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पुनर्विवाह में देवर-भाभी बने पति-पत्नी
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बांदा। शादी के कुछ माह बाद ही विधवा हुई मुरेड़ी गांव की वंदना सिंह का शनिवार को पुनर्विवाह करवाकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने बुंदेलखंड की जनता को नई राह दिखाई है। वंदना से विवाह उसके देवर शुभम सिंह ने किया है। भव्य मैरिज हाल में विधवा विवाह पूरी शान-ओ-शौकत से हुआ।
विधवा के पुनर्विवाह को लेकर समाज में संकोच की स्थिति रहती है। बुंदेलखंड में इसका चलन नहीं है। महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने कम उम्र में विधवा हुई महिला की दोबारा शादी कराने का बीड़ा उठाया है। इसकी शुरुआत वंदना और शुभम के विवाह से हुई है। दोनों ने सात फेरे लेकर एक दूसरे को जयमाल पहनाया। विवाहोत्सव में दोनों पक्षों के खानदानी और व्यवहारी शामिल हुए।
क्षत्रिय महासभा के बांदा जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह परिहार सहित अन्य पदाधिकारियों ने वर वधु को आशीर्वाद दिया। कहाकि बुंदेली धरती से शुरू हुआ यह शुभ कार्य देश-प्रदेश तक फैलाया जाएगा। कम उम्र में विधवा होने वाली बेटियों की उपेक्षा और दशा पर हम मूकदर्शक नहीं रह सकते।
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विधवा से पुन: सुहागन बनीं वंदना सिंह स्नातक हैं। बताया कि शादी के कुछ महीने बाद ही पति की मौत से जीवन में निराशा भर गई थी। सास-ससुर सहित ससुराल के सभी सदस्य और क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी उसके संकट मोचक साबित हुए। वंदना ने कहा कि उसकी ससुराल का माहौल मायके से भी अच्छा है। खुशी जताई कि उसे फिर वही परिवार ससुराल के रूप में मिला है। वंदना ने कम उम्र में विधवा होने वाली युवतियों से कहा कि हौसला रखें और परिवार की मदद से नए जीवन की शुरूआत करें।
शुभम सिंह का कहना है कि ससुराल में सभी के साथ सम्मानजनक और प्रेमपूर्ण व्यवहार से वंदना ने सभी का दिल जीत लिया था। बड़े भाई के निधन से उनके जीवन में निराशा थी। किसी महिला के लिए अकेला जीवन काटना मुश्किल होता है। इसी सोच की वजह से शादी का फैसला लिया। समाज के लोगों ने इसमें मदद की।
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विधवा के पुनर्विवाह को लेकर समाज में संकोच की स्थिति रहती है। बुंदेलखंड में इसका चलन नहीं है। महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने कम उम्र में विधवा हुई महिला की दोबारा शादी कराने का बीड़ा उठाया है। इसकी शुरुआत वंदना और शुभम के विवाह से हुई है। दोनों ने सात फेरे लेकर एक दूसरे को जयमाल पहनाया। विवाहोत्सव में दोनों पक्षों के खानदानी और व्यवहारी शामिल हुए।
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क्षत्रिय महासभा के बांदा जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह परिहार सहित अन्य पदाधिकारियों ने वर वधु को आशीर्वाद दिया। कहाकि बुंदेली धरती से शुरू हुआ यह शुभ कार्य देश-प्रदेश तक फैलाया जाएगा। कम उम्र में विधवा होने वाली बेटियों की उपेक्षा और दशा पर हम मूकदर्शक नहीं रह सकते।
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विधवा से पुन: सुहागन बनीं वंदना सिंह स्नातक हैं। बताया कि शादी के कुछ महीने बाद ही पति की मौत से जीवन में निराशा भर गई थी। सास-ससुर सहित ससुराल के सभी सदस्य और क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी उसके संकट मोचक साबित हुए। वंदना ने कहा कि उसकी ससुराल का माहौल मायके से भी अच्छा है। खुशी जताई कि उसे फिर वही परिवार ससुराल के रूप में मिला है। वंदना ने कम उम्र में विधवा होने वाली युवतियों से कहा कि हौसला रखें और परिवार की मदद से नए जीवन की शुरूआत करें।
शुभम सिंह का कहना है कि ससुराल में सभी के साथ सम्मानजनक और प्रेमपूर्ण व्यवहार से वंदना ने सभी का दिल जीत लिया था। बड़े भाई के निधन से उनके जीवन में निराशा थी। किसी महिला के लिए अकेला जीवन काटना मुश्किल होता है। इसी सोच की वजह से शादी का फैसला लिया। समाज के लोगों ने इसमें मदद की।