समेत आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर संचालित मौरंग खदानों में नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार खप्टिहा कलां और सांडी की खदानों के आसपास नदी की तलहटी में बने गहरे गड्ढों में डूबने से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। पूरे क्षेत्र में ऐसी घटनाओं में करीब 12 लोगों की जान जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद नदी में खनन से बने खतरनाक गड्ढों और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई का मुद्दा बना हुआ है।
नदी की धारा में प्रतिबंधित सक्शन और लिफ्टर मशीनों से मौरंग निकालने के कारण तलहटी में गहरे गड्ढे बन जाते हैं। पानी के भीतर इनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। नदी में उतरने वाले ग्रामीणों और बच्चों के लिए ये गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। खप्टिहा कलां और सांडी क्षेत्र में ऐसे ही गड्ढों में डूबने से कई की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालकों ने नाव घाटों के आसपास भी गड्ढे खोद दिए हैं।
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खनन क्षेत्र से बाहर मौरंग निकालने का आरोप
मामले में पट्टाधारक पर स्वीकृत खनन क्षेत्र से बाहर जाकर मौरंग निकालने और नदी की धारा में प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल करने के आरोप सामने आए। नदी की धारा में खनन से पर्यावरण और खनिज संपदा को नुकसान पहुंचने का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंचा।
एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित खनन पर रोक लगा दी। साथ ही पर्यावरणीय क्षति और खनिज संपदा को हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने जिला मजिस्ट्रेट बांदा को संबंधित पट्टाधारक को पूर्ण सुनवाई का अवसर देने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। आदेश प्रकाशित होने के बाद भी अब तक संबंधित पट्टाधारक से क्षति की भरपाई के लिए धनराशि वसूल नहीं की जा सकी है।
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वर्जन
कहीं भी नदी की धारा में खनन प्रतिबंधित है। एनजीटी के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-राज रंजन, खनन अधिकारी बांदा।
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पैलानी तहसील क्षेत्र के खप्टिहा कलां, सांडी, खरेई, अमलोर, शादी मदनपुर, पड़ोहरा और बरेहटा समेत आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर संचालित मौरंग खदानों में नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार खप्टिहा कलां और सांडी की खदानों के आसपास नदी की तलहटी में बने गहरे गड्ढों में डूबने से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। पूरे क्षेत्र में ऐसी घटनाओं में करीब 12 लोगों की जान जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद नदी में खनन से बने खतरनाक गड्ढों और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई का मुद्दा बना हुआ है।
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नदी की धारा में प्रतिबंधित सक्शन और लिफ्टर मशीनों से मौरंग निकालने के कारण तलहटी में गहरे गड्ढे बन जाते हैं। पानी के भीतर इनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। नदी में उतरने वाले ग्रामीणों और बच्चों के लिए ये गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। खप्टिहा कलां और सांडी क्षेत्र में ऐसे ही गड्ढों में डूबने से कई की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालकों ने नाव घाटों के आसपास भी गड्ढे खोद दिए हैं।
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खनन क्षेत्र से बाहर मौरंग निकालने का आरोप
मामले में पट्टाधारक पर स्वीकृत खनन क्षेत्र से बाहर जाकर मौरंग निकालने और नदी की धारा में प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल करने के आरोप सामने आए। नदी की धारा में खनन से पर्यावरण और खनिज संपदा को नुकसान पहुंचने का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तक पहुंचा।
एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित खनन पर रोक लगा दी। साथ ही पर्यावरणीय क्षति और खनिज संपदा को हुए नुकसान की प्रतिपूर्ति कराने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने जिला मजिस्ट्रेट बांदा को संबंधित पट्टाधारक को पूर्ण सुनवाई का अवसर देने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश दिया है। आदेश प्रकाशित होने के बाद भी अब तक संबंधित पट्टाधारक से क्षति की भरपाई के लिए धनराशि वसूल नहीं की जा सकी है।
वर्जन
कहीं भी नदी की धारा में खनन प्रतिबंधित है। एनजीटी के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
-राज रंजन, खनन अधिकारी बांदा।

फोटो-18-केन नदी में खनन करतीं मशीनें। आर्काइव