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करवा चौथ आज
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 29 Oct 2015 11:27 PM IST
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के लिए सुहागिनें 30 अक्तूबर शुक्रवार को चतुर्थी (करवा चौथ) का व्रत
रखेंगी। पूर्व संध्या पर बाजारों में खूब भीड़ रही। सुहागिनों ने चूड़ियों
और करवा के साथ पूजा सामग्री खरीदी।
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को रात 8.14 बजे के बाद चांद के दीदार होंगे। इसी के बाद चंद्र को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने सुहाग की सलामती के लिए मंगल कामना और व्रत परायण करेंगी। पंडित उमाकांत त्रिवेदी ने बताया कि दोपहर 12 बजे के बाद से चतुर्थी का मान शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि करवा चौथ के दिन चंद्रमा का पूजन चतुर्थी तिथि में किया जाना श्रेष्ठ रहता है। इसलिए शाम को चतुर्थी का मान मिलने के चलते सुहागिनों का इसी दिन करवा चौथ का व्रत रहना उत्तम रहेगा।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक चंद्रोदय के एक घड़ी (24 मिनट) के भीतर ही चंद्र को अर्घ्य देकर और गौरी गणेश का पूजन कहर चौथ माई के व्रत का पारण कर लेना चाहिए। उधर, पूर्व संध्या पर बाजार में जगह-जगह मिट्टी, तांबा व पीतल के करवा की दुकानें सजी रहीं। लेटेस्ट डिजाइनर चूड़ियां और कंगन भी खूब बिके।
पं. राजनारायण त्रिपाठी (महोखर) बताते हैं कि जाड़े की शुरुआत करवाचौथ से हो जाती है। गांव देहातों में लोक मान्यता है कि पूजन के दौरान सजे-धजे करवे की टोटी से ही जाड़ा (ठंड) निकलता है। इससे धीरे-धीरे ठंड का एहसास बढ़ जाता है। उसके बाद दीवाली से ठंड तेज होनी शुरू हो जाती है।
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को रात 8.14 बजे के बाद चांद के दीदार होंगे। इसी के बाद चंद्र को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने सुहाग की सलामती के लिए मंगल कामना और व्रत परायण करेंगी। पंडित उमाकांत त्रिवेदी ने बताया कि दोपहर 12 बजे के बाद से चतुर्थी का मान शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि करवा चौथ के दिन चंद्रमा का पूजन चतुर्थी तिथि में किया जाना श्रेष्ठ रहता है। इसलिए शाम को चतुर्थी का मान मिलने के चलते सुहागिनों का इसी दिन करवा चौथ का व्रत रहना उत्तम रहेगा।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक चंद्रोदय के एक घड़ी (24 मिनट) के भीतर ही चंद्र को अर्घ्य देकर और गौरी गणेश का पूजन कहर चौथ माई के व्रत का पारण कर लेना चाहिए। उधर, पूर्व संध्या पर बाजार में जगह-जगह मिट्टी, तांबा व पीतल के करवा की दुकानें सजी रहीं। लेटेस्ट डिजाइनर चूड़ियां और कंगन भी खूब बिके।
पं. राजनारायण त्रिपाठी (महोखर) बताते हैं कि जाड़े की शुरुआत करवाचौथ से हो जाती है। गांव देहातों में लोक मान्यता है कि पूजन के दौरान सजे-धजे करवे की टोटी से ही जाड़ा (ठंड) निकलता है। इससे धीरे-धीरे ठंड का एहसास बढ़ जाता है। उसके बाद दीवाली से ठंड तेज होनी शुरू हो जाती है।